चीन से बाहर निकलने की फिराक में क्यों है टिक टॉक

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नई दिल्ली : छोटे – छोटे वीडियो बनाने वाले ऐप की मूल कंपनी बाइट डांस ने चुपके चुपके हाल के महीनों में ऐसे कई कदम उठाए हैं. इन कदमों से ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि कंपनी अपना कामकाज चीन के बाहर से चलाना चाहती है. यह रणनीति सिर्फ टिकटॉक के लिए ही नहीं है. टिकटॉक चीन में नहीं दिखाई देता और बाइटडांस इसी तरह के अपने दूसरे कारोबार का नियंत्रण भी चीन से बाहर रखना चाहती है. इनमें भारत में चलने वाला सोशल मीडिया ऐप हेलो भी शामिल है.

बाइटडांस ने टिक टॉक के इंजीनियरिंग और रिसर्च और डेवलपमेंट ऑपरेशनों का विस्तार कैलिफोर्निया के माउंटेन व्यू में कर लिया है. सूत्र ने यह भी जानकानरी दी कि वहां 150 से ज्यादा इंजीनियरों को काम पर लगाया गया है. बाइटडांस ने न्यूयॉर्क में एक इंवेस्टर रिलेशंस डायरेक्टर भी नियुक्त किया है जो प्रमुख निवेशकों के साथ संपर्क में रहेगा. पहले यह काम बीजिंग से होता था. नए डायरेक्टर मिशेल हुआंग सॉफ्ट बैंक के निवेशक हैं जो इससे पहले एक जापानी कंपनी के बाइटडांस में निवेश पर काम कर रहे थे. हुआंग ने प्रतिक्रिया जताने के लिए भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं दिया.

कंपनी के कामकाज में ये बदलाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब अमेरिका और चीन के बीच कारोबार, तकनीक और कोविड-19 की महामारी को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है. इसके साथ ही अमेरिकी नियामक टिकटॉक पर भी सख्त नजर रख रहे हैं. बीते महीनों में टिक टॉक पूरी दुनिया में तेजी से लोकप्रिय हुआ है. कंपनी अमेरिका को अपना सबसे बड़ा बाजार मान रही है. कंपनी के संगठन में इन बदलावों को बाइटडांस के कर्मचारी भी संशय की निगाह से देख रहे हैं. ये लोग कंपनी के वैश्विक कामकाज को चीन से ही संचालित करना चाहते हैं. उन्हें चिंता है कि उनका महत्व कम हो सकता है और कई लोग तो दूसरी जगहों पर काम भी ढूंढने लगे हैं.

टिक टॉक के लिए अमेरिका में इंजीनिरिंग टीम का विस्तार करना अपने संसाधनों को चीन से हटाने जैसा है. अब तक उसके ऐप का सारा काम यहीं से होता रहा है. हालांकि गूगल जैसे बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए चीन में इंजीनियर को नौकरी पर रखना कोई हैरानी की बात नहीं है. पहले टिक टॉक के सारे इंजीनियर चीन में बैठे मैनेजरों को रिपोर्ट करते थे लेकिन कंपनी ऊंचे स्तर के एग्जिक्यूटिव की नियुक्ति अमेरिका में करना चाहती है ताकि इंजीनिरिंग विभाग पूरी तरह वहीं से काम करे. चीन वाली टीम से संपर्क को काटना हालांकि मुश्किल होगा. चीन में बैठे कुछ इंजीनियर टिक टॉक के साथ ही चीन के सोशल मीडिया ऐप डूयिन का भी संचालन करते हैं. दोनों ऐप का बुनियादी ढांचा एक ही है. ऐसे में उन्हें अलग करना मुश्किल होगा.

टिकटॉक ऐप कई देशों में बहुत लोकप्रिय हो रहा है. इनमें भारत और अमेरिका भी शामिल हैं. अमेरिका में कंपनी के चीनी स्वामित्व और निजी डाटा को संभालने को लेकर चिंता जताई जा रही है. कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर यूजरों के ऐप पर व्यवहार के मुताबिक वीडियो का सुझाव देती है. पिछले साल से टिक टॉक को अमेरिका में अधिकारियों की कड़ी निगरानी का सामना करना पड़ रहा है. अधिकारी इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि ऐप से राष्ट्रीय सुरक्षा को तो कहीं कोई खतरा नहीं है. अमेरिका की ट्रेजरी कमेटी ऑन फॉरेन इनवेस्टमेंट इन यूनाईटेड स्टेट्स, सीफीआईयूएस ने कंपनी की भी जांच भी की है. इस जांच के केंद्र में निजी जानकारियों की देखरेख ही था.

कानूनी जानकारों का कहना है कि नियामक एजेंसियां टिक टॉक के हाल के कदमों की पड़ताल कर यह पता लगाएंगी इनसे कोई जोखिम तो नहीं है और साथ ही यह भी कि आखिरकार किस तरह के बदलाव हो रहे है. सीफीआईयूएस के वकील पॉर मार्क्वार्ट का कहना है, “पुनर्गठन की कोशिशों के साथ एक मसला विश्वसनीयता का भी होता है. सीफीआईयूएस यह जानना चाहेगा कि वास्तव में कामकाज पूरी तरह स्वतंत्र है और किसी संभावित शत्रुतापूर्ण दखलंदाजी से मुक्त है या नहीं.”

चीन के कदमों और कंपनियों को संशय की निगाह से देखने के पीछे अमेरिका के मन में चीनी दखलंदाजी का डर है. उसे यह आशंका बनी रहती है कि कहीं ये कंपनियां चीन की सरकार के इशारे पर कुछ ऐसा तो नहीं करेंगी जिनसे अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है.

2018 में जब बाइटडांस ने म्यजिूक ऐप म्यूजिकली का अधिग्रहण किया तो कुछ सांसदों ने सीफआईयूएस से इसकी समीक्षा करने का आग्रह किया. रिपब्लिकन सीनेटर मार्को रूबियो भी उनमें शामिल थे. जब उनसे हाल के टिकटॉक के उठाए कदमों के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था, “जब तक टिक टॉक और दूसरी कोई कंपनी इस तरह से काम करती है कि उससे चीनी सरकार या कम्युनिस्ट पार्टी लाभ उठाए तो ऐसे एप्लिकेशन के इस्तेमाल पर खतरा रहेगा क्योंकि सच्चाई यह है कि यूजरों की जानकारी खतरे में होगी.”

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