चक्रवातः ओडिशा में घोंसला बनाने का फिलहाल बुलबुल का कोई इरादा नहीं, बारिस होगी

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भुवनेश्वर (विप्र)। चक्रवाती तूफान बुलबुल ओडिशा के तटीय इलाकों को नहीं छुएगा। यह ओडिशा के लिए गुड न्यूज है। इसी साल तीन मई को पुरी तट से टकराकर तबाही मचा गया फॉनी चक्रवात से तबाह हुए ओडिशा राज्य पर प्रकृति की यह बड़ी मेहरबानी है। पुरी, पारादीप और धामरा से 170 से 140 किलोमीटर दूर से ही बुलबुल बांग्लादेश के तटवर्ती क्षेत्र से 12 नवंबर को टकराएगा। ओडिशा में यह वर्षा का सबब बनेगा। राज्य में ऐहतियातन तैयारियां कर ली गयी हैं। मौसम विभाग के अनुसार चक्रवाती तूफान बुलबुल ओडिशा के समुद्र तट से नहीं टकराएगा। इसका मुख्य कारण वर्टिकल विंड शेयर बताया जा रहा है। यह बांग्लादेश के समुद्र तट से टकराएगा। बुलबुल बांग्लादेश के चिटगांव से 997 किलोमीटर दूर है। मौसम विभाग के अनुसार बालासोर व इर्दगिर्द बारिश होगी। बुलबुल चक्रवात बांग्लादेश की ओर बढ़ रहा है। कृषि विभाग ने तटीय जिलों के किसानों के लिए अलर्ट जारी किया है। मछुआरों से भी समुद्र से बाहर आने को कहा गया है।

अमेरिका के ग्लोबल फोरकास्ट सिस्टम के अनुसार एक अन्य लो-प्रेशर एरिया दक्षिण बंगाल की खाड़ी में 17 नवंबर तक बनेगा। यह तमिलनाडु के समुद्री तट पर 22 से 26 नवंबर को टकराएगा। एक अन्य सूचना के अनुसार यूरोपियन सेंटर वेदर फोरकास्ट की भविष्यवाणी के अनुसार 12 नवंबर को बुलबुल आंध्र को छू सकता है। ओडिशा इसके रास्ते में नहीं है। कनाडा मैटीरियलोजी सेंटर के अनुसार 10 नवंबर को बुलबुल बांग्लादेश के समुद्री तट से टकराएगा। इसके बाद यह कमजोर पड़ जाएगा। ओडिशा के विशेष राहत आयुक्त पीके जेना ने बताया कि मौसम विभाग के विश्लेषण चक्रवाती तूफान ओडिशा नहीं आएगा। उन्होंने बतायाकि कृषि विभाग ने तटवर्ती जिलों के किसानों को अलर्ट जारी किया है कि वे उपज सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दें। बारिस नुकसान पहुंचा सकती है। मछुआरो को भी समुद्र से बाहर आने को कहा गया है। जेना ने बताया कि 9 नवंबर को यह चक्रवात 9 नवंबर को पुरी के अष्टारंग से 170 किलोमीटर दूर, पारादीप से 10 नवंबर को 160 किलोमीटर दूर तथा धामरा से 11 नवंबर को 140 किलोमीटर दूर रहेगा। यह तूफान 10 व 11 को बांग्लादेश के तट से टकराएगा।