एसिड हमले के शिकार ५ लड़कियों ने एकसाथ बैठकर देखा छपाक

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भुवनेश्वर.- दीपिका पादुकोण अभिनीत छप्पाक ओडिशा में काफी असर दिखाने लगा है। कटक का एक आइनक्स में ५ एसिड पीिड़त लडकी दीपिका पादुकोण अभिनीत छप्पाक सिनेमाको एक साथ बैठकर देखी हैं। यह पांच लडकी हैं प्रामोदिनी, ममता, रोजालिन, शुचिस्मिता व काएनात परविन्। इस सिनेमा को देखते वक्त पांचों की आंखें आंशुओंमें भरे हुए थे। उन्हे अपने संघर्षों के वह दिन याद आ रहे थे। सिनेमा देखने आए दर्शकों के लिए दिपीका पादुकोण जितनी आकर्षण का कारण बनी हुई थी इन पांचों महिलाएं इतनी ही आकर्षक रहे।
पांचों में से एक प्रमोदिनी राउल के मुताबिक छप्पाक सिनेमा हल को आने से पहले उन लोगों ने उसे देखने के लिए मन बना चुके थे। जैसे ही सिनेमा रिलीज हुई प्रमोदिनी दूसरे चारों को अपने चहटा स्थित घर पर बुला लिया था। इनमें से ममता बेहेरा भुवनेश्वर, रोजालीन साहू ढेंकानाल,शुचिस्मतिा राउत जाजपुर व काइनाक परविन कटक के रहने वाली हंै। पांचों को एक साथ मिलाने में प्रमोदिनी के पति सरोज साहू सहयोगी रहे। पांचों के लिए टिकट लाना , टैक्सि करना सवकुछ उनके बदौलत हो पाया था। सभी लडकियों को अपनी बेटी की तरह स्नेह देकर प्रमोदिनी की मां कबिता राउल उनकी खानेपिने का इंतजाम किया। खुद भी उनके साथ आइनक्स में सिनेमा देखने आई।
सिनेमा देखने के बाद प्रमोदिनी ने पत्रकारों से कहा कि खुद पर एसिड हमला हो जाने के बाद उन्होने जो संघर्ष किया उसीसे उनके मनमें एसिड हमले से घायल महिलाओंके लिए कुछ करने की इच्छा जागी। उन्होने स्टप एसिड सेल अभियान चलाया व चला रही है। सिनेमा हाल में इन लडकियों से मिले थे स्टप एसिड अटैक के कार्यकर्ता। प्रमोदिनी ने कहा कि छप्पाक सिनेमा का संदेश घर घर में विशेषकर सरकार के पास पहु@चना चाहिये।
एसिड हमले की सूची में ओिड़शा तीसरे नम्बर पर
देश भरमें एसिड हमले की सूची में ओिड़शा तीसरे नम्बर पर है। हाल ही में रिलीज एनसीआरबी रिपोर्ट २०१८ को माने तो ओिड़शा प्रदेश एसिड अटैक मामले में पूरे देश में तीसरे पायदान पर है। २००१ से २०१९ के बीच प्रदेश में ७० महिला,/लडकी व पुरूष एसिड हमले के शिकार हुए हैं। यहां सिर्फ लड़कियों पर एसिड नहीं पैंÀका जाता है , लडकियों की ओर से लडकों पर भी एसिड अटैक किया जाता है।
पिछले साल नवम्बर में कमिशनरेट पुलिस की ओर से एक लडकी को उनके प्रमी अलेख बारिक पर एसीड पैंÀकने के आरोप में किया गया था। लडकी का कहना था कि लडकी को उनके प्रकी अलेख ने प्रेम में धोखा दे दिया था। घटना कटक में घटी थी।

कानून काम का नहीं है
एसिड अटैक को रोकने के लिए राज्य सरकार की ओर से २०१४ में एक कानून बनाया गया था। ओिड़शा पुलिस की ओर से राज्यमें तेजाब की बिक्री को लेकर सभी थानों को सर्कुलर भेजा गया। लेकिन एसिड हमले कम नहीं हुई उलटा बढती गई। एनसीआरबी रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष २०१३ में राज्य में सिर्फ २ एसिड अटैक की घटना घटी थी। २०१४ के आते आते यह संख्या १० हो गई। २०१६ में यह १२ हो गई। २०१७ व २०१८ में यह संख्या १३ करके रही।
प्रमोदिनी का कहना है कि राज्य सरकार को एसिड की खुल्लमखुल्ला बिक्री पर राक लगाना चाहिए।