अभी तक फरार हैं रेवाड़ी में सामूहिक दुष्कर्म के आरोपित, 1 लाख के ईनाम की घोषणा

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रेवाड़ी: छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म की घटना के तीन दिन बाद भी पुलिस अभी तक आरोपितों को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने आरोपितों की तुरंत गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं। वहीं आरोपित की गिरफ्तारी के लिए एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेटिंग टीम) का गठन किया गया है। रेवाड़ी के एडीजीपी श्रीकांत जाधव ने एसआइटी की कमान नूंह की एसपी नाजनीन भसीन को सौंपी है।

एसपी ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए आरोपियों के सिर पर 1 लाख रुपए के ईनाम की घोषणा की है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि एसआईटी मामले की जांच के लिए गांव भी जाएगी।

एसपी भसीन शनिवार को पीड़िता से मिलने पहुंची और उसका हालचाल जाना। इसके बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि मैं आज पीड़िता से मिली और उससे बात की है। मुख्य आरोपियों की पहचान हो चुकी है और उनकी तलाश की जा रही है। हम इस केस के हर पहलू की जांच कर रहे हैं।

शुक्रवार को रेवाड़ी आए मुख्यमंत्री मनोहर लाल को एडीजीपी साउथ रेंज व एसपी रेवाड़ी ने मुख्यमंत्री को बताया कि पीड़िता 12 सितंबर को देर रात रेवाड़ी पहुंची थी। उसी रात जीरो एफआइआर दर्ज करा दी गई। प्रक्रिया पूरी करते हुए आधी रात बीत चुकी थी, जिससे तकनीकी रूप से एफआइआर 13 सितंबर में दर्ज हो रही है। एसपी रेवाड़ी व नारनौल के अनुसार पीड़िता का अपहरण कनीना से उस समय किया गया था, जब वह कोचिंग के लिए जा रही थी, लेकिन दुष्कर्म के वारदात स्थल की पहचान नहीं हो पा रही है।

आरोपितों की संख्या को लेकर भी असमंजस है। प्राथमिकी में दर्ज तीनों आरोपित पंकज फौजी, मनीष व निशु पीड़िता के गांव व आसपास के ही रहने वाले हैं। सभी की पहचान हो चुकी है और गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। पुलिस के अनुसार पीड़िता के परिवार का अब यह कहना है कि जहां पर दुष्कर्म हुआ था वहां पर आठ से दस युवक और बुला लिए गए थे। इस मामले में पीड़िता के बयान और आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद ही स्थितिस्पष्ट होगी।

पुलिस को पीड़िता के बयान का इंतजार

पीड़िता शुक्रवार को समस्या होने पर दोबारा रेवाड़ी के नागरिक अस्पताल में लाई गई, लेकिन अभी तक उसके अदालत में 164 के बयान दर्ज हुए हैं। एडीजीपी साउथ रेंज श्रीकांत जाधव के अनुसार पुलिस बयान दिलवाने के लिए तैयार है, लेकिन पीड़िता अभी स्वास्थ्य कारणों से बयान नहीं दे रही है। इन बयानों के बाद तस्वीर काफी हद तक और अधिक स्पष्ट हो जाएगी।

छात्रा की हालत बिगड़ने पर आरोपितों ने बुलवाया था झोलाछाप

अत्यधिक रक्तस्त्राव होने के कारण आरोपितों में से एक ने अपने एक परिचित झोलाछाप को उस कुएं पर बुलवाया था, जहां पर दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया गया था। उसने छात्रा की हालत देखने के बाद उपचार के लिए मना कर दिया। इसके बाद आरोपित पीड़ित छात्रा को गांव के एक अन्य चिकित्सक के पास लेकर गए जहां पर चिकित्सक ने उसको दवा दी। यह चिकित्सक भी झोलाछाप बताया जा रहा है।

इसके बाद भी जब स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ तो आरोपित छात्रा को कनीना बस स्टैंड पर छोड़कर मौके से फरार हो गए। पुलिस सूत्रों के अनुसार झोलाछाप अभी फरार है। अगर झोलाछाप डाक्टर समय रहते परिजनों को सूचना दे देते तो शायद आरोपितों को उसी समय काबू किया जा सकता था। पुलिस टीम ने आरोपितों का पता करने के लिए उनके परिजनों को भी हिरासत ले लिया है।

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