लॉकडाउन के दौरान 667 असामयिक मौतें हुईं

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भुवनेश्वर। कोरोना के चलते लॉकडाउन से अब तक विभिन्न कारणों से 667 असामयिक मौतें हो चुकी हैं। बीती 25 मार्च 2020 से लॉकडाउन शुरू हुआ था। इस प्रकार रोजाना औसतन 11 लोग मौत के मुंह में जा रहे हैं। यह आंकड़ा 24 मई तक का है। मीडिया रिपोर्ट्स पर हुई रिसर्च के आधार पर यह तथ्या उजागर हुआ है। आने जाने के साधन रेल व बसें बंद होने से हजारों की संख्या में लोग सैकड़ों किलोमीटर की दूरी नापते हुए पैदल ही अपने-अपने ठीहों से निकल पड़े। मरने वालों में अधिकांश प्रवासी श्रमिक बताए जाते हैं।

कोरोना वॉयरस का कम्युनिटी ट्रांसमिशन रोकने के लिए लॉकडाउन किया गया था। सिर्फ सड़क हादसे में ही 205 के मारे जाने की खबर है। अब तक 42 सड़क हादसे, 32 मेडिकल इमरजेंसी और पांच ट्रेन हादसे हुए हैं। प्रवासी श्रमिकों की सबसे ज्यादा मौते सड़क हादसे यानी रोड एक्सीडेंट में हुई हैं। मरने के अन्य कारणों में सड़क हादसे, रेल दुर्घटनाओं के अलावा भूख, थकान भी मौत के कारण बताए जाते हैं।

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जिंदल ग्लोबल स्कूल में सहायक प्रोफेसर अमन, एमोरी विश्वविद्यालय में पीएचडी छात्रा कनिका शर्मा, सिरेंक्यूज विवि में पीएचडी कर रहे कृष्ण पब्लिक इंटरेस्ट टेक्नोलॉजिस्ट थेजल जीएन ने मीडिया रिपोर्टों के आधार पर सूची तैयार की है। टीम का कहना है कि ये मौते अनियोजित लॉकडाउन के कारण हुई हैं। मौतों के कारण इस प्रकार हैं। थकान 42, भुखमरी 114, पुलिस की क्रूरता 12, चिकित्सा अभाव 54, रोड एक्सीडेंट 205, शराब या खुदकुशी 50, डर या अकेलापन 120, अन्य कारणों से 70 मौते हुई हैं।

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