सीक्रेट प्लान : सरकार गिराने की तैयारी में थी पीडीपी, भाजपा ने लपक लिया मौका

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नई दिल्ली : देश की सियासत में अचानक घटे घटनाक्रम के तहत जम्मू-कश्मीर की महबूबा सरकार से समर्थन वापस लेकर भाजपा ने राष्ट्रवाद के नाम पर सरकार कुर्बान कर दी। लेकिन सब कुछ अचानक नहीं था। भारतीय राजनीति की नए चाणक्य अमित शाह ने इसी टॉप सीक्रेट पटकथा पहले ही लिख ली थी। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को संकेत मिल चुके थे कि ऑपरेशन आल आउट के विरोध में मानवाधिकार और मुस्लिम को मुद्दा बनाकर पीडीपी सितंबर-अक्टूबर तक सरकार गिरा सकती है। इसके बाद से भाजपा इस पर मंथन कर रही थी। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने तमाम पहलू देखने के बाद देश की अखंडता और राष्ट्रवाद के नाम पर गठबंधन से हटने का फैसला किया। खासतौर पर जम्मू में भाजपा- संघ कैडर में नाराजगी की रिपोर्ट शाह को मिली थी।

बीजेपी ने आरोप लगाए कि पीडीपी सरकार चलाने में नाकाम रही। इसलिए देशहित में अब जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन जरूरी है।

तेज की गई ऑपरेशन आल आउट की रणनीति

कैडर में ऊर्जा संचारित करने के लिए ऑपरेशन ऑल आउट तेज करने की रणनीति भी तैयार की गई है। रमजान में 300 ऐसे कट्टरपंथियों की लिस्ट बनाई गई है, जो युवाओं को आतंकवाद की ओर धकेल रहे हैं। भाजपा के एक नेता का कहना है कि ऑपरेशन में यूनीफाइड कमांड का मुखिया मुख्यमंत्री होता है। ऐसे में वह अड़चन बनतीं। ऐसे में गठबंधन तोड़कर राज्यपाल शासन में ऑपरेशन को अंजाम देने का फैसला किया। भाजपा का दावा है कि आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई में पीडीपी का पूरा सहयोग नहीं था। एक सूत्र ने बताया कि सितंबर-अक्टूबर में पीडीपी के फैसले के बाद ऑपरेशन ऑल आउट तेज करते तो बर्फबारी की वजह से दिक्कतें आतीं। लोकसभा चुनाव से पहले नतीजा भी नहीं मिलता। इसलिए बीजेपी ने पीडीपी से अलग होने का फैसला किया।

2019 पर नजर

इसके अलावा गठबंधन टूटने का एक और महत्वपूर्ण कारण है 2019 के लोकसभा चुनाव। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ऑपरेशन ऑल आउट के नतीजे बीजेपी को चुनाव के पहले फायदा पहुंचाते। इसलिए यह कदम बीजेपी को अचानक उठाना जरूरी हो गया था। इसके बाद बीजेपी ने मंथन किया। सूत्रों के मुताबिक पीएम मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने तमाम पहलू देखने के बाद देश की अखंडता और राष्ट्रवाद के नाम पर गठबंधन से हटने का फैसला किया।

भाजपा तीन स्तर पर नरम रही:

1) पत्थरबाजों से मुकदमे वापस लिए, ताकि मानवता और राजनीतिक दृष्टि से संदेश जाए कि भटके युवाओं को एक मौका दिया है।

2) वार्ताकार की नियुक्ति की। उन्होंने सभी पक्षों से बातचीत का बयान दिया और बाद में गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इसे दोहराया।

3) रमजान में एकतरफा सीजफायर का ऐलान। केंद्र सरकार इन फैसलों के जरिये कश्मीर मसले पर संवेदनशीलता दिखाना चाहती थी।

क्या है भाजपा की भविष्य की रणनीति

उपचुनाव में हार के बाद नाकाम सीजफायर से भाजपा-संघ कैडर में नकारात्मक संदेश का जोखिम नहीं उठाना चाहती थी। ऐसे में आतंकवाद से समझौता नहीं करने का फैसला किया।