यशवंत सिन्हा ने पीएम मोदी पर साधा निशाना : बोले 'तुगलक ने भी की थी नोटबंदी'

इस विवादित कदम के लिए मोदी की आलोचना करते हुए सिन्हा ने कहा कि नोटबंदी ने देश की अर्थव्यवस्था को 3.75 लाख करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया है।

Namrata Singh | Published On: Nov 15, 2017 11:00 AM IST | Updated On: Nov 15, 2017 11:03 AM IST |   112

खास बातें-

  • यशवंत सिन्‍हा ने नोटबंदी और जीएसटी को दो झटके बताया
  • नोटबंदी से अर्थव्यवस्था को 3।75 लाख करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा
  • 700 साल पहले शहंशाह मोहम्मद बिन तुगलक नई मुद्रा लेकर आया

अहमदाबाद:

पूर्व वित्‍त मंत्री व वरिष्‍ठ भाजपा नेता यशवंत सिन्‍हा ने मंगलवार (14 नवंबर) को दावा किया कि नोटबंदी और इसके प्रभाव के चलते देश को 3.75 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। सिन्‍हा ने नरेंद्र मोदी सरकार के 500 व 1,000 रुपये के नोटों को बंद करने के फैसले की तुलना करीब 700 साल पहले तुगलक वंश के शासक मुहम्‍मद-बिन-तुगलक के फैसले से की। द इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ‘लोकशाही बचाओ अभियान’ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते समय सिन्‍हा ने इस संबंध में कहा, ‘इतिहास में कई बार सम्राटों, शासकों और राजाओं ने नोटबंदी की… करीब 700 साल पहले इस देश में एक राजा था, जिसने अपनी मुद्रा चलाई और पुरानी वाली बंद करा दी। नोटबंदी 700 साल पहले हुई थी। राजा का नाम था मुहम्‍मद-बिन-तुगलक। वह इतिहास में अपने साम्राज्‍य की राजधानी दिल्‍ली से दौलताबाद करने के लिए कुख्‍यात है।” तुगलक ने सोने और चांदी के सिक्‍कों की जगह तांबे और पीतल की मुद्रा चलाई थी।सिन्‍हा ने कहा, ”नोटबंदी को इतना अहम माना गया कि पीएम ने फैसला किया कि वह बजाय आरबीआई गवर्नर या वित्‍त मंत्री को ऐसा करने देने के, खुद इसकी घोषणा करेंगे।” भाजपा नेता ने कहा कि जब मोदी का लगा कि नोटबंदी के लक्ष्‍य प्राप्‍त नहीं किए जा सकेंगे तो उन्‍होंने कैशलेस इकॉनमी की बात करना शुरू कर दिया। जब सिन्‍हा ने कहा कि ”किसी के पास तब कैश नहीं था, देश पहले ही कैशलेस हो चुका था” तो हॉल में खूब तालियां बजीं।सिन्‍हा ने कहा कि मोदी ने खुद कहा था कि नोटबंदी के बाद 18 लाख ट्रांजेक्‍शन की जांच की जा रही थी। उन्‍होंने कहा, ”दुनिया भर में एक संदेश जा रहा है कि भारत चोरों का देश है, हम सभी अवैध गतिविधियों में लिप्‍त हैं, यहां कोई ईमानदार नहीं है।” इसी दौरान सिन्‍हा ने दावा किया कि नोटबंदी की पूरी प्रक्रिया और आर्थिक गतिविधियों में आई गिरावट से देश को 3.75 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

 

गुजरात पर बोझ हैं अरुण जेटली-

इसके साथ ही वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) में त्रुटियां बताते हुए और इसके लिए केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की आलोचना करते हुए यशवंत सिन्हा ने कहा कि देशवासियों का यह मांग करना उचित होगा कि जेटली उन्हें हुई कठिनाइयों के लिए पद छोड़ें। उन्होंने यह भी कहा कि जेटली, गुजरात की जनता पर बोझ लगते हैं। जेटली गुजरात से राज्यसभा के सदस्य हैं। मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना कर रहे सिन्हा ने यह आरोप भी लगाया कि सभी पहलुओं पर विचार किये बिना जीएसटी को लागू कर दिया गया। पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री सिन्हा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था को नोटबंदी और जीएसटी के रूप में एक के बाद एक दो झटके लगे।

सिन्हा को 'लोकशाही बचाओ आंदोलन' से जुड़े कार्यकर्ताओं ने नोटबंदी तथा जीएसटी के प्रभाव और अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति के बारे में विचार व्यक्त करने के लिए मंगलवार को गुजरात आमंत्रित किया था। सिन्हा ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा, ''हमारे वित्त मंत्री गुजरात से नहीं हैं और वह यहां से राज्यसभा में चुने गये हैं। वह गुजरात की जनता पर बोझ हैं। अगर उन्हें यहां से नहीं चुना जाता तो एक गुजराती को मौका मिलता।'' उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री केवल एक व्यवस्था में विश्वास करते हैं कि ''चित्त भी मेरी, पट्ट भी मेरी।'' सिन्हा ने कहा कि अगर जीएसटी की दरें तय करते समय उचित तरीके से ध्यान दिया जाता तो इस तरह की विसंगतियां और अराजकता से बचा जा सकता था।
उन्होंने कहा, ''वह देश में गहराई तक दोषपूर्ण कर प्रणाली लागू करने का श्रेय नहीं ले सकते और इस देश की जनता को भली भांति इस मांग को उठाने का अधिकार है कि उन्हें अपना पद छोड़ देना चाहिए।'' जेटली ने कुछ दिन पहले कहा था कि सिन्हा 80 साल की उम्र में काम की तलाश कर रहे हैं। इस पर सिन्हा ने कहा कि वह अब भी तंदुरुस्त हैं और उन लोगों की तरह नहीं हैं जो बैठकर भाषण देते हैं। उनका इशारा संसद में बजट भाषण के बीच में जेटली के बैठ जाने की तरफ था।उन्होंने किसी का नाम लिये बिना कहा कि कुछ लोगों ने उनके और उनके बेटे केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा के बीच दरार पैदा करने की कोशिश की लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

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