भाजपा-शिवसेना पर ओवैसी ने ली चुटकी, कहा- ये 50-50 क्या है, नया बिस्किट है?

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नई दिल्ली। महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर रस्साकशी जारी है। मुख्यमंत्री पद की मांग कर शिवसेना 50-50 फॉर्मूले पर अड़ी हुई है, वहीं भाजपा अभी इंतजार की रणनीति अपना रही है। इसी बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा-शिवसेना गठबंधन पर तंज कसा है। उन्होंने पूछा है कि ये 50-50 क्या है? क्या ये एक नया बिस्किट है? साथ ही ओवैसी ने कहा कि इन लोगों को जनता की समस्याओं से कोई लेना देना है।

ओवैसी ने कहा कि ये 50-50 क्या है? कुछ महाराष्ट्र की जनता के लिए बचाकर रखिए। उन्हें (भाजपा और शिवसेना) सतारा में हुई बारिश से हुए नुकसान पर कोई चिंता नहीं है। वे लोग केवल 50-50 पर बात कर रहे हैं। यह किस तरह का सबका साथ सबका विकास है?

गौरतलब है कि भाजपा-शिवसेना गठबंधन के पक्ष में नतीजे आने के बावजूद दोनों दलों में अब तक सरकार गठन को लेकर कोई सहमति नहीं बन पाई है। शिवसेना नेता संजय राउत ने शनिवार को कहा कि सबसे बड़ा दल होने के नाते भाजपा को सरकार गठन का अधिकार है। भाजपा को बहुमत साबित करने को 15 दिन का समय दीजिए, अगर वह ऐसा नहीं कर पाती है तो शिवसेना बहुमत साबित करेगी। राउत ने कहा कि भाजपा-शिवसेना गठबंधन की सरकार बनाने का फार्मूला चुनाव से पहले तय हो गया था। भाजपा अब उससे पीछे हट रही है।

इसके साथ ही राउत ने कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद हुसैन दलवई के सोनिया गांधी को लिखे पत्र का भी स्वागत किया। दलवई ने पत्र लिखकर शिवसेना का समर्थन करने का अनुरोध किया था। हालांकि इसके साथ ही उन्होंने कहा कि शिवसेना आखिरी पल तक गठबंधन धर्म को निभाएगी। राज्य के मौजूदा राजनीतिक हालातों पर विचार करें तो शिवसेना और भाजपा को छोड़कर सभी दल एक दूसरे से बातचीत कर रहे हैं। हमने सरकार बनाने को लेकर कभी बातचीत बंद नहीं की, लेकिन बात कभी शुरू भी नहीं हुई।

क्या राष्ट्रपति भाजपा की जेब में हैं?

इससे पहले, शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार के बयान को लेकर निशाना साधा। सामना में ‘महाराष्ट्र का अपमान, क्या राष्ट्रपति आपकी जेब में हैं?’ शीर्षक से लिखे लेख में मुनगंटीवार के बयान को अलोकतांत्रिक व असांविधानिक बताया गया। इसमें लिखा, मुनगंटीवार द्वारा दी गई धमकी से आम लोग क्या समझेंगे? इसका मतलब भारत के राष्ट्रपति आपकी (भाजपा की) जेब में हैं या राष्ट्रपति दफ्तर की मुहर भाजपा के दफ्तर में रखी हुई है? क्या ये लोग यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि महाराष्ट्र में सरकार नहीं बनने पर भाजपा राष्ट्रपति शासन थोप सकती है। गौरतलब है कि शुक्रवार को भाजपा नेता ने कहा था कि अगर सात नवंबर तक सरकार नहीं बनती है, तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो सकता है।

गुर्राने वाले बाघ का क्या करना है, मुझे पता है

सामना के तीखे संपादकीय पर मुनगंटीवार ने कहा है कि गुर्राने वाले बाघ के साथ क्या करना चाहिए, मुझे पता है क्योंकि मैं राज्य का वनमंत्री हूं। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि मैंने हमेशा भाजपा-शिवसेना गठबंधंन को जोड़ने के प्रयास किए हैं। इस बार भी हर हाल में गुर्रा रहे बाघ को हमें साथ लेना ही है। चुनाव नतीजों को करीब दस दिन हो रहे हैं और सरकार नहीं बनी है, ऐसे में मैंने वही कहा जो कानून और संविधान के अनुसार है। इसमें गलत कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि जनादेश का सम्मान करना भाजपा और शिवसेना का कर्तव्य है। मंत्री पदों के बंटवारे पर बैठकर बातचीत हो सकती है। मुझे भरोसा है कि 6 या 7 नवंबर को महाराष्ट्र में नई सरकार शपथ लेगी।

फडणवीस ने बुलाई बैठक, नहीं पहुंचे शिवसेना के मंत्री

इस बीच, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा बुलाई गई मंत्रियों की बैठक में शिवसेना के मंत्री शामिल नहीं हुए। फडणवीस ने महाराष्ट्र में भीषण बरसात से किसानों को हुए नुकसान और क्षतिपूर्ति पर विचार विमर्श को लेकर कैबिनेट उपसमिति की बैठक बुलाई थी। शिंदे ने कहा कि वह औरंगाबाद जा रहे हैं और सीधे खेतों में जाकर किसानों से मिलेंगे।