शवों को नहीं मिल रहा ठिकाना, कब्रिस्तानों में कब्जा जमाए बैठे हैं लोग!

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नई दिल्ली: राजधानी में ईसाई कब्रिस्तान की जगहों पर भी कब्जे होने लगे हैं. शिकायतों के बाद माइनॉरिटी कमीशन ने एक स्टडी कराई जिसमें इस बात का खुलासा हुआ है कि शहर में ईसाई कब्रिस्तान के हालात ठीक नहीं हैं.

स्टडी की रिपोर्ट में हुए खुलासे के बाद कमीशन ने इस बाबत प्रशासन को दिशा निर्देश जारी करते हुए कब्रिस्तान की मौजूदा स्थिति की रिपोर्ट तलब की है. कहा गया है कि दिल्ली के कब्रिस्तानों पर अवांछित कब्जा किया जा रहा है.

शिकायतों के आधार पर हुई है स्टडी
दिल्ली माइनॉरिटी कमीशन ने मुस्लिम कब्रिस्तान की खराब हालत के बाद ईसाई कब्रिस्तान पर कब्जों को लेकर मिल रही शिकायतों के बाद एक स्टडी कराई. स्टडी कंप्लीट होने के बाद ये बात सामने आई कि कुछ लोगों ने कई कब्रिस्तानों पर कब्जे कर लिए हैं, जिसकी वजह से अब इन कब्रिस्तानों में शवों को दफनाने की जगह कम पड़ रही है.

सिमेट्री में है फंडिंग की है समस्या
स्टडी के बाद दिए गए सुझाव में दफनाने के लिए ईको फ्रेंडली तरीके इस्तेमाल करने को कहा गया है. रिपोर्ट में ये बात भी सामने आई है कि मौजूदा सिमेट्री सीवर, बिजली और पानी की निकासी से जूझ रही हैं. साथ ही दिल्ली की ज्यादातर सिमेट्री फंड की कमी से भी परेशान है. मौजूदा समय में इस कमी को क्रिश्चयन परिवार से मिलने वाले फंड से पूरा किया जाता है.

उल्ल्हास फाउंडेशन से कराई स्टडी
कमीशन ने कब्रिस्तान की मौजूदा स्थिति और वहां की सनस्यओं को देखते हुए उल्ल्हास फाउंडेशन को इस स्टडी का जिम्मा सौंपा था. फाउंडेशन ने इस स्टडी को देखते हुए अपनी टीमों को दो हिस्सों में बांटा हुआ था. एक टीम का काम चर्च और कब्रिस्तान से जुड़े डाटा और जरूरी जानकारियां इकट्ठा करना था, जबकि दूसरी टीम का काम चर्च लीडर्स और प्रतिनिधियों से बातचीत करके कब्रिस्तान की मौजूदा हालात का जायजा लेने का था.

ये टीम कब्रिस्तान की जगह देने वाली सरकारी एजेंसियों जैसे डीडीए, एनडीएमसी, एमसीडी के उन अफसरों से बातचीत भी करने में लगी हुई थी. टीम का काम ये जानकारी भी जुटाना था कि जगह नहीं होने की स्थिति में शवों को कहां और कैसे दफनाया जाए.

रिपोर्ट में दिए गए कई अहम सुझाव
स्टडी के बाद तैयार रिपोर्ट में कमीशन को कई सुझाव भी दिए गए हैं, जिसमें कहा गया है कि यदि प्रशासन जल्द इन कब्रिस्तानों पर किए गए कब्जों को नहीं हटवाते तो आने वाले समय में कब्रिस्तान में शवों को दफन करने के लिए जगह ही नहीं बचेगी.

रिपोर्ट में यह सुझाव भी दिए गए हैं कि कब्रिस्तानों में जगहों की कमी के चलते अब पक्की कब्रें नहीं बनाई जाए, इसके साथ ही कब्रों को दीवारों में बनाए गए खास किस्म के बॉक्स में रखवाया जाए. इस तरह से एक निर्धारित जगह पर एक नहीं बल्कि दो से तीन शवों को दफनाया जा सकता है.

दिल्ली में सात ओपन ईसाई कब्रिस्तान
स्टडी में सामने आया कि पूरी दिल्ली में सात कब्रिस्तान मौजूद हैं जिनमें इंडियन क्रिश्चयन सिमेट्री, बुराड़ी, एमसीडी क्रिश्चयन सिमेट्री, द्वारका, सेंट थॉमस, तुगलकाबाद, एल्फा ओमेगा, मंगोलपुरी,ओखला सिमेट्री, क्रिश्चयन सिमेट्री, बिहारी कालोनी और सेंट जोंस सिमेट्री महरौली मौजूद है. रिपोर्ट में बताया गया है कि इसके अलावा मौजूद सिमेट्री को बंद कर दिया गया है और वहां केवल परिवार के लिए ही डबलिंग में जगह दी जा रही हैं.

सेंट जोंस सिर्फ सीएनआई परिवार को ही दिया जाता है, वहीं ओखला सिर्फ पेरिश परिवार ही इस्तेमाल कर सकते हैं.

इन इलाकों में रहती है क्रिश्चियन आबादी
रिपोर्ट में ये बात भी सामने आई है कि दिल्ली की कुछ खास जगह ही हैं, जहां क्रिश्चियन आबादी निवास करती है. इसमें मयूर विहार, आर.के. पुरम, महरौली, दरियागंज, करोल बाग,बुराड़ी, रोहिणी, पुल बंगश, द्वारका और नजफगढ़ शामिल हैं.

पांच मेन सिमेट्री में से दो ही चल रही हैं जबकि बुराड़ी, द्वारका और तुगलकाबाद सिमेट्री में तो मुर्दों को दफ़नाने के लिए जगह ही नहीं बची है, ऐसे में नई जगह की जरूरत को ध्यान में रखते हुए तुरंत नई सिमेट्री बनाने का सुझाव दिया गया है.