कैदियों ने लिखा हाईकोर्ट को खत, कोर्ट ने थमाया दिल्ली सरकार को नोटिस

0
33

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने यहां जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों के एक पत्र को शुक्रवार को जनहित याचिका में तब्दील कर दिया.निचली अदालतों में सालों साल से लंबित मामलों की तेजी से सुनवाई की मांग को लेकर विचाराधीन कैदियों की तरफ से भेजे गए एक खत को दिल्ली हाईकोर्ट ने जनहित याचिका में तब्दील कर दिया है. दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन और जस्टिस एजे भंबानी की बेंच ने दिल्ली सरकार को इस मामले में नोटिस जारी करके जवाब मांगा है. हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि 13 अगस्त तक वो इस पर अपना जवाब दाखिल करे.

दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट को कुछ वक्त पहले पांच विचाराधीन कैदियों की तरफ से एक खत मिला. इस खत में विचाराधीन कैदियों ने अपनी शिकायत में बताया कि लंबे वक्त से उन्हें गिरफ्तार करने के बाद उनके केस में कई बरस बीतने के बाद भी कुछ नहीं हो पाया है. भेजे गए खत पर संज्ञान लेते हुए अब हाइकोर्ट ने इस खत पर सुनवाई की जरुरत समझते हुए इसे जनहित याचिका में तब्दील कर दिया है.

5 साल बाद भी आरोप तय नहीं

दिल्ली हाईकोर्ट को ये खत लिखने वाले कैदियों में एक कैदी उजैर अहमद को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 2013 में गिरफ्तार किया गया था और वह पिछले पांच साल से रोहिणी जेल में बंद हैं. उजैर ने दिल्ली हाईकोर्ट को लिखे अपने खत में कहा है कि उन्हें झूठे केस में फंसाया गया है. उजैर द्वारा जो आरोप लगाए गए हैं वह बेहद गंभीर हैं. 5 साल बीतने के बाद भी उनके खिलाफ कोर्ट में अब तक कोई आरोप तय नहीं किया जा सका है.

जुलाई 2016 से तिहाड़ जेल में बंद इमरान खान ने भी हाईकोर्ट को लिखे अपने खत में बताया है कि उसे एनआईए ने गिरफ्तार किया था और उसके खिलाफ जांच एजेंसी ने जुलाई 2016 में ही चार्जशीट दाखिल कर दी थी, लेकिन तब से अब तक उसके केस में कुछ नहीं हो सका है. इसके अलावा हाईकोर्ट को खत लिखने वाले तीन और कैदी भी 2014 से जेलों में बंद हैं और उनके मामलों में भी कोर्ट में अब तक कुछ खास नहीं हो पाया है.

यूं तो पूरे देश में ही जेलों की स्थिति बेहद खराब है और जेलों में क्षमता से अधिक कैदी हैं. यही हाल राजधानी दिल्ली के तिहाड़ जेल का भी है. तिहाड़ में करीब 13 से 14 हजार कैदियों को रखने की क्षमता है, वहां पर जेल क्षमता से 3 गुना ज्यादा कैदी रखे गए हैं. इन कैदियों में सबसे बड़ी संख्या विचाराधीन कैदियों की है. जेलों में जब भी सुधार की बात होती है तो सबसे पहले इन्हीं विचाराधीन कैदियों से जुड़े मामले सामने आते हैं, लेकिन लंबे समय तक कोर्ट में इनके मामले चलने के कारण ज्यादातर विचाराधीन कैदियों को काफी लंबा वक्त जेल में ही बिताना पड़ता है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here