जानें अयोध्या पर क्या था इलाहाबाद हाई कोर्ट का 2010 का फैसला

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अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट शनिवार को सुबह 10.30 बजे फैसला सुनाएगा. 40 दिन तक चली सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 16 अक्टूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था. बता दें कि इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2010 में अपना फैसला सुनाया था. हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी.

30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अयोध्या के विवादित स्थल को राम जन्मभूमि करार दिया था. हाई कोर्ट ने 2.77 एकड़ जमीन का बंटवारा कर दिया गया था. कोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्माही अखाड़ा और रामलला के बीच जमीन बराबर बांटने का आदेश दिया था.

केस से जुड़ी तीनों पार्टियां निर्मोही अखाड़ा, सुन्नी वक्फ बोर्ड और रामलला विराजमान ने यह फैसला मानने से इनकार कर दिया था. हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 14 अपील दायर की गई. यह मामला पिछले नौ वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित था.

40 दिन तक हुई रोजाना सुनवाई

इस मामले की 6 अगस्त से सुप्रीम कोर्ट में रोजाना सुनवाई शुरू हुई जो 16 अक्टूबर को खत्म हुई. सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पांच जजों की बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. इस पीठ में न्यायमूर्ति बोबडे, न्यायमूर्ति धनंजय वाई चन्द्रचूड, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर थे.

अयोध्या में धारा 144 लागू

फैसले के मद्देनजर अयोध्या में धारा 144 लागू है. साथ ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. अयोध्या में अर्धसैनिक बलों के 4000 जवानों को तैनात किया गया है. अधिकारी ने बताया कि राज्यों को सभी संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त सुरक्षाकर्मी तैनात रखने और यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि देश में कहीं भी कोई अप्रिय घटना न हो.