20 साल पहले कहर बरपाया था महातूफान ने, तटवर्ती ओडिशा में लोगों की आंख आज भी हो जाती हैं नम

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भुवनेश्वर। साल 1999 ओडिशा के 14 तटवर्ती जिलों में 11घंटों तक कहर बरपाया था महातूफान ने। ओडिया लोगों के जेहान में आज भी महावात्या के नाम से इसकी यादें जिन्दा है। यह समुद्री तूफान जगतसिंहपुर के एरसमा व बालिकुदा के पास इसी दिन भूमि को छुआ था। तब 260 से 3000 किलोमीटर तक की तेज हवा चली थी। हालांकि यह तूफान राज्य के अधिकत्तर जिलों को कमोवेश नुकसान पहंुचाया था। लेकिन सबसे अधिक नुकसान जगतसिंहपुर, केन्द्रापड़ा,कटक, खुर्धा, पुरी, बालेश्वर, भद्रक व मयुरभंज जिले में हुआ था। तब कटक, भुवनेश्वर ट्वीन सिटी तबाह हो चुकी थी।
सरकारी हिसाव से इस तूफान में 9 हजार 855 जानें गई थी। जबकि गैरसरकारी हिसाव से यह संख्या 50 हजार से अधिक तक पहुच गई थी। इस तूफान में 7 हजार 505 लोग बुरी तरह घायल हुए थे। 3 लाख 15 हजार 883 मवेशी लापता हो गये थे। स्थिति ऐसी हो गयी थी कि जगतसिंहपुर जिले में महातूफान के बाद न ही गाय और न ही कुत्ता देखने को मिला था। सरकार इस इलाके में पड़े मृत शरीर को खाने के लिए बाहर इलाके से कुत्तों को लेकर एरसमा इलाके में छोड़ा गया था। तब कई नदी विशेषकर बैतरणी, बुढ़ाबलंग ,सालंदी आदि में जबरदस्त बाढ़ आई थी।
आज भी इस दिन को याद कर एरसमा इलाके में लोगों की आंखे नम हो जाती हैं। लोग इस दिन को याद करके सिहर उठते हैं।
हर साल राज्य सरकार की ओर से इस दिन को आपदा प्रवंधन व तैयारी दिवस के रूप से मनाया जाता है। मंगलवार को इसके लिए आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने आये पद्मपुर ग्रामपंचायत के पूर्व सरपंच श्रीकान्त माइती ने कहा कि इस दिन हम लोग समूह रूप से मृतकों को श्राद्ध देते हैं। आज भी लोग 29 अक्टूबर का नाम सुनकर सहम जाते हैं।