बाल दिवस: बच्चों के प्यारे चाचा नेहरू के जन्मदिन पर जानें कुछ खास...

भारत में 14 नवंबर को बाल दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इसी दिन देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्मदिवस भी मनाया जाता है

Himanshu Srivastava | Published On: Nov 14, 2017 11:25 AM IST |   174

भारत में 14 नवंबर को बाल दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इसी दिन देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्मदिवस भी मनाया जाता है। उन्हें सभी लोग चाचा नेहरू के नाम से जानते थे। नेहरू को बच्चों से काफी ज्यादा लगाव था, वे हमेशा बच्चों के साथ उनके बीच होते थे। बच्चों के प्रति उनके इसी प्यार और स्नेह के कारण भारत में उनके जन्मदिन को बाल दिवस के तौर पर मनाया जाने लगा। पंडित नेहरू हमेशा बच्चों के प्रति प्यार और उन्हें महत्व देने की बात करते थे। वह कहते थे आज के बच्चे ही कल के भारत की नींव रखेंगे। जैसा हम उन्हें बड़ा करेंगे वैसा ही देश का भविष्य भी होगा।

पहले बाल दिवस 20 नवंबर को मनाया जाता था

भारत में 1964 से पहले बाल दिवस 20 नवंबर को मनाया जाता था लेकिन पंडित नेहरू की मौत के बाद बाल दिवस उनके जन्मदिन (14 नवंबर) पर मनाया जाने लगा। कई देशों में यह अलग-अलग दिन मनाया जाता है। बाल दिवस बच्चों के अधिकारों और शिक्षा के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए सेलिब्रेट किया जाता है। स्कूलों में इस दिन को खास बनाने के लिए कार्यक्रम रखे जाते हैं। फैंसी ड्रेस, डांस, नाटक आदि जैसे कार्यक्रम रखे जाते हैं। इस दिन नेहरु जी की सीख बच्चों को समझाने का प्रयास किया जाता है। इस तरह से बच्चों के जीवन में चाचा नेहरु के महत्व को बनाए रखने का प्रयास किया जाता है। कई देशों में बाल दिवस 1 जून को मनाया जाता है। वहीं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बाल दिवस या चिल्ड्रन डे 20 नवंबर को मनाया जाता है।

ऐसे थे चाचा नेहरू

वे आधुनिक भारतीय राष्ट्र-राज्य - एक सम्प्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, और लोकतान्त्रिक गणतन्त्र - के वास्तुकार मानें जाते हैं। कश्मीरी पण्डित समुदाय के साथ उनके मूल के कारण से वह पण्डित नेहरू भी बुलाएं जाते थे, जबकि भारतीय बच्चे उन्हें चाचा नेहरू के रूप में जानते हैं। स्वतन्त्र भारत के प्रथम पीएम का पद संभालने के लिए कांग्रेस द्वारा नेहरू निर्वाचित हुए।

इंडिया का संविधान 1950 में अधिनियमित हुआ, जिसके बाद उन्होंने आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक सुधारों के एक महत्त्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की।
चाचा नेहरू के नेतृत्व में कांग्रेस राष्ट्रीय और राज्य-स्तरीय चुनावों में प्रभुत्व दिखाते हुए और 1951, 1957, और 1962 के लगातार चुनाव जीता। एक सर्व-ग्रहण पार्टी के रूप में उभरी। उनके अन्तिम सालों में राजनीतिक मुसीबतों और 1962 के चीनी-भारत युद्ध में उनके नेतृत्व की असफलता के बावजूद, वे इंडिया के लोगों के बीच लोकप्रिय बने रहें। भारत में, उनका जन्मदिन बाल दिवस के रूप में मनाया जाता हैं।

जीवन परिचय

नेहरू का जन्म 14 नवम्बर 1889 को ब्रिटिश भारत में इलाहाबाद में हुआ। उनके पिता, मोतीलाल नेहरू (1861-1931), एक धनी बैरिस्टर जो कश्मीरी पण्डित समुदाय से थे।
स्वतन्त्रता संग्राम के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दो बार अध्यक्ष चुने गए। उनकी माता स्वरूपरानी थुस्सू (1868-1938), जो लाहौर में बसे एक सुपरिचित कश्मीरी ब्राह्मण परिवार से थी।
मोतीलाल की दूसरी पत्नी थी व पहली पत्नी की प्रसव के दौरान मृत्यु हो गई थी। नेहरू 3 बच्चों में से सबसे बड़े थे, जिनमें बाकी 2 लड़कियाँ थी। बड़ी बहन, विजया लक्ष्मी, बाद में संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली महिला अध्यक्ष बनी। सबसे छोटी बहन, कृष्णा हठीसिंग, एक उल्लेखनीय लेखिका बनी और उन्होंने अपने भाई पर कई पुस्तकें लिखी।

आपको बता दें कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 20 नवंबर को बाल दिवस मनाया जाता है। यूनाइटेड नेशंस के इंटरनेशनल चिल्ड्रन्स डे को एक समय तक बाल दिवस के रूप में मनाया जाता था।

हालांकि भारत में बाल दिवस देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के जन्मदिन यानि 14 नवंबर को ही मनाया जाता है। जवाहर लाल नेहरू को बच्चों से खासा लगाव भी था। बच्चों ने ही जवाहर लाल को चाचा नाम दिया था। भारतीय प्रधानमंत्री के रूप में अपने व्यस्त जीवन के बावजूद भी बच्चों से बेहद लगाव रखते थे। बच्चों के लिये बाल दिवस बहुत ही लोक प्रिय है। उस दिन बच्चों को उनकी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलता है।

 1956 से मनाया जाता है बाल दिवस

चाचा नेहरु को श्रद्धांजलि देने के लिये 1956 से बाल दिवस के रुप में उनके जन्मदिवस को मनाया जा रहा है। नेहरु जी कहते थे कि बच्चे देश का भविष्य हैं इसलिये ये जरुरी है कि उन्हें प्यार और उनकी देख-भाल की जाए, जिससे वो अपने पैरों पर खड़े हो सकें। हमें उन्हें आगे बढ़ाने की जरुरत है जो मुमकिन है जब सभी भारतीय अपनी जिम्मेदारियों को समझें।

यहां से की शिक्षा प्राप्त

चाचा नेहरू ने विश्व के कुछ खास विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में शिक्षा प्राप्त की थी। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा हैरो से और कॉलेज की शिक्षा ट्रिनिटी कॉलेज, लंदन से पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने अपनी लॉ की डिग्री कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पूरी की। इंग्लैंड में उन्होंने 7 वर्ष व्यतीत किए जिसमें वहां के फैबियन समाजवाद तथा आयरिश राष्ट्रवाद के लिए एक तर्कसंगत दृष्टिकोण विकसित किया।
नेहरू 1912 में इंडिया लौटे और वकालत शुरू की। 1916 में उनकी मैरिज कमला नेहरू से हुई।

कैसा रहा राजनैतिक जीवन

1917 में नेहरू होम रुल लीग‎ में शामिल हो गए। राजनीति में उनकी असली दीक्षा दो साल बाद 1919 में हुई जब वे महात्मा गांधी के संपर्क में आए।
उस वक्त महात्मा गांधी ने रॉलेट अधिनियम के खिलाफ एक अभियान शुरू किया था। नेहरू, महात्मा गांधी के सक्रिय लेकिन शांतिपूर्ण, सविनय अवज्ञा आंदोलन के प्रति खासे आकर्षित हुए।
नेहरू ने महात्मा गांधी के उपदेशों के मुताबिक अपने परिवार को भी ढाल लिया। जवाहरलाल और मोतीलाल नेहरू ने पश्चिमी कपडों और महंगी संपत्ति का त्याग कर दिया। वह अब एक खादी कुर्ता और गांधी टोपी पहनने लगे। नेहरू ने 1920-1922 में असहयोग आंदोलन में सक्रिय हिस्सा लिया और इस दौरान पहली बार गिरफ्तार किए गए। कुछ माह के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।

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