गांधी पर गोली चलाने वाले को खाली हाथ में काबू करने वाले गांधी सेवाकारी की पत्नी नहीं रही

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भुवनेश्वर. उनके पति दिवंगत रघुनाथ नायक नई दिल्ली स्थित उस बिड़ला भवन के माली थे जहां महात्मा गांधी आखिरी दम तक रह रहे थे व वहीं उनके सीने पर गोली लगी थी। जब गोली लगी तब रघुनाथ बाग में काम करते थे। गोली चलाने वाले सख्स कौन थे वह रघुनाथ को पता नहीं था लेकिन गोली चलाने के बाद वह उसी झाड़ को लांघ कर निकल जाने की कोशिश की थी जहां रघुनाथ खड़े थे। उनके हाथ में बन्दूक भी थी। फिर भी कुछ न चिन्ता करते हुए रघुनाथ ने उन्हे अपने दोनों हाथ में काबू कर लिया था। काबू करके पुलिस को सौंपा था। फिर दौड़कर जाकर गांधीजी को अपने गोदी पर उठा लिया था। गांधीजी रघु के सर पर मथा रखकर है राम बोले थे व चल बसे थे। राजनगर ब्लाक के दिवंगत रघुनाथ इस पत्रकार को जो बोले थे गांधीजी की मौत के बाद रघुनाथ को वह बिड़ला भवन, नई दिल्ली, पेड़-पौधे कुछ भी अच्छा नहीं लगा था। वह सब छोड़-छाड़कर पत्नी व बेटी को लेकर गांव चले आये थे। क्योंकि वह एक प्रमुख गवाह थे इसलिए गांधीजी की मौत के मुकदमें में गवाही देने के लिए वह अकसर दिल्ली जाते थे। इसी दौरान कई बार नेहेरूजी व दूसरों जो लोग गांधीजी से मिलने बिड़ला भवन जाते थे,से भी उनकी मुलाकात हुई थी। लेकिन उन्हे दिल्ली और अच्छा नहीं लगता था जहां बापू नहीं थे। 1983 को रघुनाथ जागुलाइपडा के अपने घर पर ही प्राणत्याग किया था। उनके याद में लोगों की ओर से गांवमें गांधी-रघु का युगल प्रतिमा बनवाया गया है। उन्ही की पत्नी मन्दोदरी नायक का 92 साल में देहान्त हो गया है। मन्दोदरी बार्धक्य की बीमारी से कई दिनों से पीडित थे। उनकी मौत के बाद रघुनाथ का जन्मस्थान केन्द्रापडा जिले के जागुलाईपड़ा में माहोल पुरी तरह गमगीन है।
रघुनाथ व मन्दोदरी को लेकर जागुलाइपड़ा एक पर्यटन स्थल बन गया था। देश विदेश से लोग रघुनाथ को मिलने व उनसे गांधीजी के अन्तिम समय के बारे में सुनने के लिए आ पहुंचते थे। हजारों पत्रकार, टीवी वाले इस ग्राम को धन्य बना ड़ाले थे। मन्दोदरी रघुनाथ के साथ बिडला भवन में ही रहते थे। जिस दिन यह घटना घटी उस दिन भी मन्दोदरी बाग में काम खतम करके उनके सर्वेण्ट क्वार्टर्स में बैठे थे कि उन्होने बाहर लोगों की शोर सुनी थी। उन्हे सारी बात कई दिनों तक याद थी व कई पत्रकार, लेखक उन्हे मिलकर उस बारे में लेखते थे। आज सबकुछ सिर्फ एक याद बनकर रह गया है।