अब अम्फान का खौफ, हर साल समुद्री तूफान, ओडिशा परेशान

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भुवनेश्वर। हर साल चक्रवाती तूफान से ओडिशा परेशान है। अभी कोरोना की मार झेल ही रहा था कि अम्फान चक्रवाती तूफान ने एक बार राज्य का अर्थशास्त्र और समाजशास्त्र बिगाड़ने को आ गया है। ओडिशावासियों की किस्मत में है चक्रवाती तूफान से तबाह होना और फिर अगले तूफान के लिए उठकर खड़े हो जाना। यह दुर्भाग्य लगता है कि राज्य के अस्तित्व में आने के साथ ही शुरू हो गया था। हर चक्रवाती तूफान तबाही का मंजर छोड़ जाता है। अम्फान से पहले बीते साल इसी महीने फॉनी चक्रवात की तबाही का मंजर अभी भी लोगों की आंखों में टिका होगा। बर्बाद हुए तटीय क्षेत्र के लोग तो अभी उबरे भी न होगे।

राज्य के सबसे तबाही मचाने वाला 1999 सुपर साइक्लोन को भला कौन भूला होगा। कहा जा रहा है कि 1999 के सुपर साइक्लोन के बाद यह दूसरा सुपरसाइक्लोन होगा। सात जिलों में भारी बारिस और तेज गति से हवाएं चलेंगी। सुपर साइक्लोन के खौफ से आज भी ओडिशा नहीं उबर पाया। अब तो चक्रवाती तूफान हर साल आने लगा है। सुपर साइक्लोन अक्तूबर 1999 में आया था। इस साइक्लोन ने 10 हजार लोगों को लील लिया यानी मौते हो गयी थी। जगतसिंहपुर में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था।

सुपर साइक्लोन 260 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से पारादीप में लैंडफाल किया था। कई मीटर ऊंची लहरों ने लोगों को संभलने का मौका दिए बिना ही तटवर्ती गांवों को लील गयीं थी। ओडिशा में 9887 लोगों की मौत हुई और 4.44 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ था। इसे बीसवीं सदी का सबसे प्रलयंकारी तूफान माना गया। तटीय क्षेत्र में आश्रयस्थल और चेतावनी डिवाइस तभी लगाया गया था। इसके बाद 2013 में फैलिन तूफान ने सुपर साइक्लोन की यादें ताजा कर दीं। यह भी अक्तूबर मे ही आया था। इसकी तीव्रता 215 किलोमीटर प्रतिघंटा थी। सावधानी के चलते फैलिन में 44 लोगों की ही मौत हुई थी।

आपदा प्रबंधन में ओडिशा सरकार की चौतरफा तारीफ की गयी थी। हालांकि इसमें 394 बिलियन डालर का नुकसान हुआ था। इसके बाद 2014 में हुड़हुड़ चक्रवात आया था। पूर्ववर्ती तूफानों से थोड़ा छोटा बताया जाता था। मगर गति 185 किलोमीटर प्रतिघंटा थी। इसके 2018 में तितली समुद्री तूफान आया जिसने गंजाम और गजपति में तबाही मचायी थी। इसके प्रभाव से 50 लोगों की मौत हो गयी थी। आवागमन और संचार व्यवस्था ध्वस्त हो गयी थी। तीन मई 2019 को फॉनी चक्रवात आया जिसने 14 जिलों पर असर डाला। इस तूफान के दौरान मरने वालों की अधिकारिक तौर पर 64 की संख्या बतायी गयी। फॉनी का लैंडफाल पुरी समुद्र तट पर हुआ था। हालांकि पहले से राहत बचाव अभियान के कारण भारी संख्या में लोगों की जान बचा ली गयी थी। अब देखिये अम्फान क्या कहर बरपाता है।

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