संविधान की शपथ ली और दस मिनट में विवाह संपन्न

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भुवनेश्वर। न बैंड बाजा, न बराती और न ही मंडप सजाया गया। बस संविधान की शपथ दिलाकर बेहद सादे समारोह में युवक अरिजित और युवती शिवालिका का विवाह संपन्न करा दिया गया। इस विवाह में कुंडली, लड़क पसंद करने का रिवाज सहित किसी भी तरह की परंपरा का निर्वहन नहीं हुआ।

फेरे के मंत्रों की जगह संविधान प्रस्तावना का पाठ कराया गया। इसी की शपथ दोनों दिलायी गयी। यों कह लों कि संविधान को हाजिर-नाजिर मानकर विवाह संपन्न कराया गया। अरिजित और शिवालिका का विवाह एक अनूठा विवाह बन चुका है। ऐसे मौके पर जब एनएए, एनआरसी को लेकर संविधान की दुहाई देते हुए आंदोलन चलाए जा रहे हैं ऐसे में संविधान की दुहाई देते हुए ब्याह रचाना अपने आप में अनोखा उदाहरण है।

इस  जोड़े ने संविधान की शपथ लेते हुए विवाह किया। इस विवाहित जोड़े को माता-पिता और संगी साथियों का आशीर्वाद दिया। सबसे ताज्जुब तो यह है कि पूरा विवाह दस मिनट में संपन्न हो गया। इतने कम समय में विवाह होना भी हैरत जताता है। बेहद सादगी में हुए इस विवाह को चमक-दमक से दूर रखा गया। सामाजिक संगठनों ने इस जोड़े को बधाई दी और विवाहित जोड़े के हौसले को सैल्यूट किया।

सामाजिक कार्यकर्ता देवेंद्र सुतरा का कहना है कि मध्यम और निम्न मध्यम श्रेणी के विवाह में फिजूल खर्ची को बचाना चाहिए। विवाहित जोड़े का यह कदम स्वागत योग्य है। महिला आयोग की पूर्व सदस्य नम्रता चड्ढा का कहना है कि बेहद सादगी भरा यह विवाह स्वागत योग्य है पर बेहतर होता जो इसी सादगी के बीच अपनी परंपरा और रीतिरिवाज से विवाह संपन्न होता। मनुष्य स्वयं अपनी परंपरा और रीतिरिवाज का रक्षक होता है।

(फोटो साभार)