पूरी दुनिया की नजर है सुप्रीमकोर्ट के अय़ोध्या विवाद फैसले पर

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महेश शर्मा

अयोध्या विवाद पर उच्चतम न्यायालय के फैसले पर पूरी दुनिया की नजर है। चैनलों में बहस मुबाहिस जारी है। फैसला नौ नवंबर को साढ़े दस बजे तक आ जाएगा। पांच जजों की बेंच बैठी है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोइ के साथ ही जस्टिस एसए बोबड़े, जस्टिस धनंजय वाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस.अब्दुल नजीर इस बेंच में हैं। देश के सभी राज्यों में हाईअलर्ट है। ओडिशा में इस मुद्दे पर बहुत ज्यादा चर्चा नहीं है। बुलबुल चक्रवाती तूफान के कारण इस विवाद पर रीजनल चैनलों में बहस तो दूर समाचार को भी ज्यादा महत्व नहीं दिया जा रहा है। सबसे ज्यादा संवेदनशील उत्तर प्रदेश है।

इस मामले में तीन पिशीनरों में दो निर्मोही अखाड़ा और रामलला विराजमान हिंदू पक्ष से हैं। ये दोनों ही विवादित भूमि पर मालिकाने का दावा कर रहे हैं। निर्मोही अखाड़ा का कहना है कि लंबे समय से भगवान राम की सेवा करने की वजह उसे जमीन मिलनी चाहिए। दूसरे पक्ष का कहना है कि जमीन का मालिक सिर्फ देवता हो सकता है। पूरी कहानी से लोग परिचित होंगे। मंदिर निर्माण के लिए आरएसएस और संत समाज की मांग से केंद्र की मोदी सरकार पर दबाव बना है। मनमोहन वैद्य कहते हैं कि अब मुद्दा सिर्फ जमीन अधिग्रहण करके राम मंदिर निर्माण के लिए सौंपने भर का है। समय आ गया है कि सरकार को 1994 में जनता से किए मंदिर निर्माण के वादे को पूरा करना है।मालिकाना हक़ का ये मामला देश की अदालतों में 1949 से ही चला आ रहा है।

तथ्य कुछ इस प्रकार हैं।

-1528: अयोध्या में एक ऐसे स्थल पर एक मस्जिद का निर्माण किया गया, जिसे कुछ हिंदू भगवान राम का जन्म स्थान मानते हैं।

-1853: पहली बार इस स्थल के पास सांप्रदायिक दंगे हुए। समझा जाता है कि मुग़ल सम्राट बाबर ने यह मस्जिद बनवाई थी, जिस कारण इसे बाबरी मस्जिद के नाम से जाना जाता था। अब कुछ हिंदू संगठन उस जगह पर राम मंदिर बनाना चाहते हैं।

-1859: ब्रिटिश शासकों ने विवादित स्थल पर बाड़ लगा दी और परिसर के भीतरी हिस्से में मुसलमानों को और बाहरी हिस्से में हिंदुओं को प्रार्थना करने की अनुमति दे दी।

-1949: भगवान राम की मूर्तियां मस्जिद में पाई गईं। कथित रूप से कुछ हिंदूओं ने ये मूर्तियां वहां रखवाई थीं। मुसलमानों ने इस पर विरोध व्यक्त किया और दोनों पक्षों ने अदालत में मुक़दमा दायर कर दिया। सरकार ने इस स्थल को विवादित घोषित करके यहां ताला लगा दिया।

-1984: कुछ हिंदुओं ने विश्व हिंदू परिषद के नेतृत्व में भगवान राम के जन्म स्थल को “मुक्त” करने और वहां राम मंदिर का निर्माण करने के लिए एक समिति का गठन किया। बाद में इस अभियान का नेतृत्व भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेता लालकृष्ण आडवाणी ने संभाल लिया।

-1986: ज़िला मजिस्ट्रेट ने हिंदुओं को प्रार्थना करने के लिए विवादित मस्जिद के दरवाज़े पर से ताला खोलने का आदेश दिया। मुसलमानों ने इसके विरोध में बाबरी मस्जिद संघर्ष समिति का गठन किया।

-1989: विश्व हिंदू परिषद ने राम मंदिर निर्माण के लिए अभियान तेज़ किया और विवादित स्थल के नज़दीक राम मंदिर की नींव रखी।

-1990: विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने बाबरी मस्जिद को कुछ नुक़सान पहुँचाया। तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने वार्ता के ज़रिए विवाद सुलझाने की कोशिश की मगर कामयाबी नहीं मिली।

-1992: विश्व हिंदू परिषद, शिव सेना और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद को गिरा दिया। इसके बाद देश भर में हिंदू और मुसलमानों के बीच सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे। इन दंगों में 2000 से ज़्यादा लोग मारे गए।

-1998: प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने गठबंधन सरकार बनाई।

-2001: बाबरी मस्जिद गिराए जाने की बरसी पर तनाव बढ़ गया और विश्व हिंदू परिषद ने विवादित स्थल पर राम मंदिर निर्माण करने के अपना संकल्प दोहराया।

जनवरी 2002: अयोध्या विवाद सुलझाने के लिए प्रधानमंत्री वाजपेयी ने अयोध्या समिति का गठन किया। वरिष्ठ अधिकारी शत्रुघ्न सिंह को हिंदू और मुसलमान नेताओं के साथ बातचीत के लिए नियुक्त किया गया।

फ़रवरी 2002: भाजपा ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए अपने घोषणापत्र में राम मंदिर निर्माण के मुद्दे को शामिल करने से इनकार किया। विश्व हिंदू परिषद ने 15 मार्च से राम मंदिर निर्माण कार्य शुरू करने की घोषणा की। सैकड़ों हिंदू कार्यकर्ता अयोध्या में जुटे। -अयोध्या से लौट रहे हिंदू कार्यकर्ता जिस रेलगाड़ी में यात्रा कर रहे थे उस पर गुजरात के गोधरा में हुए हमले में 58 कारसेवक मारे गए।

-13 मार्च, 2002: सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फ़ैसले में कहा कि अयोध्या में यथास्थिति बरक़रार रखी जाएगी और किसी को भी सरकार द्वारा अधिग्रहीत ज़मीन पर शिलापूजन की अनुमति नहीं होगी। केंद्र सरकार ने कहा कि अदालत के फ़ैसले का पालन किया जाएगा।

-15 मार्च, 2002: विश्व हिंदू परिषद और केंद्र सरकार के बीच इस बात को लेकर समझौता हुआ कि परिषद के नेता सरकार को मंदिर परिसर से बाहर शिलाएं सौंपेंगे। रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत परमहंस रामचंद्र दास और विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष अशोक सिंघल के नेतृत्व में लगभग आठ सौ कार्यकर्ताओं ने सरकारी अधिकारी को अखाड़े में शिलाएं सौंपीं।

-22 जून, 2002: विश्व हिंदू परिषद ने मंदिर निर्माण के लिए विवादित भूमि के हस्तांतरण की मांग उठाई।

जनवरी 2003: रेडियो तरंगों के ज़रिए ये पता लगाने की कोशिश की गई कि क्या विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद परिसर के नीचे किसी प्राचीन इमारत के अवशेष दबे हैं, कोई पक्का निष्कर्ष नहीं निकला।

मार्च 2003: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से विवादित स्थल पर पूजापाठ की अनुमति देने का अनुरोध किया जिसे ठुकरा दिया गया।

अप्रैल 2003: इलाहाबाद हाइ कोर्ट के निर्देश पर पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग ने विवादित स्थल की खुदाई शुरू की, जून महीने तक खुदाई चलने के बाद आई रिपोर्ट में कहा गया है कि उसमें मंदिर से मिलते-जुलते अवशेष मिले हैं।

मई 2003: सीबीआई ने 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी सहित आठ लोगों के ख़िलाफ़ पूरक आरोपपत्र दाखिल किए।

जून 2003: कांची पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती ने मामले को सुलझाने के लिए मध्यस्थता की और उम्मीद जताई कि जुलाई तक अयोध्या मुद्दे का हल निश्चित रूप से निकाल लिया जाएगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।

अगस्त 2003: भाजपा नेता और उपप्रधानमंत्री एलके आडवाणी ने विहिप के इस अनुरोध को ठुकराया कि राम मंदिर बनाने के लिए विशेष विधेयक लाया जाए।

अप्रैल 2004: आडवाणी ने अयोध्या में अस्थायी राममंदिर में पूजा की और कहा कि मंदिर का निर्माण ज़रूर किया जाएगा।

जुलाई 2004: शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे ने सुझाव दिया कि अयोध्या में विवादित स्थल पर मंगल पांडे के नाम पर कोई राष्ट्रीय स्मारक बना दिया जाए।

जनवरी 2005: लालकृष्ण आडवाणी को अयोध्या में छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस में उनकी कथित भूमिका के मामले में अदालत में तलब किया गया।

जुलाई 2005: पांच हथियारबंद चरमपंथियों ने विवादित परिसर पर हमला किया जिसमें पांचों चरमपंथियों सहित छह लोग मारे गए, हमलावर बाहरी सुरक्षा घेरे के नज़दीक ही मार डाले गए।

-6 जुलाई 2005: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बाबरी मस्जिद गिराए जाने के दौरान ‘भड़काऊ भाषण’ देने के मामले में लालकृष्ण आडवाणी को भी शामिल करने का आदेश दिया। इससे पहले उन्हें बरी कर दिया गया था।

-28 जुलाई 2005: लालकृष्ण आडवाणी 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में रायबरेली की एक अदालत में पेश हुए। अदालत ने लालकृष्ण आडवाणी के ख़िलाफ़ आरोप तय किए।

-4 अगस्त 2005: फ़ैजाबाद की अदालत ने अयोध्या के विवादित परिसर के पास हुए हमले में कथित रूप से शामिल चार लोगों को न्यायिक हिरासत में भेजा।

-20 अप्रैल 2006: कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने लिब्रहान आयोग के समक्ष लिखित बयान में आरोप लगाया कि बाबरी मस्जिद को ढहाया जाना सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा था और इसमें भाजपा, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, बजरंग दल और शिव सेना की ‘मिलीभगत’ थी।

जुलाई 2006: सरकार ने अयोध्या में विवादित स्थल पर बने अस्थायी राम मंदिर की सुरक्षा के लिए बुलेटप्रूफ़ काँच का घेरा बनाए जाने का प्रस्ताव किया। इस प्रस्ताव का मुस्लिम समुदाय ने विरोध किया और कहा कि यह अदालत के उस आदेश के ख़िलाफ़ है जिसमें यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए थे।

 

-19 मार्च 2007: कांग्रेस सांसद राहुल गाँधी ने चुनावी दौरे के बीच कहा कि अगर नेहरू-गाँधी परिवार का कोई सदस्य प्रधानमंत्री होता तो बाबरी मस्जिद न गिरी होती। उनके इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया हुई।

-30 जून 2009: बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले की जाँच के लिए गठित लिब्रहान आयोग ने 17 वर्षों के बाद अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंपी।

-7 जुलाई, 2009: उत्तर प्रदेश सरकार ने एक हलफ़नामे में स्वीकार किया कि अयोध्या विवाद से जुड़ी 23 महत्वपूर्ण फ़ाइलें सचिवालय से ग़ायब हो गई हैं।

-24 नवंबर, 2009: लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों में पेश। आयोग ने अटल बिहारी वाजपेयी और मीडिया को दोषी ठहराया और नरसिंह राव को क्लीन चिट दी।

-20 मई, 2010: बाबरी विध्वंस के मामले में लालकृष्ण आडवाणी और अन्य नेताओं के ख़िलाफ़ आपराधिक मुक़दमा चलाने को लेकर दायर पुनरीक्षण याचिका हाई कोर्ट में ख़ारिज।

-26 जुलाई, 2010: रामजन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद पर सुनवाई पूरी।

-8 सितंबर, 2010: अदालत ने अयोध्या विवाद पर 24 सितंबर को फ़ैसला सुनाने की घोषणा की।

-17 सितंबर, 2010: हाई कोर्ट ने फ़ैसला टालने की अर्जी ख़ारिज की।

 

-30 सितम्बर 2010: एक ऐतिहासिक फ़ैसले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने अयोध्या के विवादित स्थल को राम जन्मभूमि घोषित किया और तीन हिस्सों में बांट दिया।

-9 मई 2011: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फ़ैसले पर रोक लगाते हुए कहा कि सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के फ़ैसले को लागू करने पर रोक रहेगी। साथ ही विवादित स्थल पर सात जनवरी 1993 वाली यथास्थिति बहाल रहेगी।

-26 फ़रवरी 2016: विवादित भूमि पर राम मंदिर के निर्माण को लेकर सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।

-20 जुलाई 2016: बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि के सबसे उम्रदराज़ मुद्दई (वादी) हाशिम अंसारी का 96 साल की उम्र में अयोध्या में निधन हो गया।

-21 मार्च 2017: सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर ने कहा कि अयोध्या विवाद मामले को आपसी बातचीत से सुलझा लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे बातचीत की मध्यस्थता कर सकते हैं। उनके इस सुझाव का लालकृष्ण आडवाणी सहित भाजपा के कई नेताओं ने स्वागत किया।

-07 अगस्त 2017: सुप्रीम कोर्ट ने 1994 में इलाहाबाद हाई कोर्ट के दिए गए इस्माइल फ़ारूक़ी फ़ैसले को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के लिए तीन जजों की बेंच का गठन किया।

-08 अगस्त 2017: यूपी शिया सेंट्रल वक्फ़ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि अयोध्या में विवादित ज़मीन से कुछ दूरी पर मुस्लिम बहुल इलाक़े में मस्जिद बनाई जा सकती है।

-11 सितंबर 2017: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट को निर्देश देते हुए कहा कि अयोध्या में राम जन्मभूमि की निगरानी के लिए 10 दिनों के अंदर दो जजों को बतौर पर्यवेक्षक नियुक्त किया जाए।

-20 नवंबर 2017: यूपी शिया सेंट्रल वक्फ़ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि मंदिर अयोध्या में और मस्जिद लखनऊ में बनाई जा सकती है।

-01 दिसंबर 2017: 32 कार्यकर्ताओं ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के 2010 के फ़ैसले को चुनौती देने के लिए हस्तक्षेप आवेदन दिए। इसमें फ़िल्म निर्माताओं अपर्णा सेन, श्याम बेनेगल और मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ समेत सुब्रमण्यम स्वामी के आवेदन शामिल थे।

-08 फरवरी 2018: सुप्रीम कोर्ट में दिवानी मामले की सुनवाई शुरू।

-14 मार्च 2018: सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रमण्यम स्वामी समेत सभी अंतरिम याचिकाओं को ख़ारिज किया। केवल सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका के बारे में अदालत ने कहा कि अब इसे एक अलग याचिका के रूप में सूचीबद्ध किया जाएगा।

-06 अप्रैल 2018: मुस्लिम पक्षकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि वो 1994 के अपने फ़ैसले पर पुनर्विचार के लिए इस मामले को बड़ी पीठ के पास भेजे।

-06 जुलाई 2018: उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि कुछ मुस्लिम संगठन 1994 के फ़ैसले पर पुनर्विचार की मांग कर मामले की सुनवाई में देर कराने की कोशिश कर रहे हैं।GETTY IMAGES

-13 जुलाई 2018: सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ किया कि अयोध्या में विवादित ज़मीन के मामले में 20 जुलाई से लगातार सुनवाई होगी।

-20 जुलाई 2018: सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला सुरक्षित रखा।

-27 सितंबर 2018: सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद से जुड़े 1994 वाले फ़ैसले पर पुनर्विचार से इनकार किया। उस फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ‘मस्जिद में नमाज़ पढ़ना इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है।. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस्माइल फ़ारुकी मामले को संवैधानिक पीठ के पास भेजने से भी इनकार कर दिया।

9 नवंबर 2019ः फैसले की घड़ी। सुप्रीमकोर्ट की पांच सदस्यीय बेंच का फैसला साढ़े 10 बजे सुबह आएगा।