कम करना या छोड़ना है फायदेमंद? ये हैं शराब को लेकर हुई रिसर्च के नतीजे

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अगर आप भी उन लोगों की लिस्ट में शामिल हैं जो शराब छोड़ते नहीं, बल्कि उसे कम करने की पैरवी करते हैं तो जरा संभल जाए. आपकी ये आदत आपकी मानसिक सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है. सुनकर थोड़ी हैरानी होना लाजमी है, लेकिन हाल ही में हुई एक रिसर्च में कुछ ऐसा ही दावा है. आइए जानते हैं आखिर क्या है यह रिसर्च.

हाल ही में हुई एक रिसर्च के अनुसार जो महिलाएं शराब का सेवन बिल्कुल बंद कर देती हैं उनके मानसिक स्वास्थ्य में काफी सुधार हो सकता है. शराब का औसत सेवन पुरुषों के लिए सप्ताह में 14 पैग जबकि महिलाओं के लिए सप्ताह में 7 पैग आदर्श पैमाना माना गया है.

हांगकांग यूनिवर्सिटी के माइकल नी ऐसे लोगों को सतर्क रहने की सलाह देते हैं जो कम मात्रा में शराब पीने से नुकसान नहीं होने की वकालत करते हैं.

लोगों की मानसिक सेहत पर पड़ने वाले असर को देखने के लिए हांगकांग में 10,386 लोगों पर एक अध्ययन किया गया. इस अध्ययन के दौरान साल 2009 और 2013 में दो तरह के लोगों को शामिल किया गया. पहला, जो शराब का सेवन बिल्कुल नहीं करते थे. दूसरा, ऐसे लोग जो शराब का सेवन कम मात्रा में करते थे. इस अध्ययन को कनाडा की मेडिकल एसोसिएशन जर्नल में प्रकाशित किया गया.

31,079 लोगों पर हुए शोध में हुआ खुलासा-

इस शोध में शोधकर्ताओं ने अमेरिका में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन अल्कोहल एब्यूज एंड अल्कोहलिज्म द्वारा किए गए 31,079 लोगों के प्रतिनिधि सर्वेक्षण के आंकड़ों के साथ अपने निष्कर्ष की तुलना की. इस शोध में पता चला कि शराब का सेवन करने वाले एक ही उम्र के प्रतिभागियों की औसत आयु 49 वर्ष थी जबकि महिलाओं में यह आंकड़ा 56 प्रतिशत था.

88 प्रतिशत महिलाएं शराब का सेवन नहीं करती थीं-

इस शोध में पता चला कि लगभग 64 फीसदी पुरुष शराब का सेवन नहीं करने वाले थे. जबकि महिलाओं में ये संख्या लगभग 88 फीसदी थी. इस शोध में पता चला कि जो महिलाएं पहले शराब का सेवन करती थीं, लेकिन अब पूरी तरह से इस लत से बाहर आ चुकी हैं उनकी मानसिक स्थति में अच्छा सुधार देखा गया. ये परिणाम समाजशास्त्रीय विशेषताओं, बॉडी मास इंडेक्स, धूम्रपान की स्थिति और अन्य कारकों के समायोजन के बाद निकाले गए थे.

बता दें कि एक स्वस्थ मस्तिष्क और जिगर के लिए शराब से परहेज अनिवार्य है. शराब हमारे मस्तिष्क में सेरोटोनिन के स्तर को कम करती है। इसके नियमित सेवन से मस्तिष्क का रसायन विज्ञान बदल जाता है जिससे मस्तिष्क स्वास्थ्य में गिरावट आती है.