चीनी कंपनियो कि मंशा गुजरात में हो BJP कि जीत, जाने क्यों

गुजरात चुनाव में पाकिस्तान, ताइवान के बाद अब चीन का नाम भी आ रहा है लेकिन इस बार मामला थोड़ा अलग है।

Published On: Dec 15, 2017 02:37 PM IST | Updated On: Dec 15, 2017 02:38 PM IST |   99

नई दिल्ली।

गुजरात चुनाव को लेकर आए सभी एक्जिट पोल भारतीय जनता पार्टी की सत्ता में एक बार फिर वापसी दर्शा रहे हैं. लेकिन सभी को इंतजार है 18 दिसंबर को आने वाले नतीजों का. गुजरात के नतीजों का सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेश में हो रहा है. पड़ोसी चीन भी गुजरात के चुनावी नतीजों पर अपने नज़रें गढ़ाए बैठा है. दरअसल, चीनी मीडिया की खबरों के मुताबिक चीन के ऑब्जर्वर्स गुजरात चुनाव के नतीजों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं क्योंकि वे इसको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुधारवादी अजेंडा को लेकर भारतीयों के रुख का लिटमस टेस्ट मान रहे हैं। चीनी कंपनियां चाहती हैं कि गुजरात में एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ही जीत हो. जिसका कारण है कि अगर बीजेपी जीतती है तो मोदी की रिफॉर्म की प्रक्रिया जारी रहेगी.

चीन को क्यों है गुजरात चुनाव में रूचि

पीटीआई फोटो

आप सोच रहे होंगे कि आखिर, हमारे पड़ोसी देश चीन की गुजरात चुनाव में क्‍या रूचि हो सकती है! लेकिन आपको बता दें कि चीनी कंपनियों इस समय बेसब्री से 18 दिसंबर का इंतजार कर रही हैं। चीनी कंपनियां चाहती हैं कि गुजरात में एक बार फिर भाजपा की सरकार बने।

काफी समय से कर रही है निवेश 

दरअसल, चीनी कंपनियां पिछले काफी समय से गुजरात में निवेश कर रही हैं। कई चीनी कंपनियों के बड़े-बड़े प्रोजेक्‍ट गुजरात में चल रहे हैं। अगर गुजरात में कांग्रेस या किसी और पार्टी की सरकार बनती है, तो ऐसे में इन प्रोजेक्‍ट्स पर प्रभाव पड़ना लाजिमी है। लेकिन भाजपा सरकार अगर फिर गुजरात की सत्‍ता संभालती है, तो चीनी कंपनियों को कोई परेशानी नहीं होगी।

आर्थिक रिफॉर्म का सिलसिला रहेगा जारी

आपको बता दें चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स में कहा गया है कि अगर गुजरात में मोदी को बड़ी जीत मिलती है तो उनका आर्थिक रिफॉर्म का सिलसिला जारी रह सकता है, जिसका इंतजार ही चीनी कंपनियां कर रही हैं. चीन की ओर से पिछले काफी समय से भारत में निवेश की मात्रा बढ़ी है. कई चीनी कंपनियों को यह विश्वास है कि भारत के नए और बड़े बाजार के रूप में तैयार हो रहा है. इसके लिए मोदी सरकार को आर्थिक फैसले ले रही है, वह चीनी कंपनियों के लिए फायदेमंद हो सकते हैं.

गौरतलब है जो कंपनियां भारत में काम कर रही हैं उन्हें चुनाव नतीजों के बाद आर्थिक नीतियों में संभावित बदलावों के लिए तैयार रहना चाहिए।

 

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