सोनाली बेंद्रे को हाई-ग्रेड कैंसर, जानें क्या है ये?

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मुंबई: बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे कैंसर से जूझ रही हैं। 43 वर्षीय एक्ट्रेस ने सोशल मीडिया के जरिए यह जानकारी दी है। फिलहाल इसकी जानकारी नहीं है कि उन्हें कौन सा कैंसर है, यानि शरीर के किस हिस्से में ट्यूमर बना। मगर अपने आधिकारिक बयान में उन्होंने यह बताया कि वह ‘हाई-ग्रेड कैंसर’ से जूझ रही हैं और उनका कैंसर ‘मेटास्टाइज’ हो चुका है।

आखिर क्या होता है ‘हाई-ग्रेड कैंसर’ और उसके ‘मेटास्टाइज’ होने का क्या मतलब होता है?

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मेटास्टाइज कैंसर

इसका मतलब यह है कि कैंसर शरीर के अन्य हिस्से (या हिस्सों) में भी फैल चुका है। लखनऊ कैंसर इंस्टिट्यूट के डॉ शरद सिंह ने बताया, ‘शरीर के जिस हिस्से में ट्यूमर बनता है, अगर वहां से सेल्स टूटकर खून या लिम्फ (लसीका) के जरिए शरीर के दूसरे हिस्से में फैलना शुरू हो जाते हैं तो उसे कैंसर का मेटास्टाइज हो जाना कहते हैं।’

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आखिरी स्टेज में पहुंचा सोनाली बेंद्रे का कैंसर

विशेष्ज्ञों के अनुसार जब कैंसर ‘मेटास्टाइज’ होकर शरीर के अन्य हिस्से में भी फैलने लगते हैं, तो उसे आखिरी स्टेज माना जाता है। हालांकि, इस पड़ाव पर भी उपचार संभव है। कैंसर के मरीज को कब कौन सा ट्रीटमेंट देना है यह फैसला करने से पहले डॉक्टर उसके कैंसर स्टेज का पता लगाते हैं। कैंसर स्टेज का मतलब है कि ट्यूमर का आकार या फैलाव कितने हिस्से तक पहुंच चुका है।

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कैंसर के चार स्टेज होते हैं-

पहला स्टेज

इस स्टेज में ट्यूमर छोटा और अंग के अंदर ही होता है।

दूसरा स्टेज

इस स्टेज में ट्यूमर का आकार धीरे-धीरे बढ़ने लगता है। कुछ मामलों में वह ट्यूमर के पास मौजूद लिम्फ में फैलना शुरू होता है।

तीसरा स्टेज

इस स्टेज में कैंसर के पहुंचने का मतलब है कि ट्यूमर आस पास के टिश्यू और लिम्फ नोड में फैलना शुरू हो चुका है।

चौथा स्टेज

जब कैंसर अपने मूल स्थान से शरीर के अन्य हिस्से में फैल जाता है तो उसे चौथा और आखिरी स्टेज माना जाता है।

नंबर के अलावा कैंसर का स्टेज ‘TNM’ सिस्टम के आधार पर भी तय होता है।

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टी (ट्यूमर): ट्यूमर कितना बड़ा है;

एन (लिम्फ नोड): लिम्फ नोड में ट्यूमर सेल किस हद तक पहुंच चुके हैं;
एम (मेटास्टैसिस): ट्यूमर सेल शरीर के दूसरे अंगों में कितना प्रवेश कर चुके हैं या नहीं।

हाई-ग्रेड कैंसर

कैंसर स्टेज और कैंसर ग्रेड में अंतर होता है। कैंसर का स्टेज जहां यह जानकारी देता है कि वह शरीर में किस हद तक फैल चुका है, वहीं कैंसर का ग्रेड यह दर्शाता है कि ट्यूमर के शरीर में फैलने की क्षमता कितनी है। माइक्रोस्कोप से देखने पर ट्यूमर सेल दिखने में जितने एबनॉर्मल होंगे, उनके बढ़ने की रफ्तार और संभावना उतनी ज्यादा होती है।

G-1 (लो ग्रेड कैंसर)
G-2 (इंटरमीडिएट ग्रेड कैंसर)
G-3 (हाई ग्रेड कैंसर)
G-4 (हाई ग्रेड कैंसर)

लो ग्रेड कैंसर में ट्यूमर सेल नॉर्मल सेल की तरह दिखते हैं और शरीर में उनके फैलने की क्षमता/रफ्तार धीमी होती है। वहीं हाई ग्रेड कैंसर के मामले में माइक्रोस्कोप से देखने पर ट्यूमर सेल नॉर्मल सेल से बहुत ज्यादा असामान्य होते हैं और वे शरीर में तेजी से फैलते हैं।

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