२५०० साल पुराने पुरी स्वर्गद्वार श्मशान घाट का बदलेगा रूप

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भुवनेश्वर.- २५०० साल पहले आदी शंकराचार्य ने पुरी में स्वर्गद्वार श्मशान घाट स्थापित करवाया था । इसी स्थान पर पवित्र ब्रह्मदारू (पवीत्र लकड़ी)जिससे जगन्नाथ , वलभद्र व सुभद्रा की प्रतिमा बनायी गयी हैं, तैरते हुए पुरी के समुद्र तट पर पहुची थी। इसलिए इस स्थान को पवित्र माना जाता है। २५०० साल से यह श्मशान घाट लोगों को दाह संस्कार सेवा देता आया है। ओडिशा व राज्य बाहर के लोगों में भी एक विश्वास है कि यहा अन्तिम संस्कार कराने बालों की आत्मा को स्वर्ग में स्थान मिलता है। इसे लोग स्वर्ग का प्रवेश द्वार मानते हैं। इसे हिन्दुओंका एक पवित्र स्थान माना जाता है। १४०वें शंकराचार्य स्वामी मधुसूदन तीर्थ तक यह श्मशान घाट का नियन्त्रण पुरी शंकराचार्य मठ गोवर्धन पीठ के पास था। इस समय राज्य सरकार (राजस्व विभाग)के पास है। १९८४ में इसका नियन्त्रण राजस्व विभाग को हस्तान्तर किया गया । तब से इसे पुरी के नगर पलिका देखरेख कर रही है। आदी शंकराचार्य ने यहा एक शिवमन्दिर का स्थापना कराई थी। बाद में यहा एक काली मन्दिर भी बना।

३३ एकर से ४६४ डेसिमिल
लेकिन इस समय यह श्मशान घाट जमीन की कमी से जुझ रहा है। आदी शंकराचार्य के समय यह ३३ एकर इलाके में था। लेकिन हर समय स्थानीय प्रभावशाली लोग, राज्य बाहर से आये लोग यहा होटल, दुकान,आवास बनाने के लिए इसपर अतिक्रमण करते गये। १८९९ में यहा पर १६ एकर ४०० डेसिमल जमीन ही खाली बची थी। जो कि अब घट कर ४६४ डेसिमल रह गई है। यह जमीन पुरी के बालिसाही मौजा के खेता नम्बर ३३, प्लाट नम्बर ८५३ में है। १९८५ में राजस्व विभाग के ततकालीन तहसीलदार ने केबल ९०० डेसिमाल जमीन ही सोंपी थी। । यहा@ हर दिन हजारों शव का अन्तिम संस्कार होता है। । जमीन की कमी को देखते हुए १९८७ में अतिरिक्त १०० डेसिमल जमीन दी गई थी। लेकिन १९८९ को देखा गया था कि यह भूमी संकुचित होते हुए ४६४ डेसिमल में रह गया है।

शव दाह के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है
वर्तमान वासतव में श्मशान घाट के पास मात्र १०० डेसिमाल जमीन ही बची है।
इस समय इस जमीन पर एक शिव मन्दिर, एक काली मन्दिर, बीजू पटनायक का एक समाधी स्थल, एक विश्राम कमरा, एक शव पंजिकरण कार्यालय, वन निगम का एक लकडी गोदाम आदी है। जिससे शव दाह के लिए पर्याप्त जमीन नहीं बची है

मुख्यमंत्री का फैसला
इसके लिए मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने एक तोड निकाला है। मुख्यमन्त्री ने पहले अपने पिता दिवंगत बीजू पटनायक का समाधि स्थल को स्वर्गद्वार से हटाने के लिए फैसला किया है। स्वर्गद्वार के लिए राज्य सरकार पहले चरण में पांच करोड रूपये खर्च करेगी। यह राशी मुख्यमंत्री का राहत कोष से दी जाएगी। अशा की जाती है कि अब स्वर्गद्वार का रूप बदलेगा।