कार्तिक माह में सूर्य को अर्धय देने का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

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नई दिल्ली। कार्तिक माह के शुक्लपक्ष की षष्ठी और सप्तमी तिथि पर सूर्य को अर्धय दिया जाता है। षष्ठी यानी छठ तिथि पर अस्ताचलगामी सूर्य को और सप्तमी तिथि पर उदय होते सूर्य को अर्धय दिया जाता है। ग्रंथों में कार्तिक माह में सूर्य को अर्धय देने का विशेष महत्व बताया गया है। इसलिए छठ पूजा पर अस्त होते सूर्य और उसके अगले दिन उदय होते सूर्य को अर्धय दिया जाता है। इस महीने सूर्य को अर्धय देने के पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक कारण छुपे हैं।

सूर्य से बनता है वनस्पतियों में औषधीय अर्क

सूर्य की किरणें वनस्पतियों में औषधीय अर्क का निर्माण करती हैं। शास्त्रों में सूर्य के बारह रूप हैं। इन्हीं रूपों से हिन्दी के महीनों का संबंध है। हर मास में सूर्य का रूप अलग है। साल के 6 महीने सूर्य उत्तरायण होते हैं और अन्य 6 महीने दक्षिणायन होते हैं। दक्षिणायन होते हुए सूर्य सृजन करते हैं और उत्तरायण के समय पालन करते हैं। सूर्य सिर्फ प्रकाश नहीं भोजन और शक्ति भी है। भोजन से प्राप्त होने वाली ऊर्जा भी सूर्य से मिलती हैं। इसलिए वेदों में सूर्य को जगत सृष्टा यानी सृजन करने वाला माना गया है और सूर्य को ही पालनकर्ता भी कहा गया है।

कार्तिक महीने में सूर्य को अर्धय देने का महत्व

कार्तिक महीने में सूर्यदेव धाता रूप में होते हैं। इस महीने सूर्य अपनी सप्तरश्मियों से मन, बुद्धि, शरीर और ऊर्जा को नियंत्रित करके सृजन करने के लिए प्रेरित करते हैं। इस महीने में सूर्य को अर्धय देने से पवित्र बुद्धि और मन का सृजन होता है। जिससे अच्छे कर्म होते हैं और उनसे मोक्ष मिलता है।

विज्ञान के अनुसार बढ़ती है प्रजनन शक्ति

पदमश्री और बीसी रॉय नेशनल अवार्ड प्राप्त हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. के.के.अग्रवाल के अनुसार कार्तिक माह में महिलाओं और पुरुषों में प्रजनन शक्ति बढ़ती है और गर्भवती माताओं को विटामिन-डी नितांत आवश्यक है। विज्ञान के अनुसार सबसे ज्यादा विटामिन डी सूर्योदय और सूर्यास्त के समय मिलता है।

सूर्य को जल चढ़ाने का वैज्ञानिक महत्व

सूर्य को जल चढ़ाने के पीछे रंगों का विज्ञान छिपा है। मानव शरीर में रंगों का संतुलन बिगड़ने से भी कई रोगों के शिकार होने का खतरा होता है। सुबह के समय सूर्यदेव को जल चढ़ाते समय शरीर पर पड़ने वाले प्रकाश से ये रंग संतुलित हो जाते हैं। (प्रिज्म के सिद्दांत से) जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधात्मक शक्ति बढ़ जाती है। सूर्य की रौशनी से मिलने वाला विटामिन डी शरीर में पूरा होता है। त्वचा के रोग कम होते हैं।