बुलबुल का प्रभाव- नाव पलटी 8 मछुआरें बचे, मिट्टी के घर, पेड़ व बिजली के खम्भे गिरना शुरू

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भुवनेश्वर। शुक्रवार 8 नवम्बर की रात व शनिवार , 9 नवम्बर के सुबह से ही ओडिशा के तट्टीय शहर पारादीप व भद्रक जिले के चान्दवाली में बुलबुल का असर देखने को मिला है। धामरा में भी सामान्य जनजीवन पर इसका असर पड़ा है। इन शहरों में भारी बारीश होने के साथ तेज हवा भी चल रही है। सुबह 8 बजे तक पिछले 24 घंटों में पारादीप में 159, चान्दवाली में 143, बालेश्वर में 32 मिमी की बारीश हुई है। धामरा में इस समय 80 स 110 किमी रपद्दतार से हवा चलने लगी है। गति बढ रही है। स्थानीय मौसम विभाग की ओर से आज सुबह कहा गया था, कि बुलबुल इस समय पारादीप से 110 किलोमीटर की दूरी पर है। खबर लिखे जाने तक 95 किलोमीटर की दूरी पर होने की सूचना दी जा रही है।

इस समय इसका रूख उत्तर-पूर्व की ओर है। एसआरसी प्रदीप कुमार जेना के मुताबिक शनिवार को 10 से 11बजे तक बुलबुल ओडिशा तट से दूर जा चुका है। लेकिन अगले 8,9 घंटों तक चार जिला भद्रक, बालेश्वर, जगतसिंहपुर व केन्द्रापड़ा में बारीश लगी रहेगी। सूचना के मुताबिक इस समय धामरा में प्रति घंटा 110 किलोमीटर की रपतार से हवा चल रही है। जगतसिंहपुर, केन्द्रापडा व भद्रक में कई स्थान पर पेड़ टूट कर सड़क पर गिरे हुए हैं। लेकिन एनडीआरएफ व ओड्राफ टीम के जवान मौके पर पहुंच कर पेड़ काटकर रास्ता साफ करने की कोशिश में हैं।

शुक्रवार की रात को तेज हवा की बजह से भद्रक जिले के धामरा कालीनाली के पास समुद्र में एक नाव पलट गई जिसमें 8 मछुआरे थे। नाव को उद्धार करना सम्भव नहीं हुआ है लेकिन मछुआरें बच गये हैं। यह घटना कालीनाली के पास घटी है। बुलबुल की सूचना मिलने के बाद पश्चिमबंग के आठ मछुआरे एक नाव में धामरा की ओर रूख किये थे। लेकिन किनारे पर पहंुचने से पहले ही नाव पलट गई तो मछुआरे तैरते हुए किनारे पहुंचने के बाद धामरा के पास एक जंगल में हैं। उन्हे धामरा के आश्रय स्थल तक लाने का कोशिश जारी है। बंगाल के मछुआरों की 37नावों ने धामरा, तलसारी इलाके में समुद्र में डेरा डाला हुआ है।

पारादीप के बीजू मैदान में कलिंग वालियात्रा में शामिल होने के लिए राज्य भर से कारोबारी पहुंचे थे। जिला प्रशासन की ओर से पुलिस सहायता से उन्हे आज सुबह से सुरक्षित स्थान को स्थानान्तर किया जा रहा है।

राज्य के मुख्य सचिव असित त्रिपाठी ने पत्रकारों से कहा है कि बुलबुल प्रभाव से कई स्थान पर फसल को नुकसान पहंुचा हैं । यह एक बडी चिन्ता की बात है, आकलन के बाद इसकी प्राथमिक रिपोर्ट बनानी होगी।