खालिस्तान समर्थकों को न्योते से भारत नाराज

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बहुप्रतीक्षित करतारपुर कॉरिडोर मामले में पाकिस्तान का रवैया भविष्य में भारत के साथ तनाव का नया कारण बन सकता है। इस परियोजना को लटकाने में नाकाम रहने बाद अब पाकिस्तान ने दुनियाभर में फैले खालिस्तान समर्थकों को 550वें प्रकाश पर्व समारोह के लिए न्योता भेजा है, जिससे भारत नाराज है और गुरुवार को इस परियोजना पर समझौते के दौरान वह इस पर अपनी आपत्ति दर्ज कराएगा। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान ने पहले योजनाबद्ध ढंग से इस परियोजना को लटकाने की कोशिश की ताकि भारतीय सिखों को भड़काया जा सके।
वह इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भुनाना चाहता था, इसी वजह से शुरुआती बातचीत में श्रद्धालुओं से सेवा शुल्क न लेने पर सैद्धांतिक सहमति देने के बाद अब पाकिस्तान सेवा शुल्क वसूलने पर अड़ गया है। इसके अलावा उसने मौजूदा पीएम नरेंद्र मोदी की जगह पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इस परियोजना से जुड़े समारोह में आमंत्रित कर अपनी कुटिल मंशा जाहिर की। वह इस परियोजना को लटकाने का ठीकरा भारत पर फोड़ना चाहता था लेकिन इसमें वह कामयाब नहीं हो सका।

पाक के मंसूबों को भांपते हुए ही पहले किसी भी कीमत पर सेवा शुल्क पर सहमति न देने पर अड़े भारत ने अचानक समझौते के लिए हामी भर दी। इस दांव से भारत ने पाकिस्तान की सिखों में नाराजगी उत्पन्न करने और आपसी संबंध सुधारने के प्रयासों में भारत के अड़ंगा लगाने की अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को संदेश देने की मंशा पर पानी फेर दिया। साथ ही पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने बतौर श्रद्धालु समारोह में जाने की बात कह पाकिस्तान के दूसरे दांव को भी नाकाम कर दिया।

अब खालिस्तानी पेंच
इस कॉरिडोर के दुरुपयोग को लेकर भारत पहले से ही सतर्क है। उसे शुरुआत से ही आशंका रही है कि पाकिस्तान दर्शन करने जाने वाले श्रद्धालुओं को भारत के खिलाफ भड़का सकता है। इस आशंका को तब बल मिला जब पाकिस्तान ने अपने यहां आयोजित समारोह में शिरकत करने के लिए कनाडा, अमेरिका और यूरोप स्थित खालिस्तान समर्थकों को न्योता भेजा। सरकारी सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान ने सिख समुदाय से जुड़े ऐसे लोगों को बुलाया है जो अतीत में पंजाब के खालिस्तानी मुहिम के कट्टर समर्थक रहे हैं।