शिखर वार्ता पर सिंगापुर खर्च करेगा 100 करोड़

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सिंगापुर: पूरी दुनिया की नज़रें इस वक़्त सिंगापुर की तरफ़ हैं जहां राष्ट्रपति ट्रंप और उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन की मुलाक़ात होने जा रही है। सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली शियेन लूंग ने कहा है कि उनका देश इस मुलाक़ात के लिए तकरीबन 20 मिलियन सिंगापुर डॉलर खर्च करने जा रहा है। भारतीय मुद्रा में ये रकम 100 करोड़ रुपये से ज़्यादा बनती है। प्रधानमंत्री ली शियेन लूंग के मुताबिक़ इस रक़म में से आधा केवल सुरक्षा मद में खर्च किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि एक अंतरराष्ट्रीय पहल के लिहाज़ से ये खर्च वाजिब है और सिंगापुर के हित भी हैं। मंगलवार को सिंगापुर के सेंटोसा में राष्ट्रपति ट्रंप और किम जोंग-उन की मुलाक़ात। दोनों नेता इस मुलाक़ात के लिए सिंगापुर पहुंच चुके हैं।

किम जोंग-उन ने सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली शियेन लूंग से मुलाक़ात के बाद कहा कि अगर शिखर सम्मेलन में कोई समझौता हो जाता है तो सिंगापुर को इसके लिए इतिहास में याद किया जाएगा। उधर, अमरीका ये उम्मीद कर रहा है कि इस मुलाक़ात में वो किम जोंग-उन से परमाणु हथियार छोड़ने के लिए कोई वादा ले पाएंगे।

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सिंगापुर ही क्यों?

सिंगापुर को इस मुलाक़ात के लिए मंगोलिया, स्वीडन, स्विट्ज़रलैंड और दोनों कोरियाई देशों के बीच पड़ने वाले असैन्यीकृत इलाके के ऊपर तरजीह दी गई है। 5 जून को सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालकृष्णन ने वाशिंगटन में कहा, “इस मेज़बानी के लिए सिंगापुर ने अपना हाथ खुद खड़ा नहीं किया बल्कि अमरीकियों ने इसके लिए हमसे कहा था।”

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि सिंगापुर के लोगों को इस पर गर्व होगा… हमें इसलिए चुना गया है क्योंकि वे जानते हैं कि हम निष्पक्ष, भरोसेमंद और सुरक्षित हैं।” दुनिया भर में सिंगापुर को एक सुरक्षित और व्यवस्थित शहर के तौर पर देखा जाता है जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जनसभाओं पर करीब से नज़र रखी जाती है।

सिंगापुर और उत्तर कोरिया के कूटनीतिक रिश्ते सत्तर के दशक से हैं। लेकिन उत्तर कोरिया के छठे परमाणु परीक्षण के बाद सिंगापुर ने संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों के मद्देनज़र उत्तर कोरिया से कारोबारी रिश्ते तोड़ लिए थे। सिंगापुर में अमरीका और उत्तर कोरिया दोनों ही देशों के दूतावास हैं। इसका मतलब ये हुआ कि यहां दोनों देशों के बीच गुपचुप डायलॉग की संभावना भी है। सिंगापुर उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग से भी अपेक्षाकृत नज़दीक है।

मीडिया और सरकार का रुख़

इस शिखर सम्मेलन की मेज़बानी के लिए सिंगापुर ही क्यों बेहतर विकल्प था? इस सवाल पर सिंगापुर के नेता मुखर रहे हैं। प्रधानमंत्री ली शियेन लूंग का कहना है कि सिंगापुर दोनों ही देशों के लिए राजनीतिक रूप से स्वीकार्य है क्योंकि दोनों ही पक्षों से उसके दोस्ताना रिश्ते हैं। ऐसी ख़बरें आई थीं कि उत्तर कोरिया ने इस सम्मेलन का खर्च अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की वजह से उठाने में असमर्थता जताई थी। इस पर सिंगापुर ने कहा कि उनका देश ये खर्च उठाने के लिए इच्छुक है और एक ऐतिहासिक मुलाकात में ये उसकी छोटी-सी भूमिका होगी।

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