फिर खड़ा होगा विक्रम, ISRO ने कहा- चांद से टकराने के बाद लैंडर को कोई नुकसान नहीं

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बेंगलुरु. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने चंद्रयान-2 (Chandrayan-2) के लैंडर ‘विक्रम’ (Vikram) को लेकर बड़ा बयान दिया है. इसरो ने सोमवार को जानकारी दी है कि चांद की सतह पर हार्ड लैंडिंग के बाद विक्रम को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है. ये सुरक्षित है. लैंडर विक्रम से संपर्क साधने की लगातार कोशिश की जा रही है. उम्मीद है कि जल्द ही हम संपर्क स्थापित करने में कामयाब होंगे.

इसरो ने रविवार को जानकारी दी कि ‘विक्रम’ की लोकेशन पता चल गई है. इसके साथ ही इसरो का काउंटडाउन शुरू हो गया. वैज्ञानिकों ने आशंका जताई थी कि चांद से टकराने के बाद विक्रम को नुकसान पहुंचा है. लेकिन, सोमवार को इसरो को कुछ राहत मिली. अब इसरो के पास लैंडर विक्रम से संपर्क साधने के लिए 12 दिन बचे हैं, वरना ‘मिशन चंद्र’ पूरा होने की उम्मीदें खत्म हो सकती हैं.

दरअसल, चांद पर अभी लूनर डे चल रहा है. एक लूनर डे धरती के 14 दिनों का होता है. इसमें से 2 दिन चले गए हैं. मतलब यह है कि आने वाले 12 दिन चांद पर दिन रहेगा. उसके बाद चांद पर रात हो जाएगी. रात में विक्रम से संपर्क साधने में परेशानी होगी और इसरो का इंतजार लंबा हो जाएगा.

इसरो में ‘मिशन चंद्र’ से जुड़े एक सीनियर साइंटिस्ट के मुताबिक, ‘जैसे-जैसे समय बीतता जाएगा, लैंडर विक्रम से संपर्क स्थापित करना और भी मुश्किल होता जाएगा. अगर जल्द से जल्द विक्रम से संपर्क स्थापित कर लिया गया, तो इसमें अभी भी एनर्जी जनरेट की जा सकती है. क्योंकि, इसमें सोलर पैनल लगे हैं. अगर सूरज की रोशनी विक्रम पर पड़ रही होगी, तो इसके सोलर पैनल के जरिए बैटरी रिचार्ज हो जाएगी. लेकिन, ये सब जितनी जल्दी हो सके करना होगा. नहीं हो दिक्कतें और बढ़ सकती हैं.

चांद से 2.1 किलोमीटर दूरी पर खो गया था विक्रम
इसके पहले इसरो के चेयरमैन के. सिवान ने बताया था कि शुक्रवार देर रात चांद से महज 2 किलोमीटर की दूरी पर आकर लैंडर विक्रम खो गया था. चांद की सतह की ओर बढ़ा लैंडर विक्रम का चांद की सतह से 2.1 किलोमीटर पहले संपर्क टूट गया था. इससे ठीक पहले सबकुछ ठीकठाक चल रहा था, लेकिन इस अनहोनी से इसरो के कंट्रोल रूम में अचानक सन्नाटा पसर गया

लैंडर के अंदर ही है रोवर ‘प्रज्ञान’
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि रोवर प्रज्ञान अभी भी लैंडर के अंदर है. यह बात चंद्रयान-2 के ऑनबोर्ड कैमरे के जरिए खींची गई लैंडर की तस्वीर को देखकर पता चलती है. साथ ही इसरो ने यह भी बताया कि चंद्रयान 2 का ऑर्बिटर जो कि पूरी तरह से सुरक्षित है और सही तरह से काम कर रहा है. वह चंद्रमा के चक्कर लगातार लगा रहा है.

बता दें कि इसरो ने 22 जुलाई को चंद्रयान-2 की सफलतापूर्वक लॉन्चिंग की थी. चंद्रयान-2 के तीन हिस्से हैं. ऑर्बिटर, लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान. ऑर्बिटर फिलहाल अपना काम कर रहा है. ये एक साल तक चांद की तस्वीरें भेजता रहेगा.