मंत्री ने विश्वास दिलाया, ट्रांसजेंडरों के अधिकारों की सुरक्षा देगा विधेयक

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Samajalive.in Bureau | Published On: Dec 06, 2017 09:10 PM IST |   67

भुवनेश्वर/नई दिल्ली। ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) विधेयक लोकसभा के शीतकालीन सत्र में लोकसभा में पेश किया जाएगा। इसमें ट्रांसजेंडरों के अधिकारों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। समाज के इस वर्ग को मुख्य धारा से जोड़ने की दिशा में यह केंद्र का सराहनीय कदम होगा। यह बात सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद्र गहलोत ट्रांसजेंडरों के प्रतिनिधि मंडल के साथ मीटिंग के बाद कही।

किन्नर अखाड़ा की ओडिशा प्रमुख मीरा परीड़ा ने दिल्ली से लौटकर बताया कि मंत्री ट्रांसजेंडरों से भी सुझाव मांगे हैं। कुछ सुझाव दे दिए गए हैं। ट्रांसजेंडर समुदाय पर आईपीसी की धारा 377 के तहत अपराधीकरण का खतरा बना हुआ है । आईपीसी की यह धारा किसी व्यक्ति द्वारा किसी भी अप्राकृतिक यौन संपर्क का अपराधीकरण करती है जिसमें समलैंगिंकता भी शामिल है। इस आशय पर संसदीय समिति की एक  रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब भाजपा के नेतृत्व में एनडीए सरकार पर समलैंगिकता को वैध बनाने का दबाव है।

ट्रांसजेंडर व्यक्ति अधिकार संरक्षण विधेयक 2016 में विवाह एवं तलाक, गोद लेने जैसे अन्य महत्वपूर्ण मानवाधिकार मामलों को जोड़ने पर विचार किया जा रहा है। यह ट्रांसजेंडर लोगों के जीवन के लिए अहम बताया जाता हैं। 

ट्रांसजेंडर परीड़ा बताती हैं कि उन्हें बताया गया है कि ट्रांसजेंडर समुदाय को उच्चतम न्यायालय के निर्देश के अनुसार सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग श्रेणी के तहत आरक्षण देने को लेकर विधेयक में कुछ  भी उल्लेख नहीं है। आरक्षण के मामले पर मंत्री श्री थावरचंद्र गहलौत से बातचीत की है। उन्होंने आश्वसन दिया है कि ट्रांसजेंडरों के अधिकारों का पूरा ध्यान रखा गया है। इसीलिए ट्रांसजेंडरों की राय इसमें शामिल कर रहे हैं। मीरा परीड़ा कहती हैं कि ट्रांसजेंडर होना शर्म की बात नहीं है। बल्कि शर्म की बात उन लोगों के लिए है जो इस समुदाय के लोगों को नापसंद करते है या उनका विरोध करते हैं। उनका कहना है कि सरकार के इस कदम का ट्रांसजेंडर स्वागत करते हैं। विधेयक में हम सबकी भावनाओं का भी समावेश होना चाहिए। मीरा का कहना है कि फाइनल ड्राफ्ट में प्रावधानों पर विचार विमर्श करने के लिए वह ओडिशा के योग्य वकीलों से सलाह भी लेंगी।

ट्रांसजेंडर को आरक्षण से चुनाव आयोग का इंकार                           

चुनावी सीटों पर ट्रांसजेंडरों को आरक्षण देने के ओडिशा सरकार के प्रस्ताव को केंद्रीय चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया है। ट्रांसजेंडरों की मांग पर राज्य सरकार ने लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और निकाय चुनाव में ट्रांसजेंडरों को 5 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव आयोग को सौंपा था। चुनाव आयोग का कहना है कि चुनाव में आरक्षण संविधान के अनुसार दिया जा चुका है। अलग से प्रावधान करने के लिए संविधान संशोधन की आवश्यकता पड़ेगी। यह काम विधायिका का है। ट्रांसजेंडरों ने यह मामला कोर्ट ले जाने का निर्णय लिया है।

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