प्रवासी श्रमिकों को तोहफा, 286 रु.रोज पर मनरेगा में 200 दिन काम, पांच करोड़ कॉरपस फंड

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भुवनेश्वर (विप्र)। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने प्रवासी श्रमिकों के सम्मेलन में उनके लिए तोहफों की बौछार की। प्रवासी श्रमिकों के लिए ओडिशा सरकार ने एक्शन प्लान घोषित किया है। इसके तहत प्रवासी श्रमिकों की समस्याओं के समाधान के लिए मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने ईःश्रमिक समाधान और 500 करोड़ का स्टेट कॉरपस फंड भी सृजित किया गया। विशेष पैकेज की घोषणा की। साथ ही दो टोल फ्री नंबर घोषित किए जिसमें सातों दिन 24 घंटे प्रवासी श्रमिकों की समस्याओं की सुनवायी और समाधान की व्यवस्था है। यह एक्शन प्लान प्रवासी श्रमिक बहुलता वाले 11 जिलों के लिए है। ये जिलें बलंगीर, बरगढ़, कालाहांडी, नुआपाड़ा, सोनपुर, गंजाम, गजपति, कोरापुट, रायगडा, नवरंगपुर और खोरदा हैं।

मुख्यमंत्री ने भुवनेश्वर के जयदेव भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में यह घोषणआ की। राज्य के चार जिलों बलंगीर, बरगढ़, नुआपाड़ा और कालाहांडी के 20 ब्लाकों में सर्वाधिक प्रवासी श्रमिक हैं जो ठेकेदारों की चंगुल में आकर दूसरे राज्यों को मजदूरी करने जाते हैं। इस कार्ययोजना में प्रवासी मजदूरों को मनरेगा में अब साल में 200 दिन तक काम मिलेगा और मजदूरी भी 188 रुपये रोजके बजाय 286.30 रुपया दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने इसके अलावा 500 करोड़ का एक कॉरपस फंड भी घोषित किया जिससे किसी भी प्रवासी श्रमिक की मदद की जा सकेगी वह चाहे जहां भी काम करता रहा हो। उन्हें समय पर पैसा मिल जाया करेगा। यही नहीं उनकी सामाजिक सुरक्षा के लिए चारों जिलों में सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाए जाएँगे जिसके सदस्यों को सोशल सिक्योरिटी कवर दिया जाएगा। पटनायक कहते हैं कि सरकार ने प्रवासी श्रमिकों के लिए पक्का घर भी देगी।

जब प्रवासी श्रमिक के हाथ काट दिए गए थे

प्रवासी श्रमिकों पर काम करने वाले माइग्रेशन एंड एजूकेशन एड एट एक्शन इंटरनेश्नल के निदेश उमी डेनियल बताते हैं कि नवीन सरकार का प्रवासी श्रमिकों के लिए तोहफा स्वागत योग्य है। उनका कहना है कि ठेके पर श्रमिकों को दूसरे प्रदेशों या विदेश ले जाना यहां आम बात है। इन श्रमिकों का बहुत शोषण किया जाता है। इनके श्रम का वाजिब मूल्य तक नहीं मिलता। बह कहते हैं कि 2014 में आंध्र प्रदेश में के एक ओडिया प्रवासी श्रमिक का हाथ किया गया था। इसके बाद सुप्रीमकोर्ट ने राज्य सरकार को कार्ययोजना तैयार करने को कहा था। कार्ययोजना बनी भी थी पर प्रवासी श्रमिकों के आजीविका पर विशेष ध्यान नहीं दिया गया था। इस योजना के पैकेज में सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें आजीविका की व्यवस्था की गयी है। साथ ही 500 करोड़ रुपये का कॉरपस फंड रखा गया है। इसका लाभ संकट में गुजर बसर करने वाले प्रवासी श्रमिकों को लाभ तो होगा पर कुशल श्रमिकों को उतना फायदा नहीं होगा।

फिलहाल चार जिलों के 20 ब्लाकों की 477 ग्राम पंचायतों के लोगों को ओडिशा लाइवलीहुड (आजीविका) मिशन में शामिल किया गया है। इस क्षेत्र में रहने वाले सभी परिवार एसएचजी में भी कवर किए गए हैं। सामुदायिक निवेश फंड से भी इन्हे जरूरत पड़ने पर धन मिल सकेगा। इन ब्लाकों में श्रमिक मित्र भी बनाए जाएंगे। प्रवासी श्रमिकों के लिए दो टोल फ्री नंबर 155368 (राज्य के भीतर रहने वालों के लिए) तथा 18001456703 (दुनिया के किसी भी कोने में रहते हों) की व्यवस्था की गयी जो रात-दिन चालू रहेगा। इस नंबर पर डायल करने से मदद पहुंचने की व्यवस्था कर दी जाएगी।