शेख हसीना को उम्मीदः तीस्ता जल विवाद को सकारात्मक तरीके से सुलझा लेंगे

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ढाका. बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना को तीस्ता जल विवाद पर भारत से सकारात्मक रवैये की उम्मीद है। हसीना अक्टूबर की शुरुआत में भारत दौरे पर आने वाली हैं। हसीना ने बुधवार को संसद में कहा कि भारत के साथ करीब 22 साल से चले आ रहे तीस्ता जल विवाद को सकारात्मक तरीके से जल्द ही सुलझा लिया जाएगा।

दिल्ली में 3-4 अक्टूबर को इंडिया इकोनॉमिक समिट होगी
शेख हसीना ने कहा, ‘‘हमें आशा है कि दो देशों के बीच चले आ रहे अनसुलझे विवादों को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा। उम्मीद करते हैं कि मेरे दौरे से पहले भारत की ओर से सभी अनसुलभारत मेंझे विवादों पर अपना सकारात्मकता देखने को मिलेगी।’’

दो दिवसीय इंडिया इकोनॉमिक समिट होगी
वल्ड इकोनॉमिक फोरम द्वारा दिल्ली में 3-4 अक्टूबर को दो दिवसीय इंडिया इकोनॉमिक समिट होगी। इसमें शामिल होने के लिए शेख हसीना 3 से 6 अक्टूबर तक भारत दौरे पर आएंगी। इस कार्यक्रम का मूल विषय ‘भारत के लिए नई खोज, दक्षिण एशिया का विकास और विश्व को प्रभावित करना’ है।
शेख हसीना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की द्विपक्षीय वार्ता
बांग्लादेश मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शेख हसीना और नरेंद्र मोदी के बीच 5 अक्टूबर को द्विपक्षीय वार्ता होगी। इस दौरान हसीना मोदी के सामने तीस्ता जल विवाद को लेकर बात करेंगी। हसीना ने कहा कि दोनों देशों के बीच सुरक्षा, व्यापार, ताकत, ऊर्जा, संचार, पर्यावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे समझौतों पर पहले ही हस्ताक्षर हो चुके हैं।

कहां से गुजरती है तीस्ता?
तीस्ता नदी हिमालय के पाहुनरी ग्लेशियर से निकलती है। यह सिक्किम से पश्चिम बंगाल होते हुए बांग्लादेश जाती है और बाद में ब्रह्मपुत्र में मिल जाती है। यह नदी कुल 393 किलोमीटर का रास्ता तय करती है। इस नदी से बांग्लादेश की 2 करोड़ और भारत की 1 करोड़ की आबादी का जीवनयापन जुड़ा है।

कब से चल रहा है विवाद?
1815 में नेपाल के राजा और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच तीस्ता नदी के पानी को लेकर समझौता हुआ। तब राजा ने नदी के बड़े हिस्से पर नियंत्रण अंग्रेजों को सौंप दिया। बांग्लादेश के आजाद होने के 12 साल बाद 1983 में दोनों (भारत-बांग्लादेश) देशों के बीच समझौता हुआ। पानी का 36ः हिस्सा बांग्लादेश और बाकी भारत के खाते में आया। लेकिन पिछले 18 साल से बांग्लादेश इस पर दोबारा विचार करने पर अड़ा है।

क्या है समस्या?
दिसंबर से मार्च के बीच इस नदी में पानी का बहाव कम हो जाता है। इस वजह से बांग्लादेश में मछुआरों और किसानों को कुछ महीनों तक रोजगार के दूसरे विकल्प तलाशने पड़ते हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार का कहना है कि वह अपने बैराज से तीस्ता का ज्यादा पानी बांग्लादेश को नहीं दे सकती।