खरना और छठ पर बना यह शुभ संयोग, होगी पूरी हर मनोरथ

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31 अक्टूबर को नहाय खाय के साथ छठ महापर्व का आरंभ हो चुका है। छठ व्रती नदियों और तालाबों में स्नान करके यह संकल्प ले चुके हैं कि हे छठ मैय्या मैं आपकी प्रसन्नता और अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए छठ का व्रत का संकल्प लेता हूं कि 1 नवंबर को खरना करके 2 नवंबर को अस्त होते हुए सूर्य को अर्घ्य प्रदान करूंगा और 3 नवंबर को उदित होते भगवान भास्कर को अर्घ्य प्रदान करके व्रत पूरा करूंगा। इस वर्ष छठ महापर्व पर भक्तों को छठ मैय्या की कृपा से ऐसे शुभ संयोग प्राप्त हुए हैं जो बेहद कल्याणकारी हैं।

1 नवंबर को खरना, इस तरह आरंभ करेंगे व्रत
शुक्रवार 1 नवंबर को व्रती संध्या के समय छठ मैय्या के लिए माटी के चूल्हे पर नए बर्तन में गुड़ और चावल से खीर बनाएंगे। इसके अलावा गुड़ की पूड़ियां, सादी पूरियां और विभिन्न तरह की मिठाइयां बनाकर केले के पत्तों पर छठ मैय्या के लिए प्रसाद निकालेंगे। छठ मैय्या को भोग लगाने के बाद व्रती इसी प्रसाद को ग्रहण करेंगे। पूरे दिन में यही व्रती का आहार होगा। इस पवित्र भोजन को ग्रहण करने के बाद व्रती अगले 36 से 40 घंटे तक कुछ भी नहीं खाएंगे जबतक कि वह उगते सूर्य को अर्घ्य ना दे लें।

सूर्य देव के शुभ योग में खरना और अर्घ्य
व्रती के संकल्प को पूर्ण सफल बनाने के लिए इस वर्ष खरना के दिन यानी 1 नवंबर को भगवान सूर्य से संबंधित रवि नामक शुभ योग बना है। छठ पर रवि योग का ऐसा संयोग बना है जो नहाय खाय से लेकर 2 नवंबर तक रहेगा। यानी इसी शुभ योग में ही सूर्य देव को संध्या कालीन अर्घ्य भी दिया जाएगा। ज्योतिषशास्त्र में इस योग को तमाम बाधाओं को दूर करने वाला माना गया है।

सर्वार्थ सिद्धि योग में होगा छठ का समापन
छठ पर्व पर इस वर्ष यह भी संयोग बना है कि उगते सूर्य को सूर्य देव से संबंधित दिवस यानी रविवार को अर्घ्य दिया जाएगा। रविवार 3 नवंबर को सर्वार्थ सिद्धि योग भी बना हुआ है जो सूर्योदय के साथ ही आरंभ हो रहा है। छठ पर्व के अंतिम दिन इस योग में सूर्य का उदित होना छठ व्रतियों के लिए शुभ संकेत है कि, इस वर्ष सूर्य देव जल्दी ही व्रतियों की मनोकामना सिद्ध करने वाले हैं। अन्न धन के मामले में यह वर्ष सुखद रहने वाला है।