covid-19-एमएसएमई का विभाग एफएफडीसी ओडिशा में क्यों नहीं बना रहा सस्ता सेनीटाइजर !

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भुवनेश्वर (महेश शर्मा)। कोविड-19 से लड़ने के लिए सस्ता और हाई-क्वालिटी का सेनीटाइजर बनाकर लोगों तक उपलब्ध कराने वाले एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) मंत्रालय के अधीन संचालित एफएफडीसी की ओडिशा ब्रांच निष्क्रिय पड़ी है। इस ब्रांच में लैब भी है जहां पर एफएफडीसी के फार्मूले से सेनीटाइजर बनाकर ओडिशा के लोगों को सस्ती दरों पर उपलब्ध कराया जा सकता है। महज अनदेखी और लापरवाही के चलते ऐसा नहीं हो पा रहा है। एफएफडीसी के मुख्यालय कन्नौज (उत्तर प्रदेश) में सैकड़ों लीटर सेनीटाइजर बनाया जा रहा है। लेकिन विभागीय अनदेखी के चलते ओडिशा के बरहमपुर स्थित एफएफडीसी विस्तार केंद्र का भवन धूल धूसरित पड़ा है। हालांकि एफएफडीसी की कानपुर ब्रांच से सेनीटाइजर की मार्केटिंग बिक्री जोरशोर सेकी जा रही है। यहां के कलक्टर तक ने इस पर चर्चा की। क्षेत्र के बीजेपी सांसद सत्यदेव पचौरी ने कलक्टर को पत्र लिखकर एफएफडीसी के सेनीटाइजर सरकारी विभागों में क्रय किए जाने की सिफारिश भी की है। लेकिन लैब से सुसज्जित एफएफडीसी की बरहमपुर ब्रांच में यदि सेनीटाइजर बनाने का काम चल रहा होता तो ओडिशा के लोगों के लिए भरोसेमंद सस्ता सेनीटाइजर उपलब्ध कराया जा सकता था। यह सेनीटाइजर विश्व स्वास्थ संगठन के मानकों के अनुसार बनाया जा रहा है। एफएफडीसी सरस और सुगंध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण काम करती है। इसके इत्र और अतर की ख्याति विश्वव्यापी है। ताज्जुब तो यह है कि केंद्र में एमएसएमई मंत्रालय के राज्य मंत्री ओडिशा के बालासोर संसदीय क्षेत्र से निर्वाचित सांसद प्रताप षाड़ंगी हैं।

एफएफडीसी के निदेशक शक्ति विनय शुक्ला। 

एफएफडीसी निदेशक का दावा है कि उनका सेनीटाइजर सबसे सस्ता है। पर दूसरी ओर यह भी बताया जाता है कि डिस्टलेरी वालों का सेनीटाइजर एफएफडीसी से 35 रुपया प्रतिलीटर सस्ता है। एफएफडीसी (सरस एवं सुगंध विकास केंद्र) का ओडिशा के गंजाम जिले में बरहमपुर स्थित ब्रांच (विस्तार केंद्र) कोरोना महामारी के प्रकोप में भी भी बंद पड़ा है। इसका जर्जर भवन ऐतिहासिक धरोहर जैसा लगता है। मंत्रालय का यह विभाग चाहे तो बरहमपुर केंद्र में भी सेनीटाइजर बनवाकर सस्ती दरों पर उपलब्ध करा सकता है। पर अब तक इस महकमें में कोई जुंबिश तक नहीं हुई। यह भी दावा किया गया है कि यह सेनीटाइजर विश्व स्वास्थ संगठन के मानकों के आधार पर खरा है। कोरोना से निर्णायक लड़ाई जीतने की ओर बढ़ रहे ओडिशा का क्या कसूर जो सस्ता सेनीटाइजर से लोगों को वंचित किया जा रहा है?एफएफडीसी का यूपी के कन्नौज स्थित हेडक्वार्टर यदि चाहे तो कोरोना महामारी के दौर में ओडिशा को भी सस्ता और हाई-क्वालिटी का सेनीटाइजर बरहमपुर एफएफडीसी में बनवाकर उपलब्ध करा सकता है। शायद एफएफडीसी निदेशक शक्ति विनय शुक्ला की दृष्टि अब तक इस केंद्र पर नहीं पड़ी।

 

इस महकमे से जुड़े लोग तो बरहमपुर एफएफडीसी को कालापानी तक कह देते हैं। और तो और यह कहने से नहीं चूकते हैं कि किसी को लंबे समय तक के क्वारंटाइन में भेजना हो बरहमपुर पोस्टिंग कर दो। ताज्जुब की बात तो यह है कि एफएफडीसी का कानपुर विस्तार केंद्र भी हाई-क्वालिटी का सेनीटाइजर सस्ती दरों पर जनता के लिए उपलब्ध करा रहा है। इसकी सप्लाई कन्नौज कर रहा है। ओडिशा का एफएफडीसी के भवन का तो यह हाल है कि यहां रंगाई पुताई तो दूर की बात है, झाड़ू तक नहीं लगायी जाती होगी। हास्यास्पद तो यह कि बोर्ड भी नजर नहीं आता। सरकार बने एक साल के करीब हो रहा है और ओडिशा के मोदी कहे जाने वाले केंद्रीय राज्यमंत्री षाड़ंगी ने केंद्र का निरीक्षण तक नहीं किया। बातचीत के लिए उनसे संपर्क नहीं हो सका।

                                                                                                                                                                                                                                  एफएफडीसी की बरहमपुर ब्रांंच 

कोविड-19 के प्रकोप के चलते सेनीटाइजर का उपयोग घर-घर हो रहा है। ऐसे में मंत्रालय का एफएफडीसी केंद्र सेनीटाइजर बनाने की गतिविधियों में लिप्त है। यह कार्य कन्नौज और कानपुर में जमकर चल रहा है। केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के अधीन संचालित संचालित एफएफडीसी के निदेशक शक्ति विनय शुक्ला ने सोशल मीडिया में जारी वीडियो में दावा किया है कि एफएफडीसी का सेनीटाइजर सबसे प्रभावी और सस्ता है। इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए एफएफडीसी के सभी विस्तार केंद्रों में सेनीटाइजर बनाने की मांग उठ रही है।

एफएफडीसी के बरहमपुर स्थित विस्तार केंद्र के प्रभारी वीके रामाराव का कहना है कि कोरोना के चलते गतिविधियां ठप हैं पर निदेशक ने आज ही कहा है कि वहां भी सेनीटाइजर बनाने की संभावना तलाशिये। एक सवाल के जवाब में उनका कहना है कि इसके लिए इथनॉल की जरूरत पड़ती है। इस माहौल में इथनॉल कैसे मिलेगा। इसका प्रयास किया जा रहा है। दूसरी तरफ निदेशक शक्ति विनय शुक्ला कहते हैं कि इसे और भी प्रभावी सेंटर बनाने का प्रस्ताव एमएसएमई मंत्रालय को भेजा गया है। शुक्ला कहते हैं कि यदि कोई भी संस्था सेनीटाइजर बनाना चाहे तो वह फार्मूला शेयर करने को तैयार हैं। बताते हैं कि विश्व स्वास्थ संगठन के मानक के मुताबिक एफएफडीसी में तैयार एक लीटर सेनीटाइजर की कीमत 160 रुपया है। अगर 35 लीटर कोई खरीदता है तो कीमत 5,600 रुपये के बजाय 5,085 रुपया ही ली जाएगी। यह भी दावा है कि इससे सस्ता सेनीटाइजर उपलब्ध नहीं है। हालांकि डिस्टलरी वाले इसके 125 रुपये लीटर बाजार में देने की बात कहते हैं। कानपुर के जिलाधिकारी को एफएफडीसी ने भेंट भी किया और सेनीटाइजर की खूबियां तथा रेट को लेकर उनकी जिज्ञासा शांत की।