प्राकृतिक आपदा को आधार बना सस्मित ने राज्यसभा में उठाया ओडिशा को स्पेशल स्टेटस का मुद्दा

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भुवनेश्वर (विप्र)। बीजू जनता दल के राज्यसभा सदस्य सस्मित पात्रा ने राज्यसभा में ओडिशा को स्पेशल स्टेटस देने का मुद्दा पुरजोरी से उठाया।  एक रिपोर्ट के अनुसार 98 प्राकृतिक आपदाएं झेल चुका ओ़डिशा को एक बार फिर स्पेशल कैटेगरी स्टेटस देने की मांग जोर पकड़ने लगी है। संसद के करीब हर सत्र में यह मुद्दा उठाया जाता रहा है। लेकिन केंद्र सरकार ने ओडिशा की इस मांग को कभी तवज्जो नहीं दिया। हालांकि 2014 के चुनावी अभियान में बीजेपी के नेताओं ने ओडिशा से वादा किया था। इसे केंद्र सरकार की वादाखिलाफी के रूप में ओडिशा में देखा जा है।

आपदाओं से होता है भारी नुकसान

राज्यसभा में बीजू जनता दल के सदस्य सस्मित पात्रा ने काफी प्रभावी ढंग से यह मांग उठायी। पात्रा ने कहा कि प्रायः प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने वाले राज्य ओडिशा खास मदद का हकदार है। उन्होंने कहा कि पिछले बीस साल से जलवायु संबंधी आपदाओं के कारण भारत को 79.5 खरब डालर का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। ओडिशा समेत आंध्र, तमिलनाडु, केरल में चक्रवाती तूफान के कारण तबाही होती रहती है। पात्रा ने कहा कि इन्हें विशेष फोकस राज्यों का दर्जा दिया जाए। इन्हें ठीक उसी तरह मदद मुहैया करायी जाए जिस तरह विशेष श्रेणी के राज्यों को दी जाती है।

ओडिशा इस स्टेटस का हकदार

उन्होंने कहा कि विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए योजनाओं और परियोजनाओं में केंद्र सरकार की ओर से दी जाने वाली आर्थिक मदद का हिस्सा 90 प्रतिशत तथा राज्य सरकार का हिस्सा 10 प्रतिशत होता है। वह कहते हैं कि कम से कम ओडिशा इसका हकदार है। आपको बता दें कि 2014 के चुनाव प्रचार अभियान ने तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने ओडिशा से वादा

फाइल फोटो

किया था कि एनडीए सरकार सत्ता में आई तो ओडिशा को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाएगा।

क्या है विशेष श्रेणी के राज्य का दर्जा

हालांकि संविधान में किसी भी राज्य को कोई विशेष राज्य का दर्जा देने का प्राविधान नहीं है, लेकिन ऐसे राज्य जो दूसरों की तुलना में काफी सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं केंद्र सरकार उन्हें विशेष राज्यका दर्जा देकर विशेष आर्थिक मदद देती है। इसके लिए राष्ट्रीय विकास परिषद यह काम करती है। इसमें पहले योजना आयोग और अब नीती आयोग की सहमति होती है।

किन्हें मिलता है विशेष राज्य का स्टेटस

ऐसे राज्य जहां पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र हो। जिनका जनसंख्या घनत्व कम हो या फिर वहां की जनजाति आबादी की संख्या ज्यादा हो। प्रतिव्यक्ति आय बहुत कम हो। अंतर्राष्ट्रीय सीमा से जुड़े हों। आधारभूत ढांचा अत्याधिक पिछड़ा हो और आर्थिक तंगी से जूझ रहा हो।

इन राज्यों को मिलती हैं ये सुविधाएं

विशेष दर्जा प्राप्त राज्यो को केंद्र से जो निधि मिलती है उसमें 90 प्रतिशत अनुदान और 10 प्रतिशत बिना ब्याज का कर्ज होता है। बाकी में 70 प्रतिशत अनुदान बाकी कर्ज। केंद्रीय बजट का कुल 30 प्रतिशत इन्हीं राज्यों पर व्यय होता है। उत्पादन शुल्क और अन्य टैक्स में राहत अलग से।

इन्हें मिल चुका है स्टेटस

आपको बता दें कि पांचवें वित्त आयोग ने 1969 में गाडगिल फारमूला के अनुसार असम, नगालैंड, जम्मू और कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दिया था। बाद में आठ और राज्यों को भी यह दर्जा दिया गया था। इसमें अरुणाचंल, हिमांचल मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा, उत्तराखंड, सिक्किम और मणिपुर को भी यह दर्जा दिया गया था। फिलहाल ओडिशा, आंध्र और बिहार सरकारें यह मांग दोहरा रही हैं। इसी मुद्दे पर चंद्रबाबू नायडु ने एनडीए से गठबंधन भी तोड़ दिया था।