एयरफोर्स चीफ बनते ही भदौरिया ने कहा- राफेल के कारण दुश्मनों पर भारी पड़ेंगे हम

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नई दिल्ली: सोमवार को एयर चीफ मार्शल राकेश कुमार सिंह भदौरिया ने भारतीय वायुसेना (IAF) प्रमुख के पद का कार्यभार संभाल लिया. भदौरिया वायुसेना के 26वें नंबर के प्रमुख बने हैं. उन्होंने एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ का स्थान लिया. पद संभालते ही भदौरिया ने पाकिस्तान और चीन को कड़ी चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि राफेल के कारण हम दुश्मन देशों पर भारी पड़ेंगे.

नए वायुसेना अध्यक्ष भदौरिया ने कहा कि राफेल बेहद क्षमतावान लड़ाकू विमान है. ये हमारी सैन्य क्षमता के लिए गेम चेंजर साबित होगा. वहीं जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत आज बालाकोट जैसी एयर स्ट्राइक के लिए फिर से तैयार है? इस पर उन्होंने कहा, ‘हम तब भी तैयार थे, आज भी तैयार हैं और कल भी तैयार रहेंगे.’

राकेश कुमार सिंह भदौरिया


एयर चीफ मार्शल भदौरिया को जून 1980 में भारतीय वायु सेना की लड़ाकू शाखा में शामिल किया गया और वह कई पदों पर रहे. राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व छात्र भदौरिया ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए प्रतिष्ठित ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ पुरस्कार भी जीता. करीब चार दशक की सेवा के दौरान भदौरिया ने जगुआर स्क्वाड्रन और एक प्रमुख वायु सेना स्टेशन का नेतृत्व किया. उन्होंने जीपीएस का इस्तेमाल कर जगुआर विमान से बमबारी करने का तरीका ईजाद किया. यह वर्ष 1999 में ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ में जगुआर विमान की बमबारी में भूमिका से खासतौर से जुड़ा है. भदौरिया को 26 तरह के लड़ाकू और परिवहन विमानों को 4,250 घंटों तक उड़ाने का भी अनुभव है.

भदौरिया ने दी हैं कई पदों पर सेवाएं

भदौरिया वायु सेना के उन चुनिंदा पायलटों में से एक हैं जिन्होंने राफेल विमान उड़ाया है. जुलाई में भारत और फ्रांस की वायु सेनाओं के बीच गरुड़ अभ्यास के दौरान भदौरिया ने राफेल विमान उड़ाया था. उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों जैसे नेशनल डिफेंस एकेडमी में कमांडेंट, सेंट्रल एयर कमांड में सीनियर वायुसेना अधिकारी के रूप में कार्यभार संभाला. साथ ही उन्होंने जनवरी 2016 से 28 फरवरी 2017 तक वायु सेना के डिप्टी चीफ के रूप में भी कार्य किया. भदौरिया 1 मार्च 2017 से दक्षिणी वायु कमान में एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ थे. 1 अगस्त 2018 को बेंगलुरु स्थित प्रशिक्षण कमान के प्रमुख का पदभार संभाला था.

भदौरिया ने कहां से ली है डिग्री
भदौरिया का जन्म आगरा के पास के गांव कोरथ में हुआ था. उन्होंने नेशनल डिफेंस अकदमी (NDA), पुणे से ट्रेनिंग ली है. साथ ही बांग्लादेश के कमांड एंड स्टाफ कॉलेज से डिफेंस स्टडीज में मास्टर डिग्री ली है. उन्हें 15 जून 1980 में वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन दिया गया था.