समोसा और जलेबी तो आपने खूब खाए होंगे, पर क्या आप जानते है हिंदी के नहीं है ये नाम

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नई दिल्ली : आज देश भर में हिंदी दिवस मनाया जा रहा है. हर साल यह दिन 14 सिंतबर को मनाया जाता है. तो इस मौके पर हम आपको बता रहे है हिंदी के बारे में कुछ रोचक तथ्य. हिंदी एक ऐसी भाषा है जिसमे कई दूसरी भाषाओँ के शब्दों को भी अपना बना लिया है. अब ये शब्द हिंदी का ही एक हिस्सा बन चुके है. तो आइए जानते है इनके बारे में.

समोसा

आज दुनियाभर में समोसे की पहचान भारत से जुडी हुई है. लेकिन क्या आपको पता है समोसे का इजाद भारत ने नहीं किया और न ही इसका नाम हिंदी में है. समोसा एक पर्शियन शब्द है. बता दें, समोसा भारत में मध्य एशिया की पहाड़ियों से गुज़रते हुए पहुंचा जिस क्षेत्र को आज ईरान कहते हैं. इसका असली नाम सम्बुसक है. मध्य एशियाई देशों में इसे सोम्सा कहा जाता है. अफरिकन देशों में इसे सम्बुसा कहा जाता है.

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जलेबी

आप सभी को लगता होगा कि जलेबी शब्द भी भारत में ही बना है. लेकिन ये शब्द हिंदी का नहीं है. जलेबी मूल रूप से अरबी शब्द जलेबिया से बना है. पर्शियन में इसे जलेबिया नाम से जाना जाता है और भारत की तरह वहां भी ये उतना ही फेमस है.

गुलाब जामुन

भारत में हर जगह गुलाब जामुन के शौकीन है. यही नहीं गुलाब जामुन की तरह काला जामुन और सफेद जामुन भी लोग खूब खाते हैं. लेकिन बता दें, गुलाब जामुन शब्द भी हिंदी शब्द नहीं है. ये असल में पर्शियन नाम है. गुल का मतलब होता है फूल और जामुन का मतलब होता है पानी. अरब देशों में यह लुकमत-अल-कादी नाम से जाना जाता है.

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अचार

मां के हाथ का अचार शब्द भी हिंदी नहीं है. ये शब्द भी पर्शियन है. जिसका मतलब होता है, नमक, सिरके और शहद में अच्छे से मिक्स करके रखे गए फल या सब्जियां. इसे अंग्रेजी में पिकल कहा जाता है.

अनानास

पाइनएपल को भारत में अनानास कहा जाता है. लेकिन ये शब्द भी हिंदी का नहीं है. ये साउथ अमेरिकन शब्द है. कई देशों में भी इसे अनानास कहा जाता है.

चाय

हर गली नुक्कड़ में मिलने वाली चाय शब्द भी हिंदी का नहीं है. ये शब्द चीन से लिया गया है. चीन की मैंडरीन और कैंटनीज भाषा में इसे चा कहते हैं. इसका मतलब होता है चाय की पत्ती.

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