हरियाणा में फंसा खेल, दुष्यंत बन गए किंगमेकर

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चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के करीब-करीब बराबरी पर रुकने के बाद दुष्यंत चौटाला किंगमेकर बने हैं और उनकी चाबी निशान वाली जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के पास सत्ता की चाबी है। पिछले साल दिसंबर में उन्होंने जेजेपी के नाम से अपनी नई पार्टी बनाई थी। हरियाणा के कद्दावर सियासी परिवार के वारिस दुष्यंत को सियासत विरासत में मिली है। उनके परदादा और पूर्व उपप्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल ताऊ के नाम से चर्चित थे। चुनाव से पहले दुष्यंत की पार्टी को विपक्षियों ने हल्के में लिया था, लेकिन चंद महीनों में ही दुष्यंत देवीलाल की विरासत के वारिस बनते नजर आ रहे हैं। एक नजर दुष्यंत चौटाला और उनकी पार्टी के सफर पर:

सबसे युवा सांसद का रेकॉर्ड
दुष्यंत चौटाला जेजेपी के अध्यक्ष और संस्थापक हैं। 16वीं लोकसभा में वह हिसार निर्वाचन क्षेत्र से सांसद चुने जा चुके हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में चौटाला ने हरियाणा जनहित कांग्रेस (भजनलाल) के कुलदीप बिश्नोई पर जीत हासिल की थी। इसके बाद उनका नाम ‘लिम्का बुक ऑफ रेकॉर्ड’ में दर्ज किया गया। दुष्यंत का जन्म 3 अप्रैल 1988 को अजय चौटाला और नैना चौटाला के घर हुआ। दुष्यंत हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के पोते हैं। इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) से निष्कासित होने के बाद उन्होंने 9 दिसंबर, 2018 को जेजेपी का गठन किया था।

पीएम मोदी ने भी रैली में किया जिक्र
हरियाणा के घाघ राजनेता जिस जेजेपी को बच्चा पार्टी कहते थे, उसने चंद महीनों में खुद को खड़ा कर अपने तेवर दिखा दिए। दुष्यंत चौटाला की अगुआई वाली यह पार्टी आज चुनाव नतीजों के वक्त चर्चा के बड़े केंद्र में है। इस पार्टी का नाम तो खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरियाणा में हुई एक रैली के दौरान कर चुके हैं। बात साफ है कि सत्तारूढ़ बीजेपी और कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टियों के बीच जंग में जेजेपी ने खुद का लोहा मनवा लिया है और इस चुनाव से यह भी साफ हो गया है कि प्रदेश की राजनीति में अब जेजेपी के ऊपर चस्पा बच्चा पार्टी का लेबल भी धुल गया है।