दिल्ली सरकार की रोक बावजूद निजी स्कूल ले रहे पूरी फीस, शिक्षा निदेशालय ने कड़ी कार्यवाही करने की बात कही

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नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली में लॉकडाउन लागू होने के बाद से ही निजी स्कूल की फीस का मुद्दा गरमाया हुआ है। दिल्ली सरकार ने राजधानी के निजी स्कूल संचालकों को छूट दी थी कि वह ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित करने के एवज में विद्यार्थिंयों से केवल ट्यूशन फीस ही लें। लेकिन शिक्षा निदेशालय और दिल्ली सरकार द्वारा रोक के बावजूद कई स्कूल फीस को लेकर कोई राहत देने को तैयार नही हैं। निजी स्कूल अभिभावकों से ट्यूशन फीस के साथ ही वार्षिंक शुल्क, परिवहन शुल्क समेत अन्य मदों में फीस मांग रहे हैं। अभिभावकों को फीस जमा करने के लिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं। दूसरी ओर यह भी शिकायत मिल रही है कि स्कूलों की तरफ से ट्यूशन फीस में भी वृद्धि की जा रही है। इन सब पहलुओं की लगातार शिकायतें मिलने के बाद निदेशालय ने कड़ा रुख अपनाया है।

शिक्षा निदेशक बिनय भूषण का कहना है कि उनके संज्ञान में ऐसे कई निजी स्कूलों की शिकायतें हैं। यह स्कूल मनमाने तरीके से फीस वृद्धि कर रहे हैं और फीस न जमा करने पर छात्रों को ऑनलाइन कक्षाओं की सुविधा नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी स्कूल शुल्क वृद्धि नहीं करेगा और अगर फीस वृद्धि या छात्रों को ऑनलाइन कक्षाओं से वंचित रखने की शिकायत मिलती है तो उन स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। भूषण के मुताबिक फीस जमा करने को लेकर 18 अप्रैल को निदेशालय द्वारा जारी हुआ आदेश लागू रहेगा। साथ ही जिन विद्यालयों ने अभिभावकों पर एक साथ तीन माह की फीस जमा करने का दबाव बनाया है और फीस में वृद्धि की है उन स्कूलों को जल्द ही नोटिस भेजा जाएगा और नोटिस में कारण न स्पष्ट होने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

17 अप्रैल को शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने फीस बढ़ोतरी की शिकायतें मिलने के बाद निजी स्कूलों को फीस न बढ़ाने, ऑनलाइन कक्षाओं से नाम न काटने, ट्रांसपोर्ट शुल्क न वसूलने, तीन माह की फीस एक साथ न वसूलने को लेकर आदेश जारी किया था। इसके साथ ही यह भी कहा था कि सभी निजी स्कूल अपने स्टाफ को समय पर वेतन देंगे। जो स्कूल ऐसा नहीं करेंगे उन पर आपदा कानून और दिल्ली स्कूल एक्ट के तहत कार्रवाई होगी। जो भी स्कूल लॉकडाउन के समय फीस वृद्धि करते हैं उनको नोटिस जारी करने की तैयारी हैए ऐसे सभी स्कूलों पर तत्काल कार्रवाई होगी- बिनय भूषण, शिक्षा निदेशक

ज्यादातर स्कूल मासिक तौर पर ही फीस ले रहे हैं। वहीं कई स्कूल ऐसे भी है जहां अब तक केवल 20 से 40 प्रतिशत अभिभावकों ने ही फीस दी है। कई स्कूलों ने पिछले पांच वर्षों से फीस नहीं बढ़ाई है। वहीं कई अभिभावको ने तो अभी तक मई की फीस भी जमा नहीं की है। इस समय ज्यादातर स्कूलों की आर्थिंक हालत खराब है

कई स्कूलों ने पिछले तीन सालों से लगातार बढ़ाकर फीस ली है। स्कूल तीन माह की फीस माफ भी कर दे तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इसके साथ ही निजी स्कूल लॉकडाउन खुलने के बाद भी इस साल फीस की वृद्धि न करें

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