प्रवासी आयोग की मांग, प्रवासी अब लौटने के मूड नहीं, स्किल मैपिंग हो, मनरेगा में काम दो

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महेश शर्मा

भुवनेश्वर। तीन मई से आज तक हजारों की संख्या में ओडिया प्रवासी श्रमिकों का सपरिवा अपने राज्य को वापसी का सिलसिला जारी है। बीते 24 घंटों में 14,507 प्रवासी श्रमिक लौटे हैं। इनकी संख्या बढ़कर 3,36,388 हो चुकी है। और वापसी के लिए रजिस्ट्रेशन कराने वालों की संख्या भी 16 लाख से ऊपर बतायी जाती है। इन्हें रोजी-रोटी के लिए मनरेगा में संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। मनरेगा में साल में 200 दिन तक काम और करीब 208 रुपया रोज मजदूरी दिलाने का वादा किया गया था पर अब तक जॉब कार्ड बनाने तक की शुरुआत नहीं की जा सकी। क्वारंटाइन के बाद मिलने वाली प्रोत्साहन राशि दो हजार रुपया लेने के लिए भी प्रवासियों को चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

प्रवासियों को रखने के लिए सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों में 16,632 स्थायी मेडिकल सेंटर और 6,632 पंचायतों में क्वारंटाइन सेंटर बनाए गए हैं। इनमें कुल 7,31,814 बेड की व्यवस्था की गयी है। कुशल प्रबंधन हो इसके लिए मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के आदेश पर सरपंचों को कलक्टर के अधिकार दे दिए गए। कई सरकारी-गैरसरकारी अस्पतालों को कोविड-19 अस्पताल में परिवर्तित कर दिया गया। प्रवासियों की लगातार बढ़ती भीड़ और सरकार के आश्वासन के अनुसार प्रभावी तैयारियां न होने के कारण दिक्कत बढ़ रही है। सिविल सोसाइटी के लोगों में कोरोना के साथ ही जीने की आदत डालने का मशविरा मानते हुए प्रवासियों के पुनर्वासन, दूसरे राज्यों में काम के लिए जाने के बजाय ओडिशा में ही इन्हें इनकी क्षमता के मुताबिक कार्य देने की बात चर्चा में आ चुकी है। स्किल मैपिंग का काम शुरू करने के साथ ही प्रवासी आयोग के गठन की मांग उठने लगी है।

सिटिजन एक्शन ग्रुप फॉर कोरोना के सलाहकार जगदानंद कहते हैं कि प्रवासियों के लिए इंटर-स्टेट आयोग बनाए जाने की जरूरत है। यूपी सरकार के प्रवासी आयोग गठन के निर्णय को उन्होंने बेहतर पहलकदमी बतायी। वह कहते हैं कि री-माइग्रेशन को ग्रामीण इकोनॉमी को मजबूती देने का अवसर के रूप में देखते हैं। उनका कहना है कि प्रवासी श्रमिकों की स्किल मैपिंग करके उनकी क्षमताओ का डेटा तैयार होना चाहिए जो आगे काम आ सकता है। यह प्रक्रिया तो अब तक शुरू हो जानी चाहिए थी। वह कहते हैं कि गंजाम को मॉडल डिस्ट्रिक्ट के रूप में डेवलेप किया जा सकता है। सबसे ज्यादा यहीं के श्रमिक सूरत गए हैं। इनमें अधिकतर कुशल श्रमिक हैं। जगदानंद कहते हैं कि गंजाम को एक मॉडल के रूप में विकसित किया जा सकता है। गोपालपुर में टाटाग्रुप के एक प्लांट के लिए जमीन पर औद्योगिक गतिविधियां यहां शुरू की जानी चाहिए। वह कहते हैं कि प्रवासी श्रमिक बहुत बड़ा मुद्दा है जो कोरोना काल में तेजी से उभरा है। यदि प्रवासियों को उनके राज्य में ही कार्य का वातावरण दें तो फिर वो क्यों पलायन करेंगे? उनका कहना है कि ओडिशा में माइग्रेशन आयोग गठित किया जाना चाहिए। केंद्र ने प्रवासी श्रमिकों पर फैसले लेने का राज्यों पर छोड़ दिया है। यूपी में प्रवासी आयोग गठन की दिशा में काम शुरू हो गया है।


ओडिशा पहुंच चुके लगभग साढ़े तीन लाख से भी ज्यादा प्रवासी श्रमिक अब लौटने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। ऐसे कई श्रमिक हैं क्वारंटाइन अवधि पूरी करने के बाद घरों पर बैठ गए हैं। वर्ष 2011 की जनगणना की रिपोर्ट के अनुसार लगभग साढ़े 13 लाख ओडिशावासी आसपास के राज्यों में नौकरी कर रहे हैं। इनमें से अधिकांश गुजरात के सूरत में हैं। ओडिशा वापसी के लिए सरकार के पोर्टल पर अब तक रजिस्ट्रेशन (इनमें अधिकांश श्रमिक हैं, छात्र, व अन्य श्रेणी के नौकरपेशा, व्यवसायी भी शामिल हैं) करा चुके 15 लाख से भी ज्यादा लोग दर्शाते हैं कि 2021 की जनगणना में यह संख्या 20 लाख तक हो सकती हैं। एक जानकारी यह भी यह भी है कि लॉकडाउन से पहले 54,383 ट्रेन से और 4,380 विमानों से विदेशी लोग ओडिशा आ चुके थे। हजारों लोग पैदल, ट्रक, लारी, साइकिल आदि से पहुंच रहे हैं। सोमवार को झारखंड सीमा से ओडिशा प्रवेश करने वाले 15 सौ प्रवासी श्रमिकों पहले टेस्टिंग फिर क्वारंटाइन में भेजना वहां से उनके घरों को रवाना करना मुश्किल काम है। सुंदरगढ़ के पास कोल्हापुर-बोकारो श्रमिक स्पेशल ट्रेन की चेन पुलिंग करके 260 लोग उतर गए। इस तरह की घटनाएं ओ…

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