राजनीति पकड़ में कमजोर होते चले गए अयोध्या केस के ये आरोपी

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शैलेंद्र दीक्षित, कानपुर। अयोध्या में छह दिसंबर 1992 को विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद इमारत को तोड़ने के कथित षड्यंत्र, भडकाऊ भाषण और पत्रकारों पर हमलों के कई मुकदमे पिछले 25 वर्षों से कानूनी दांव पेंच और अदालतों के भंवरजाल में उलझे हैं. आज इस पर फैसला सुनाया जा रहा है। कुल 49 में से 22 अभियुक्तों पर लखनऊ में और आठ पर रायबरेली में मुकदमे चलते आए हैं. इस बीच कम से कम दस अभियुक्तों और लगभग पचास गवाहों की मृत्यु हो चुकी है. मामलों के कई अभियुक्त, गवाह और पैरोकार भी इतने बूढ़े और कमजोर हो चले हैं कि उन्हें लखनऊ में विशेष अदालत की तीसरी मंजिल पर चढ़ने में भी कठिनाई होती है. इस मामले में बीजेपी के कई बड़े दिग्गज नेताओं को नामजद किया गया था। ये नेता बीजेपी में उस समय बड़ा कद रखते थे। लेकिन आज ये पार्टी के किसी खास कार्यक्रमों तक ही सिमट गए हैं और इनकी तेज तर्रार छवि भी काफी कमजोर हो गई है।

छह दिसंबर 1992 को विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद इमारत पूरी तरह से ध्वस्त होने के बाद थाना राम जन्मभूमि, अयोध्या के प्रभारी पीएन शुक्ल ने शाम पांच बजकर पन्द्रह मिनट पर लाखों अज्ञात कार सेवकों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा कायम किया. इसमें बाबरी मस्जिद गिराने का षड्यंत्र, मारपीट और डकैती शामिल है.

ये नामजद अभियुक्त हैं
अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, विष्णु हरि डालमिया, विनय कटियार, उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा.

लाल कृष्ण आडवाणीः बीजेपी को एक राष्टीय स्तर की पार्टी बनाने में आडवाणी का अहम रोल रहा है। वे भी इस मामले में नामजद हैं। 92 वर्षीय आडवाणी को राष्टीय जनतांत्रिक गठबंधन ने 2008 में अपना नेता चुना था, चुनाव जीतने पर उनका पीएम बनना तय था। लेकिन इतना बड़ा कद होने के बाद भी वह कभी पीएम नहीं बन सके। राष्टपति चुनाव के लिए भी बीजेपी की तरफ से उनको टिकट देने की उम्मीद चल रही थी। लेकिन अयोध्या मामले में नामजद होने के कारण उनको इस पद के लिए किनारा कर दिया गया। अभी वह राजनीति से दूर-दू’र ही नजर आते हैं।

़कल्याण सिंहः यूपी के मुख्यमंत्री रह चुके कल्याण सिंह पर भी अयोध्या मामले में आरोप लगे थे। बीजेपी में बड़ा कद होने के बाद भी अयोध्या मामले के बाद उन्हे पार्टी छोडनी पडी थी और राष्टीय क्रांति पार्टी बनानी पड़ी थी। वह पार्टी भी कुछ कारगर नहीं साबित हुई। हालांकि बाद में उन्होंने बीजेपी में फिर वापसी की और उन्हें राजस्थान का राज्यपाल बनाया गया। वर्तमान में वह राजनीतिक गलियारे में कम ही दिखाई पड़ते हैं और पार्टी में उनका कद भी काफी पीछे दिखाई देने लगा है।

उमा भारतीः 60 वर्षीय उमा भारती अपने भाषणों से काफी चर्चा में रहीं। अयोध्या मामले में इनको भी नामजद किया गया था। मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी उमाभारती बीजेपी में एक बड़ा नाम थीं। लेकिन 2004 में उन्हें बीजेपी से बर्खास्त कर दिया गया था। बाद में वह बीजेपी में फिर शामिल हुईं और मोदी के पहले कार्यकाल में उन्हे मंत्री पद भी दिया गया। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में वह राजनीति से दूर रहीं। अभी गंगा सफाई अभियान से वह जुड़ी हुई हैं।

मुरली मनोहर जोशीः मूलरूप से उत्तराखंड के रहने वाले मुरली मनोहर जोशी को बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में नामजद किया गया था। एक हिंदूवादी छवि के तेज तर्रार नेता मुरली मनोहर जोशी एक समय बीजेपी में बड़ा कद रहते थे। अटल विहारी वाजपेयी जब पीएम थे, तो वह जोशी के मसविरे को कभी काटते नहीं थे। 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कानपुर सीट से चुनाव जीता था। लेकिन 2019 में उनका टिकट काट दिया गया।
विनय कटियार- बाबरी मस्जिद मामले में विनय कटियार नामजद अभियुक्त हैं। बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय काफी चर्चा में आ गए। विवादित बयानों के लिए चर्चित विनय कटियार एक समय बीजेपी के फायर ब्रांड नेता थे। बीजेपी के साथ विपक्षी पार्टियों में हमेशा वह चर्चा में बने रहते थे। अभी वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य हैं।

अशोक सिंघलः 1984 में दिल्ली के विज्ञान भवन में एक धर्म संसद का आयोजन किया गया। सिंघल इस के मुख्य संचालक थे। यहीं पर राम जन्मभूमि आंदोलन की रणनीति तय की गई। यहीं से सिंघल ने पूरी योजना के साथ कारसेवकों को अपने साथ जोड़ना शुरू किया। उन्होने देश भर से 50 हजार कारसेवक जुटाये। सभी कारसेवकों ने राम जन्म भूमि पर राम मंदिर स्थापना करने की कसम देश की प्रमुख नदियों के किनारे खायी। 1992 में विवादित ढाँचा तोड़ने वाले कारसेवकों का नेतृत्व सिंघल ने ही किया था। 17 नवंबर 2015 को उनका निधन हो गया।