बारिश और संतों का प्रभावः बड़-अखाड़ा मठ को तोड़ने का काम स्थगित

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पुरी. सुबह से हो रही भारी बारिश व निखिल भारत साधु सन्थ समिति के दबाव की वजह से आज सदियों पुराने बड़-आखड़ा मठ को तोड़ा नहीं जा सका। प्रशासन के प्रतिनिधि पुरी के उपजिलाधीश भवतारण साहू की ओर से कहा गया है कि मठ तोडे़ जाने के बारे में साधु-सन्तों के साथ जो बात हुई वह सफल नहीं रही है। इसलिए मठ तोड़ने के काम को स्थगित किया जा रहा है। इस बारे में साधु संतों के साथ फिर बात की जाएगी व सभी की सहमति के साथ मठ को तोड़ा जाएगा।
सोमवार से राज्य व देश भरसे कई साधु सन्त जिनमें कई नागा साधु थे, पुरी पहुंचकर बड़ अखाड़ा मठ के परिसर में एकत्र हुए थे। आज निखिल भारत साधु सन्त समिति के अध्यक्ष शंकरानन्द गिरि की अध्यक्षता में साधुसन्तों की बैठक हुई। बैठक में बड़आखड़ा मठ के महन्त श्री हरि नारायण दास भी उपस्थित थे। उन्होने कहा था कि मठ का कोई भी हिस्सा असुरक्षित नहीं है। मठ असुरक्षित होने के बारे में न देबोत्तर(एंडाउमेण्ट) विभाग ने कभी कहा है न पुरातत्व विभाग(एएसआई) की ओर से कहा गया है। तो फिर यह मठ असुरक्षित हुआ कैसे। जबकि प्रशासन हमें बुलाकर जबरन कह रहा है कि मठ असुरक्षित है। इस दस्तावेज पर दस्तखत करो। हम इसे कैसे मान लेंगे? महन्त दास के मुताबिक राज्य सरकार व जिला प्रशासन स्वेच्छाचरिता अपनाये हुए हैं। यह काम देश के मठ संस्कृति, आध्यात्मिक परम्पराओं पर आक्रमण ही है।
इतिहास के मुताबिक वर्षों पहले जब जगन्नाथ मन्दिर पर बाहरी ताकतों की ओर से आक्रमण किया गया तब नागा साधुओं को जगन्नाथ मन्दिर को बचाने के लिए भेजा गया था। उन साधुओंने 12 दिन तक मन्दिर के चारों ओर पहरेदारी करने की वजह से मन्दिर बच गया था। तब इन साधुओं ने बड़ अखाड़ा मठ की स्थापना की थी। तब से इस मठ का काम जगन्नाथ मन्दिर को सुरक्षा देना बनकर रह गया है। यदि यह मठ नहीं रहेगा ता फिर जगन्नाथ मन्दिर कैसे रहेगा? यह एक राष्ट्रीय स्तर का मठ है। यहां के महन्त को कुम्भमेला में 18 नागा अखाड़ा के साधु सन्तों के द्वारा चुना जाता हैं। उसे ऐसा कैसे पलक झपटते ही तोड़ा जा सकता है।
अध्यक्ष श्री गिरि ने कहा है कि सरकार की इस कार्य को समिति की ओर से निन्दा की जाती है व प्रशासन को हम बता देना चाहते हैं कि जगन्नाथ मन्दिर की तरह इसके पास के मठ भी देश के कई ऐतिहास, परम्परा व संस्कृति का प्रतीक है। इसे तोड़ने की मूर्खता न किया जाए।