कार्बन प्रदूषण महामारी के चरम पर 17 फीसदी कम हुआ

0
178

नई दिल्ली : पिछले महीने दुनिया भर में रोजाना होने वाले कार्बन उत्सर्जन में 17 फीसदी की कमी आई. इस कमी का कारण कोरोना वायरस महामारी को फैलने से रोकने के लिए लगाए लॉकडाउन को बताया जा रहा है. पिछले महीने कोरोना वायरस महामारी अपने चरम पर थी और उस दौरान देशों ने लॉकडाउन लागू किया हुआ था. वैज्ञानिकों का कहना है कि जिंदगी सामान्य होने और गैस का स्तर बढ़ने से जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में प्रदूषण में थोड़े वक्त के लिए आई कमी “समुद्र में एक बूंद के समान” होगी. कार्बन डाइऑक्साइड पर अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों ने अपने शोध में पाया कि प्रदूषण का स्तर वापस लौटने लगा है, हालांकि 2019 के मुकाबले प्रदूषण का स्तर चार से सात फीसदी के बीच रहेगा. दूसरे विश्व युद्ध के बाद यह कार्बन उत्सर्जन में सबसे बड़ी वार्षिक गिरावट है. अगर लॉकडाउन के नियम पूरी दुनिया में साल भर सख्ती से लगाए गए तो यह सात फीसदी रहेगा और अगर पाबंदियां हटा ली गईं तो यह चार फीसदी रहेगा.

नेचर क्लाइमेट चेंज पत्रिका में छपे शोध के मुताबिक अप्रैल के एक हफ्ते में अमेरिका ने अपने कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर में करीब एक तिहाई की कटौती की. दुनिया के सबसे बड़े कार्बन उत्सर्जक देश चीन ने फरवरी में कार्बन डाइऑक्साइड में एक चौथाई की कटौती की. भारत ने जहां उत्सर्जन में 26 फीसदी की कटौती की तो वहीं यूरोप ने 27 फीसदी की कटौती की. सबसे बड़ी वैश्विक गिरावट 4 से लेकर 9 अप्रैल के बीच थी जब दुनिया रोजाना 17 मिलियन मेट्रिक टन कार्बन प्रदूषण पैदा कर रही थी. 2006 के बाद से इस तरह के वैश्विक उत्सर्जन के स्तर दर्ज नहीं किए गए हैं, लेकिन अगर दुनिया अगले साल धीरे-धीरे प्रदूषण के स्तर पर वापस लौटती है तो अस्थायी गिरावट समुद्र में एक बूंद के बराबर होगी.

यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंग्लिया में जलवायु वैज्ञानिक और शोध की मुख्य लेखिका कोरिन्ने ले क्वेरे का कहना है कि अगर दुनिया अगले साल धीरे-धीरे बढ़ते प्रदूषण के स्तर पर लौटती है, तो अस्थायी कमी में यह समुद्र की एक बूंद के बराबर होगी. ले क्वेरे कहती हैं, “यह वैसा ही जैसे आपके पास पानी से भरा बाथ टब है और आप 10 सेकंड के लिए नल बंद कर दे रहे हैं ” 30 अप्रैल तक विश्व कार्बन प्रदूषण का स्तर महीने के शुरुआती बिंदु से बढ़कर प्रतिदिन 30 मेट्रिक टन हो गया था.

बाहरी विशेषज्ञों ने अध्ययन को सबसे व्यापक बताया है और कहा है कि इससे पता चलता है कि कार्बन उत्सर्जन को खतरनाक स्तर तक जाने से रोकने के लिए कितनी कोशिशों की जरूरत है. पेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी में जलवायु वैज्ञानिक माइकल मान के मुताबिक, ”यह एक सरल सत्य को रेखांकित करता है…अकेले व्यक्तिगत व्यवहार से हम यहां नहीं पहुंच सकते हैं. हमें मूलभूत रचना संबंधी परिवर्तन की जरूरत है.” हालांकि माइकल मान इस शोध से नहीं जुड़े थे.

शोध के लेखकों का मानना है कि बिना किसी महामारी के ही दुनिया कार्बन उत्सर्जन में कुछ दशकों के लिए कटौती कर लेती है तो ऐसा मुमकिन है कि धरती को एक डिग्री गर्म होने से बचाया जा सकता है. शोध के लेखकों का कहना है कि उत्सर्जन में आधी कटौती कम परिवहन की वजह से हुई है, जिसमें ज्यादातर कार और ट्रक शामिल हैं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here