अबकी टेलीविजन पर देख सकेंगे भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा, भक्तों की भीड़ नहीं दिखेगी

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पुरी (महेश शर्मा)। ऐसा शायद पहली बार होगा जब महाप्रभु जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा भक्तों की भीड़ के बिना ही निकाली जाएगी। आप रथयात्रा का सजीव प्रसारण विभिन्न चैनलों पर देख सकेंगे। लॉकडाउन को लेकर केंद्र सरकार की हालिया गाइड लाइन और रथयात्रा पर नवीन पटनायक सरकार की गंभीरता को देखते हुए कहा जा सकता है कि रथयात्रा टलने या फिर श्रीमंदिर परिसर में ही रथयात्रा की औपचारिकता की भी संभावना न के बराबर है। श्रीमंदिर समिति की बैठक के बाद रथयात्रा बिना भक्तों की भीड़ के निकालने का निर्णय लेते हुए सरकार के अनुमति मांगी गयी है। शनिवार को जारी गाइड लाइन में साफ कहा गया है कि दूसरे चरण में यानी आठ जून से धार्मिक स्थल खोले जा सकते हैं। इस निर्णय से रथयात्रा आयोजन की संभावनाओं को बल मिला है।

यहां पर बताते चलें कि 26 अप्रैल से रथ बनाने का काम शुरू होना पर लॉकडाउन के चलते यह कार्य 8 मई से शुरू हो पाया। अम्फान तूफान के चलते भी दो दिन विलंब हुआ। पूरे 200 कारीगर रथ निर्माण में लगाए गए हैं। कोरोना बचाव के नियमों का कड़ाई से पालन करते हुए इन कारीगरों को होटल में रखा गया है। निर्माण स्थल के सौ मीटर इर्दगिर्द किसी के भी जाने की अनुमति नहीं है। रययात्रा पर सरकारी इजाजत की खानापूरी के बाद योजना तैयार की जाएगी। यात्रा का स्वरूप कैसा होगा और कितने लोगों को शामिल किया जाएगा।

इस पर सरकार और श्रीमंदिर समिति को निर्णय लेना है। श्रीमंदिर समिति के अध्यक्ष गजपति महाराज दिव्यसिंह देव के अनुसार रथयात्रा का लाइव प्रसारण अलग-अलग चैनलों पर किया जाएगा। पुरी में आए दिन कोरोना पॉजिटिव के मामले सामने आने पर बिना भक्तों की भीड़ के रथयात्रा निकालने की बात उठी। तय हुआ कि कम से कम लोगों को शामिल किया जाएगा। कोरोना की रोकथाम के लिए बनाए गए नियमों को किसी भी कीमत पर नहीं तोड़ा जाएगा। यह भी बताया गया है कि पांच जून को होने वाली स्नान पूर्णिमा श्रीमंदिर परिसर में ही आयोजन से जुड़े लोगों की उपस्थिति में होगी। रथयात्रा से 15 दिन पहले स्नान पूर्णिमा का अपना महत्व है। इसमें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा का सुगंधित जल के 108 घड़ों से अभिषेक स्नान कराया जाएगा। इसके बाद भगवान भी क्वारंटाइन (एकांतवास) में चले जाते हैं जहां उनका इलाज किया जाता है। उन्हें स्नान के बाद बुखार आ जाता है। फिर रथयात्रा निकाली जाती है और महाप्रभु अपने भाई बहन के साथ मौसी के घर गुंडिचा मंदिर को आठ दिन के लिए जाते हैं।

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