बच्चों को नुकसान पहुंचा रहा है स्मार्टफोन,सोने से पहले ना करने दें यूज़

0
164

स्पेशल डेस्क: बच्चों से लेकर बड़ो तक सभी स्मार्टफोन के दिवाने हैं। कई-कई घण्टों तक लोग इसमें व्यस्त रहते हैं और बच्चे भी इसमें काफी दिलचस्पी दिखाते हैं। लेकिन बच्चों में इसका प्रभाव किसी बड़े व्यक्ति के मुकाबले ज्यादा नुकसानदायक होता है। अगर आप भी उन पैरंट्स में से हैं जो अपने बच्चों को बहलाने-फुसलाने के मकसद से उन्हें अपना स्मार्टफोन थमा देते हैं तो आपके लिए बुरी खबर है।

बहुत सी स्टडीज में यह बात साबित हो चुकी है कि बिस्तर में जाने के बाद सोने से पहले स्मार्टफोन यूज करने के कितने सारे साइड-इफेक्ट्स हैं। बावजूद इसके बड़ी संख्या में लोग सोने से पहले सोशल मीडिया चेक करते हुए और फोन पर गेम खेलते हुए रात बिता देते हैं। ऐसे में अगले दिन सुबह जब आप उठें और ऐसा लगे कि आपकी नींद पूरी नहीं हुई है, चिड़चिड़ाहट महसूस हो रही है और गुस्सा आ रहा है तो आपको पता होगा कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

बच्चे के स्क्रीन टाइम को करें कंट्रोल
यही बात बच्चे और टीनएजर्स के साथ भी होती है। अगर आपका बच्चा दिन भर चिड़चिड़ा और परेशान रहता है तो आपको बच्चे के स्क्रीन टाइम को गंभीरता से कंट्रोल करने की जरूरत है। पीडियाट्रिक्स नाम के जरनल में प्रकाशित एक हालिया रिसर्च में यह बात साबित हो चुकी है कि अगर बच्चे सोने से ठीक पहले स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं तो उनकी नींद पूरी नहीं होती और दिनभर वे थकान और सुस्ती का अनुभव करते हैं।

बॉडी क्लॉक को प्रभावित करती है नीली रोशनी
ऐसा इसलिए होता है कि क्योंकि बच्चे का ब्रेन विकासशील स्टेज में होता है और स्मार्टफोन समेत दूसरे गैजट्स से निकलने वाली नीली रोशनी बच्चे के ब्रेन के साथ-साथ बॉडी क्लॉक को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। इतना ही नहीं, एक और अहम फैक्टर यह भी है कि बच्चों की आंखों की पुतलियां बड़ों की तुलना में थोड़ी बड़ी होती हैं और इस वजह से वे गैजट्स से निकलने वाली रोशनी के प्रति सेंसिटिव होती हैं। ये दोनों ही फैक्टर्स नींद के लिए जरूरी मेलाटोनिन लेवल को बुरी तरह से प्रभावित करते हैं, खासतौर पर बच्चों में।

पैरंट्स को क्या करना चाहिए
– बच्चों को घंटों स्मार्टफोन पर गेम्स खेलने और विडियो देखने से रोकें।
– बेहतर स्वास्थ्य के लिए बच्चों को घर के अंदर या बाहर खेलने के लिए प्रोत्साहित करें।
– आप चाहें तो बच्चे को रीडिंग औऱ पेंटिंग करने के लिए भी प्रोत्साहित कर सकते हैं।
– सोने से पहले बच्चों के हाथ से स्मार्टफोन पूरी तरह से वापस ले लें।
– बच्चे जिस कमरे में सोते हैं वहां पर स्मार्टफोन बिलकुल न रखें।
– बच्चे के सोने से कम से कम 2 घंटे पहले उसे स्मार्टफोन या दूसरे गैजट्स यूज करने से रोक दें।