पूर्वी लद्दाख में चीनी सैनिकों की घुसपैठ के बाद भारतीय सेना ने बढ़ाई अपनी सैन्य क्षमता

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नई दिल्ली : भारत और चीन के बीच एक बार फिर से तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। पूर्वी लद्दाख में चीनी सैनिकों की घुसपैठ के बाद भारतीय सेना ने भी अपने सैनिकों की तादाद बढ़ा दी है। माना जा रहा है कि डोकलाम विवाद के बाद अगर एक बार फिर से इतना बड़ा तो यह उससे भी बड़ा तनाव होगा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस महीने में 3 बार भारत और चीन की सेना एक दूसरे पर हमला कर चुकी हैं। बीते दिनों चीनी सैनिकों ने भारतीय सीमा में घुसपैठ कर तंबू गड़े थे। बता दें कि चीन ने भारतीय बॉर्डर में घुसकर 10 किलोमीटर की घुसपैठ की थी। जिसमें उन्होंने अपने तंबू गाड़े थे। पूर्वी लद्दाख के एलओसी के आसपास दोनों सेनाएं एक दूसरे के सामने खड़े हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक, भारत ने पेंगोंग त्सो झील और गालवान वैली में सैनिक बढ़ा दिए हैं। इन दोनों इलाकों में चीन ने दो हजार से ढाई हजार सैनिक तैनात किए हैं। साथ ही अस्थाई सुविधाएं भी बढ़ा रहा है।

भारतीय सेना के एक अधिकारी ने बातचीत के दौरान बताया कि दोनों इलाकों में सेनाएं तैनात कर दी गई है। वहीं दूसरी तरफ अधिकारी ने बताया कि गालवान घाटी में चीन और भारत के बीच कोई तनाव नहीं है। उसके बाद भी यहां पर घुसपैठ की कोशिश की गई है। जबकि भारत चीन के बीच कालवान जैसे इलाकों में कोई तनाव विवाद नहीं है। लेकिन उसके बाद भी हम घुसपैठ करना असामान्य बात है। उत्तरी किनारे पर फिंगर-5 इलाके में भारत-चीन के करीब 200 सैनिक आमने-सामने हो गए। यहां झड़प 9 मई को ही हुई। गश्त के दौरान आमने-सामने हुए सैनिकों ने एक-दूसरे पर मुक्कों से वार किए। इस झड़प में 10 सैनिक घायल हुए। यहां भी बाद में अफसरों ने दखल दिया फिर झड़प थामा था।

भारत और चीन के बीच डोकलाम में एक भारी तनाव पैदा हुआ था। डोकलाम में 16 जून 2017 को शुरू हुआ। जब भारतीय सेना ने वहां चीन के सैनिकों को सड़क बनाने से रोका था। ,जिस पर चीन का दावा है कि वह अपने इलाके में सड़क बना रहा था। लेकिन जबकि भारत में डोकलाम है। इसको लेकर 73 दिनों तक भारत और चीन के बीच डोकलाम में विवाद हुआ। और एक बार भारतीय सेना और चीनी सैनिकों के बीच झड़प भी हुई थी। जिसके बाद जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन दौरे पर गए। तो उस वक्त चीन के राष्ट्रपति और भारत के प्रधानमंत्री के बीच बातचीत के बाद डोकलाम विवाद खत्म हुआ।

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