विपक्ष का मजबूत चेहरा बन सकती हैं प्रियंका

0
95

प्रियंका गांधी के आगे प्रशासन ने टेके घुटने, रोके जाने के बाद भी पीड़ित परिवार प्रियंका से मिलने पहुंचा

शैलेंद्र दीक्षित, कानपुर। आखिरकार चैबीस घंटे में योगी सरकार को मात देकर सोनभद्र हत्याकांड के पीड़ितों से मिल ली प्रियंका गांधी। ये योगी सरकार की हार भी है और मौन सपा बसपा की खाली होती जमीन पर काबिज होती कांग्रेस की मजबूत दस्तक भी। साथ ही स्वस्थ लोकतंत्र के लिए अच्छे संकेत भी । बस ये आन्दोलनो का सिलसिला यू ही कायम रहना चाहिए। सोनभद्र की घटना में जहां सपा और बसपा के दिग्गज नेता चुप्पी साधे हुए हैं, वहीं कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी पीडित परिवार से मिलने के लिए सोनभद्र के लिए रवाना हुईं। उनके काफिले को रास्ते में रोका भी गया, लेकिन प्रियंका ने अपने पांव पीछे नहीं किए और धरने पर बैठ गईं। प्रशासन ने भी बाद में प्रियंका के आगे घुटने टेक दिए और पीडित परिवार उनसे मिलने के लिए मिर्जापुर पहुंचा। प्रियंका जिस तरह से अपने कदम आगे बढा रही हैं। उससे यही दिख रहा है कि आने वाले समय में विपक्ष का सबसे मजबूत चेहरा प्रियंका गांधी होंगी। यूपी इलेक्शन 2022 में इसका खामियाजा प्रदेश की योगी सरकार को भुगतना पड सकता है।

मिले बिना मैं नहीं जाऊंगी
प्रियंका ने शनिवार को कहा- गेस्ट हाउस में मुझे 24 घंटे हो गए हैं। क्या उनका (सरकार) का एक भी आदमी सोनभद्र आया। मैं प्रशासन से यही कहना चाहती हूं वे जहां चाहें (सोनभद्र या वाराणसी) पीड़ितों के परिजन से मुलाकात करवाएं। पीड़ितों से मिले बिना मैं नहीं जाऊंगी। प्रियंका ने पुलिस से पूछा- आखिर रोक क्यों रहे है। कोई तो वजह होनी चाहिए। कोई दस्तावेज दिखाइए। पुलिस ने कहा- पता करते हैं। इसके बाद 15 परिजन प्रियंका से मिलने के लिए पहुंचे। लेकिन दो को ही प्रियंका से मिलने को दिया गया। इस पर प्रियंका गांधी ने कहा कि जिनसे मिलने के लिए मैं आई थी, अब उन्हें मुझसे मिलने आना पड़ा फिर भी प्रशासन ने 13 लोगों को मुझसे मिलने नहीं दिया. प्रियंका ने कहा, आखिर महिला पीड़ित परिजनों से मिलने पर प्रशासन को क्या आपत्ति है. गौरतलब है कि बुधवार को सोनभद्र में गांव के मुखिया और उसके समर्थकों ने आदिवासियों की जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया था। विरोध करने पर 10 आदिवासियों को मार दिया गया। यह मामला घोरवाल जिले में यह 90 बीघा विवादित जमीन का था।

हार के बाद भी संघर्ष जारी
लोकसभा चुनाव के दौरान प्रियंका को यूपी में कांग्रेस महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। पहली बार वह इस चुनाव में एक राजनेता की तरह उतरी और उन्होंने अपने कदम नहीं पीछे किए। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस, सपा, बसपा सभी बीजेपी के आगे यूपी में ढेर हो गईं। हार के बाद मायावती और अखिलेश यादव के तेवर भी नरम पड गए लेकिन प्रियंका गांधी लगातार आगे की ओर बढती जा रही हैं।

राहुल के बाद प्रियंका ही हो सकती हैं कांग्रेस का चेहरा
लोकसभा चुनाव में हार के बाद राहुल गांधी बैकफुट पर चले गए तो भी प्रियंका ने अपनी जिम्मेदारी संभाली। अटकलें यह भी हैं आने वाले समय में वह कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभाल सकती हैं। प्रियंका के फ्रंटफुट पर आने से कांग्रेस को फायदा मिल सकता है।