जगन्नाथ और लिंगराज मंदिर का कायाकल्प शुरू, विश्वस्तरीय पर्यटनस्थल के रूप में विकसित होगा

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भुवनेश्वर। विश्व प्रसिद्ध मंदिर जगन्नाथ पुरी और भुवनेश्वर में लिंगराज मंदिर का कायाकल्प पर काम शुरू हो गया है। इन्हें विश्वस्तरीय पर्यटन सिटी के रूप में विकसित करने का प्लान है। कोरोना के चलते लॉकडाउन के बीच 15 सौ करोड़ रुपये से दोनों मंदिरों के हैरिटेज कॉरीडोर पर 29 मई से शुरू कार्यों पर सबकी नजर है। इन मंदिरों की डिजाइन सरकार ने पहले ही जारी कर दिया है। यह कार्य बीते ढाई महीने से बंद पड़ा था। महाप्रभु जगन्नाथ धाम पुरी हैरिटेज सिटी के रूप में विकसित करने के लिए 32 सौ करोड़ का प्लान है।
इन प्रोजेक्टों पर सीधे मुख्यमंत्री की नजर बतायी जाती है। जगन्नाथ भगवान के दर्शन के बाद मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इनके पर्यटन विकास की घोषणा की थी। पुरी के लिए 800 करोड़ का बजट मंदिर के आसपास सारी सुविधाओं और निर्माण की मद में रखा है। जगन्नाथ धाम पुरी को विश्वस्तरीय विरासत बनाने के लिए 32 सौ करोड़ का बजट पारित किया गया है। हैरिटेज कॉरीडोर तैयार होने की डेड लाइन 2022 है। जगन्नाथ मंदिर को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र बनाने के लिए पहले दिसंबर 2022 की डेडलाइन तय की गई थी। हालांकि, ढाई महीने काम बंद रहने के बाद इसकी फिर से समीक्षा की जाएगी। पुरी मंदिर के साथ ही भुवनेश्वर के एक हजार साल से ज्यादा पुराने लिंगराज मंदिर को भी हैरिटेज कोरिडोर बनाने का फैसला किया है। इसकी लागत करीब 700 करोड़ रुपए है।

पटनायक सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 2020 की शुरुआत में ही राज्य सरकार ने अपना हैरिटेड कोरिडोर प्लान तैयार किया था। करीब 3200 करोड़ की इस योजना में पुरी शहर और भुवनेश्वर के लिंगराज मंदिर को विश्व स्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करना था। इसके लिए पहले पुरी मंदिर के आसपास की दुकानों आदि को अधिग्रहित करके मंदिर के आसपास के 75 मीटर के दायरे को हैरिटेज सिक्योरिटी जोन बनाने का काम शुरू हो चुका है। दो दिन पहले ही मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने अधिकारियों को सोशल डिस्टेंसिंग और लॉकडाउन के नियमों का पालन करते हुए फिर से काम शुरू करने का आदेश जारी किया था। शुक्रवार को जिला प्रशासन ने फिर से काम शुरू करते हुए मंदिर के आसपास की दुकानों और भवनों को सिक्योरिटी जोन के तहत तोड़ना शुरू कर दिया है।

श्रीमंदिर प्रशासक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार पुरी कायाकल्प का आर्किटेक्चर बेंगलूरू की एक कंपनी ने बनाया है। भगवान के दर्शन की सुगमता पर जोर दिया गया है। स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा गया है। महाप्रसाद और अन्य वस्तुओं के दाम फिक्स किए जाएंगे। सुरक्षा के बेहतर इंतजाम होंगे। श्रीमंदिर 12 वीं शताब्दी का है। इसके मेघनाद प्राचीर से 75 मीटर क्षेत्र के भीतर हैरिटेज कॉरीडोर विकसित किया जाएगा। आवश्यक सेवाओं के लिए सर्विस लेन होगी। इस योजना के तहत शंकराचार्य मठ के सहित अन्य पवित्र मठों के चारों ओर रास्ते बनाए गए हैं। इन्हें पुरातन रूप में ही सुरक्षित रखा जाएगा।

दक्षिण जोन में वेलकम प्लाजा बनाया जाएगा। इसमें मुख्य शटल ऑफ जोन होगा। इलेक्ट्रिकल शटल बसों के लिए तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के आने जाने की सुविधा मिल सकेगी। ओपेन एयर शो और कल्चरल प्रोग्राम के लिए भी खुला थियेटर होगा। सोलर एनर्जी और रेनवाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था होगी। दक्षिणी मैदान के दोनों तरफ मेडिटेशन, प्रदर्शनी और कला मंडप होंगे। यही नहीं श्रीमंदिर के 75 मीटर के दायरे सिक्योरिटी जोन होगा। इसमे जगन्नाथ पंथ, कला और कलाकृतियों से जुड़े देवी देवताओं और मूर्तियों, पौधो और झाड़ियों की मूर्तियों और प्रसाद के लिए जगह होगी। सफाई का विशेष ध्यान रखा जाएगा। मालूम हो कि सघन अतिक्रमण ढहाओ अभियान चलाकर सौंदर्यीकरण की योजना को क्रियान्वित किया जा रहा है।

(इनपुट साभार)

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