पाक में सुरक्षित नहीं वहां के मंत्री, मांगी भारत से शरण

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नई दिल्ली। नया पाकिस्तान बनाने का दावा करनेवाले इमरान खान की पार्टी के नेता ही खुद को सुरक्षित नहीं मान रहे। पाकिस्तान की आरक्षित सीट से पूर्व में विधायक चुने गए तहरीक-ए-इंसाफ के बलदेव कुमार भारत आ गए हैं। उन्होंने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को असुरक्षित बताते हुए कहा कि अब वह पाकिस्तान वापस नहीं जाना चाहते। बलदेव ने भारत सरकार से शरण की गुहार भी लगाई है।
बलदेव कुमार ने पाकिस्तान में असुरक्षित माहौल का दावा करते हुए कहा, श्पाकिस्तान में सिर्फ अल्पसंख्यक नहीं, खुद मुस्लिम भी सुरक्षित नहीं हैं। हम पाकिस्तान में बहुत मुश्किल हालात का सामना कर रहे हैं। मैं भारत सरकार से अनुरोध करता हूं कि मुझे इस देश में शरण दें। मैं वापस नहीं जाऊंगा।श् उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार को विशेष पैकेज का ऐलान करना चाहिए ताकि पाकिस्तान के हिंदू और सिख अल्पसंख्यक भारत आ सके। उन्हें वहां प्रताड़ित किया जा रहा है।

3 महीने के वीजा पर भारत आए हैं बलदेव कुमार
बता दें कि पिछले कुछ महीने में पाकिस्तान में अल्पसंख्यक लड़कियों को अगवा कर जबरन धर्मांतरण की कई घटनाएं हो चुकी हैं। एक स्थानीय मीडिया में प्रकाशित खबर के अनुसार, 2007 में बलदेव ने पंजाब के खन्ना की रहनेवाली एक महिला से विवाह किया था। फिलहाल वह खन्ना में ही अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। बलदेव 3 महीने के वीजा पर भारत पहुंचे हैं। वह खैबर पख्तनूख्वा इलाके में पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए आवाज उठाते रहे हैं। वह इमरान खान की पार्टी से एक बार विधायक भी चुने जा चुके हैं। एक मीडिया समूह से बातचीत में उन्होंने कहा, श्पाकिस्तान की बाकी जनता की तरह ही मुझे भी इमरान खान से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन उन्होंने हमें निराश किया। पाकिस्तान में अभी बहुत असुरक्षा का माहौल है और ऐसे वक्त में मैं वहां वापस नहीं जाना चाहता हूं।

आरक्षित सीट से सिर्फ 2 दिन के लिए विधायक बने थे बलदेव
बलदेव कुमार पाकिस्तान की आरक्षित सीट से विधायक बने थे। हालांकि, उनका कार्यकाल सिर्फ 2 दिन तक के लिए ही सीमित था। पाकिस्तान में प्रावधान है कि यदि मौजूदा विधायक की हत्या अथवा मृत्यु हो जाती है तो दूसरे नंबर पर रहे शख्स को विधायक बनाया जाता है। बारीकोट की आरक्षित सीट के विधायक की हत्या के आरोप में बलदेव को 2 साल तक जेल में रहना पड़ा। 2018 में जब वह जेल से रिहा हुए तो उन्हें विधायक बनाया गया क्योंकि वह चुनाव में दूसरे नंबर पर थे, लेकिन 2 ही दिन में उनका कार्यकाल समाप्त हो गया और फिर से चुनाव हुए। 2007 में अपनी शादी के वक्त कुमार पार्षद के पद पर थे।