मुख्यमन्त्री ने किया हविष्याली शिविर का उद्घाटन

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भुवनेश्वर.– आज से पुरी में कार्तिक हविष्य मनाने वाले हजारों व्रत धारियों का हविष्य कार्यक्रम शुरू हुआ है। यह कार्यक्रम एक माह तक चलने वाला है व इसे आम तौर पर राज्य के विधवा (अधिकत्तर बुजुर्ग) महिलाओं(हविष्याली) की ओर से मनाया जाता है। ब्रतधारी एक माह तक पुरी में रहकर पौ फटने से पहले जाग जाते हैं। फिर पंचतीर्थ(पांच पवित्र तलाव) में स्नान करके जगन्नाथ महाप्रभु का दर्शन करते हैं। शुद्धपुत तरीके से बृन्दावति व राइ-दामोदर का पूजा करते हैं। इस दौरान वे एक माह तक सिर्फ फल भोजन या जगन्नाथ महाप्रभु का अबढा प्रसाद ही लेते हैं। दिन भर ग्रुप में भागवत व अन्य धर्मग्रन्थ का पाठ करते हैं। कई लोग अपने दिवंगत पतियों के लिए आकाशदीप भी जलाते हैं।
जिला प्रशासन के मुताबिक दूसरे साल की तरह इस साल भी राज्य सरकार की ओर से हविष्यालियों के लिए तीन स्थान पर शिविर लगाये गये हैं। यह स्थान हैं रेलवे टुरिष्ट काम्प्लेक्स, मोचिसाही स्थित कल्याण मंडप व नरेन्द्र कोण स्थित हविष्याली भवन। पहले जगन्नाथ बल्लभ मठ में जो हविष्याली रहते हैं उन्हे इस साल नरेन्द्र कोण के हविश्याली भवन में रखे जाने की व्यबस्था किया गया है। पूरा व्यवस्था का उदघाटन मुख्यमन्त्री नवीन पटनायक ने भुवनेश्वर स्थित लोकसेवा भवन से वीडियो कान्प्रÀेनसींग के जरिये किया है। पुरी जिला प्रशासन से मिली सूचना के मुताबिक तीनों शिविर १३ अक्टूबर से १२ नवम्बर तक चलने वाला है। ३ शिविरों में ३००० हविष्यालियों को रखने का इन्तजाम किया गया है। टुरिष्ट काम्प्लेक्स में ५००, नरेन्द्र कोण में ६९२ व मोचिसाही कल्याण मंडप में ३१५ हविष्यालियों के लिए व्यवस्था किया गया है। जिसके लिए राज्य के २३४० हविष्याली का पंजीकरण किया जा चुका हैं। इनमें से ३०७ हविष्याली शिविरों में पहुच चुके हैं। हर शिविर में इनके लिए सुरक्षा, स्वास्थ्यसेवा के साथ गरम पानी मुहैया कराने का भी इंतजाम किया गया है।
हविष्यालियों के लिए श्रीमन्दिर में महाप्रभु का दर्शन व मुपÌत में अवढा लेने के लिए प्रशासन की ओर से विशेष व्यबस्था किया गया है। आज से जगन्नाथ मन्दिर का द्वार सुबह साढे चार बजे से ही खोल दिये जाएंगे।