‘बुलबुल’ ने थाम दी ओडिशा की जिंदगी, आश्रयस्थलों में हजारों परिवार

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भुवनेश्वर (विप्र)। इसी साल तीन मई को फॉनी चक्रवाती तूफान की मार से टूट चुके ओडिशा ने कमर सीधी भी न की थी कि अब बुलबुल ने दहशत पैदा कर दी। हालांकि यह चक्रवाती तूफान ओ़डिशा में लैंडफाल नहीं करेगा पर समुद्र तट से इतना नजदीक है कि तेज हवाओं और बारिस ने जनजीवन अस्तव्यस्त कर दिया।

बुलबुल ओडिशा में समुद्र तट व 15 जिलों को प्रभावित कर रहा है पर सबसे ज्यादा प्रभावित तटवर्ती 6 जिले हैं। यहां पर मध्य रात्रि के बाद तेज हवाएं व बारिस हो रही है। पारादीप समेत कुछ स्थानों पर 146 मिमी. वर्षा रिकार्ड की गयी। हवाओं की गति भी 130 किमी. प्रतिघंटा नोट की गयी। जगतसिंहपुर और बालासोर जिला के समुद्र तट के निकट रहने वाले करीब एक हजार से ज्यादा परिवारों को सुरक्षित स्थान आश्रयस्थलों पर पहुंचाया गया।

भारी संख्या में पेड़ गिर गए जिससे सड़क मार्ग अवरुद्ध हो गया। मुख्य सचिव असित त्रिपाठी ट्रैकसूट पहने ही भुवनेश्वर स्थित मौसम विभाग के क्षेत्रीय कार्यालय जा पहुंचे और वहां पर उन्होंने बुलबुल चक्रवात से प्रभावित ओडिशा क्षेत्रों की रिपोर्ट ली। उन्होंने मोबाइल पर ही प्रभावित जिलों के कलक्टरों से बातचीत की।

बताया जाता है कि समुद्र के करीब रहने वाले लगभग एक हजार परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। नौ नवंबर की शाम को बुलबुल पश्चिम बंगाल के सुंदरवन में लैंडफाल करेगा। ओडिशा में यह सबसे नजदीक पारादीप (जगतसिंहपुर) और धामरा (भद्रक) में होगा। ज्वाइंट तूफान वार्निंग सेंटर के ताजा बुलेटिन के अनुसार ओडिशा तटीय क्षेत्र में इसका असर आधीरात के बाद दिखेगा। पुरी, जगतसिंहपुर, केंद्रपाड़ा भद्रक व बालासोर में देर रात से भारी बारिस हो रही है।

बुलबुल चक्रवात तड़के पारादीप से कुल 130 किलोमीटर दूर था। हालांकि वहीं से पश्चिम बंगाल की ओर मुड़ गया। पर प्रकृति का कहर बरपा गया। तटवर्ती गांवों को भारी नुकसान हुआ। धान की फसल को भी नुकसान हुआ बताया जाता है। केंद्रपाड़ा के राजनगर में तेज हवाओं और मूसलाधार बारिस के कारण जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया। बुलबुल नौ नवंबर पश्चिम बंगाल से टकराकर बांग्लादेश की ओर बढ़ जाएगा। मौसम विशेषज्ञ बताते हैं कि बुलबुल का असर ओडिशा के 220 किलोमीटर के दायरे तक रहेगा। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक का दावा है कि बुलबुल से जानमाल का नुकसान नही होने देंगे। इस प्राकृतिक कहर से निपटने को शासन चाकचौबंद है।