ओडिशा में एनएए, एनआरसी व एनपीए के विरोध में राजधानी में प्रदर्शनकारियों का सैलाब

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भुवनेश्वररी। नागरिक संशोधन अधिनियम यानी एनएए, एनआरसी और एनपीआर के विरोध में ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में विधानसभा भवन के सामने  कांग्रेस और वामदलों के साथ ही अन्य संगठनों के साझे मंच आमे भारतवासी  के बैनर तले जोरदार राज्यव्यापी प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारी राममंदिर के के निकट से जुलूस की शक्ल में विधानसभा भवन महात्मा गांधी मार्ग तक पहुंचे। मौके पर सभा चल रही है। ओडिशा की नवीन सरकार ने सीएए का समर्थन किया है तो एनआरसी का विरोध। महात्मागांधी मार्ग के चौड़े फुटपाथ पर बेमियादी धरना दिए जाने पर भी प्रदर्शनकारियों में चर्चा हो रही है। अभी बेमियादी धरना पर आम राय नहीं बन सकी है। उनका कहना है कि शाहीन बाग की तरह जबतक धरना नहीं दिया जाएगा तबतक नतीजा नहीं निकलेगा। जेएनयू से निकले हमको चाहिए आजादी…..वाले नारे लगाए जा रहे थे।

राज्य से विभिन्न अंचलों से आए प्रदर्शनकारियों में मुस्लिमों की खासी भागीदारी रही। कांग्रेस और वामदलों के प्रमुख नेताओं ने भी प्रदर्शन में शिरकत की। संयुक्त प्रदर्शन आमे भारतवासी बैनर तले किया गया। यह संर्वदलीय संगठन है जो हाल में गठित किया गया है। नागरिक संशोधन अधिनियम बनाया जा चुका है। वैसे यह 1955 में बना था पर अबकी संशोधन किया गया है जिसका विरोध किया जा रहा है। इसके प्रभावी होने से बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदुओं के साथ ही सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और इसाइयों के िए बगैर वैध दस्तावेजों के भी भारतीय नागरिकता हासिल करने का रास्ता साफ हो गया है। मुसलमानों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार की ओर से अवैध प्रवासियों की परिभाषा बदलने की सफल कोशिश है। गैर मुस्लिम 6 धर्म के लोगों को नागरिकता प्रदान करने के प्रावधान को आधार बनाकर कांग्रेस धार्मिक आधार पर नागरिकता प्रदान किए जाने का प्रबल विरोध कर रहे हैं। इसे असम समझौते का उल्लंघन भी बताया जा रहा है जिसमें 1971 के बाद बांग्लादेश से आए सभी धर्मों के नागरिकों को निर्वासित करने की बात है। प्रदर्शनकारियों ने रैली निकाली जिसमें तिरंगा लहराया गया। प्रदर्शनकारियों में कांग्रेस, सीपीएम, सीपीआई, सीपीआई एमएल आदि संगठन शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व सीटू अध्यक्ष जनार्दनपति, कांग्रेस अध्यक्ष निरंजन पटनायक, एडवा प्रमुख तापोसी प्रहराज, सामाजिक कार्यकर्ता प्रफुल्ल सामंतरा, वीरेंद्र पंडा, स्वाधीन पटनायक आदि ने किया।