घटता रहा ओडिशा के लिए केंद्रीय बजट में धन का आवंटन

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भुवनेश्वर। लोकसभा में बीजेडी संसदीय दल के नेता पिनाकी मिश्रा ने कहा कि 14वें वित्त आयोग में ओडिशा को केंद्रीय बजट से 48 हजार करोड़ रुपया आवंटित हुआ था। उसके बाद यह रकम घटकर 39 हजार करोड़ फिर 37 हजार करोड़ हुई और इस बजट में घटाकर 30 हजार करोड़ कर दी गयी। जबकि राज्य ने वित्तीय प्रबंधन के साथ ही जनसंख्या नियंत्रण में भी राज्य का प्रदर्शन बेहतर रहा फिर भी केंद्र की अनदेखी समझ से परे है। मिश्रा संसद में बजट सत्र के दौरान राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि ओडिशा केंद्र सरकार का फोकस स्टेट नहीं रहा। उन्होंने कहा कि आठ साल में राज्य में पांच बार चक्रवाती तूफानों ने ओडिशा की कमर तोड़ दी। एक चक्रवाती तूफान राज्य को 20 साल पीछे धकेल देता है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र, विश्व स्वास्थ संगठन जैसी संस्थाएं आपदा प्रबंधन में ओडिशा सरकार की पीठ थपथपा रहे हैं। पर केंद्र वाजिब धन का आवंटन राज्य को नहीं कर रहा है। जीएसटी का शेयर तक राज्य को नहीं मिला। केंद्र क्लीन एनर्जी सेस लागू करे। कोयले पर रायल्टी की दर भी संशोधित करके बढ़ाए। उन्होंने कहा कि 2000 साल की इतिहास रखने वाली आइकनिक साइटों की अनदेखी राज्य को पर्यटन क्षेत्र में काफी पीछे धकेल रही हैं। देश की 18 प्रमुख साइटों में ओडिशा को स्थान न देना आश्चर्य का विषय है। उन्होंने कहा कि राज्य में 38 फीसदी आदिवासी आबादी है और 12 फीसदी अनुसूचित जाति के लोग रहते हैं। ओबीसी की आबादी कितनी है, नहीं पता। जनसंख्या में ओबीसी आबादी की गणना का प्रावधान किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी का कि बीजेपी के चुनाव घोषणा पत्र में पुरी को सांस्कृतिक कैपिटल कहा गया था पर आवंटन शून्य है। दल की मांग है कि पुरी को विश्वस्तरीय शहर बनाने के लिए हो रहे सुंदरीकरण अभियान में विशेष अनुदान दिया जाना चाहिए।